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Fiscal Deficit Update: राजकोषीय घाटे में सुधार! FY26 के 11 महीनों में ₹12.52 लाख करोड़ रहा घाटा; इंफ्रास्ट्रक्चर पर सरकार ने खर्च किए ₹9.3 लाख करोड़

केंद्र सरकार ने सोमवार, 30 मार्च 2026 को देश की वित्तीय सेहत से जुड़े महत्वपूर्ण आंकड़े पेश किए हैं। चालू वित्त वर्ष 2025-26 (FY26) के शुरुआती 11 महीनों (अप्रैल-फरवरी) में भारत का राजकोषीय घाटा (Fiscal Deficit) ₹12.52 लाख करोड़ रहा है। यह आंकड़ा पूरे साल के संशोधित अनुमान का 80.4% है। राहत की बात यह है कि पिछले साल की समान अवधि (₹13.47 लाख करोड़) के मुकाबले इसमें गिरावट आई है, जो देश की अर्थव्यवस्था में ‘फिस्कल कंसॉलिडेशन’ यानी वित्तीय मजबूती के संकेतों को दर्शाता है।फरवरी में घाटा बढ़ने की मुख्य वजह: कैपिटल एक्सपेंडिचरहालांकि सालाना आधार पर घाटा कम हुआ है, लेकिन अकेले फरवरी 2026 के आंकड़ों पर नजर डालें तो वित्तीय घाटा पिछले साल के ₹1.77 लाख करोड़ से बढ़कर ₹2.71 लाख करोड़ पर पहुंच गया। इस उछाल के पीछे सरकार की एक सोची-समझी रणनीति है:इंफ्रास्ट्रक्चर पर जोर: सरकार ने फरवरी में बुनियादी ढांचे (Infrastructure) के विकास पर खर्च यानी कैपिटल एक्सपेंडिचर (Capex) को तेज कर दिया। फरवरी में यह सालाना आधार पर ₹54,500 करोड़ से बढ़कर ₹87,000 करोड़ हो गया।11 महीने का रिकॉर्ड: अप्रैल 2025 से फरवरी 2026 के बीच सरकार ने कुल ₹9.3 लाख करोड़ का कैपिटल एक्सपेंडिचर किया है, जो पिछले साल (₹8.1 ट्रिलियन) से कहीं अधिक है। यह दिखाता है कि सरकार विकास की रफ्तार को धीमा नहीं होने देना चाहती।रेवेन्यू के मोर्चे पर सरकार की ‘बल्ले-बल्ले’वित्तीय स्थिति सुधरने का एक बड़ा कारण सरकार की कमाई (Revenue) में हुई जबरदस्त बढ़ोतरी है:नेट टैक्स कलेक्शन: इस वित्त वर्ष के 11 महीनों में टैक्स वसूली ₹20.2 ट्रिलियन से बढ़कर ₹21.5 ट्रिलियन पर पहुंच गई है।नॉन-टैक्स रेवेन्यू: टैक्स के अलावा अन्य स्रोतों से होने वाली कमाई भी ₹4.9 ट्रिलियन से उछलकर ₹5.8 ट्रिलियन हो गई है।कुल खर्च: आय बढ़ने के साथ सरकार का खर्च भी बढ़ा है, जो ₹38.9 ट्रिलियन से बढ़कर ₹40.4 ट्रिलियन पर पहुंच गया है।रेटिंग एजेंसियों और बाजार की नजरवित्त वर्ष 2026 के आखिरी महीने (मार्च) के आंकड़े अब सबसे महत्वपूर्ण होंगे। बाजार और अंतरराष्ट्रीय रेटिंग एजेंसियां इस बात पर बारीकी से नजर रखेंगी कि क्या सरकार अपने ₹15.58 लाख करोड़ के संशोधित वार्षिक घाटे के लक्ष्य के भीतर रहने में सफल होती है।विशेषज्ञों की राय: जानकारों का मानना है कि टैक्स कलेक्शन में मजबूती और खर्च के प्रबंधन को देखते हुए भारत सही दिशा में है। हालांकि, मिडिल ईस्ट के तनाव और ऊर्जा संकट जैसे बाहरी झटके आने वाले समय में राजकोषीय गणित को थोड़ा प्रभावित कर सकते हैं।

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