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हथियारों का जखीरा लेकर उड़ा अमेरिकी ‘हैवान’: फिर मिडिल ईस्ट में मचेगी तबाही? B-1B लांसर बॉम्बर की उड़ान ने बढ़ाई भारी टेंशन!

पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) का रणक्षेत्र एक बार फिर महायुद्ध के मुहाने पर आकर खड़ा हो गया है। क्षेत्रीय तनाव, मिसाइल हमलों के अंदेशे और प्रॉक्सी संघर्षों के बीच अमेरिकी वायुसेना (US Air Force) के सबसे विध्वंसक और घातक रणनीतिक बॉम्बर B-1B Lancer (जिसे सैन्य गलियारों में 'द बोन' और उसकी मारक क्षमता के कारण 'हथियारों का हैवान' कहा जाता है) की ताजा तैनाती और लंबी दूरी की उड़ान ने पूरे मध्य पूर्व में भारी खलबली मचा दी है।

पेंटागन की ओर से इस सुपरसोनिक हेवी बॉम्बर को संघर्ष क्षेत्र के निकट एयरस्पेस में उतारना केवल एक नियमित अभ्यास नहीं माना जा रहा है, बल्कि इसे ईरान समर्थित मिलिशिया गुटों और क्षेत्रीय विरोधी ताकतों के खिलाफ खुला युद्ध उद्घोष और सीधी चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है। हथियारों के विशाल जखीरे के साथ इस दैत्य रूपी विमान के उड़ान भरते ही खाड़ी देशों और वैश्विक रक्षा विशेषज्ञों की सांसें अटक गई हैं।

क्या है B-1B लांसर बॉम्बर और इसे 'हथियारों का हैवान' क्यों कहते हैं

रॉकवेल (अब बोइंग) द्वारा विकसित B-1B लांसर अमेरिकी लंबी दूरी के रणनीतिक बॉम्बर बेड़े की रीढ़ की हड्डी है। यह एक सुपरसोनिक, वेरिएबल-स्वीप विंग हेवी बॉम्बर है, जो ध्वनि की गति से भी तेज (लगभग मच 1.25) उड़ने की क्षमता रखता है। इस विमान की सबसे खौफनाक खासियत इसकी पेलोड क्षमता है, जो अमेरिकी वायुसेना की सूची में किसी भी अन्य लड़ाकू विमान से कहीं अधिक है।

यह महाविनाशक विमान अपने आंतरिक वेपन्स बे में लगभग 34,000 किलोग्राम (75,000 पाउंड) और बाहरी हार्डपॉइंट्स पर 23,000 किलोग्राम (50,000 पाउंड) तक के आधुनिकतम गोला-बारूद और सटीक निर्देशित हथियारों को ले जा सकता है। इसमें जीपीएस-गाइडेड जेडीएएम (JDAM) बम, ज्वाइंट एयर-टू-सरफेस स्टैंडऑफ मिसाइलें (JASSM) और लंबी दूरी की एंटी-शिप मिसाइलें (LRASM) शामिल हैं। यानी एक ही उड़ान में यह बॉम्बर दर्जनों भूमिगत बंकरों, रडार स्टेशनों, मिसाइल लॉन्च पैड्स और कमांड सेंटरों को पलक झपकते ही मलबे के ढेर में तब्दील करने की ताकत रखता है।

मिडिल ईस्ट के आसमान में अचानक क्यों गरजे B-1B लांसर के इंजन

पश्चिम एशिया में हाल के दिनों में अमेरिकी सैन्य बेसों, वाणिज्यिक जहाजों और सहयोगी देशों के ठिकानों पर बढ़ते हमलों के बाद वाशिंगटन ने अपनी शक्ति प्रदर्शन (Show of Force) की नीति को चरम पर पहुंचा दिया है। अमेरिकी केंद्रीय कमान (US CENTCOM) ने इस घातक बॉम्बर को अमेरिकी मुख्य भूमि (Mainland US) से बिना रुके अंतरमहाद्वीपीय उड़ान (Intercontinental Flight) भरवाकर यह संदेश दिया है कि अमेरिकी सेना दुनिया के किसी भी कोने से कुछ ही घंटों में सटीक और विध्वंसक प्रहार कर सकती है।

हवा में ही ईंधन भरने (Aerial Refueling) वाले विमानों की मदद से B-1B लांसर ने बिना रुके हजारों मील का सफर तय किया और मिडिल ईस्ट के संवेदनशील हवाई क्षेत्र में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। रक्षा रणनीतिकारों का मानना है कि इस कदम का मुख्य उद्देश्य विरोधी खेमों को किसी भी बड़े दुस्साहस से पीछे हटने पर मजबूर करना और इजरायल व खाड़ी के सहयोगी देशों को अमेरिकी सैन्य सुरक्षा की अटूट गारंटी का भरोसा दिलाना है।

लखनऊ, दिल्ली और पूरे भारत पर इस सैन्य तनाव का क्या होगा प्रभाव

मध्य पूर्व का यह इलाका भारत की ऊर्जा सुरक्षा, व्यापार और प्रवासी नागरिकों के हितों से सीधे तौर पर जुड़ा हुआ है। उत्तर प्रदेश (विशेषकर लखनऊ, कानपुर, गोरखपुर, पूर्वांचल क्षेत्र), दिल्ली-एनसीआर, बिहार, केरल और पंजाब जैसे राज्यों के लाखों प्रवासी कामगार संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब, कतर और कुवैत जैसे खाड़ी देशों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।

यदि B-1B लांसर की यह उड़ान किसी बड़े हवाई हमले या व्यापक युद्ध की शुरुआत साबित होती है, तो इसका पहला खामियाजा हवाई यात्रा पर पड़ेगा। लखनऊ के अमौसी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे और दिल्ली के आईजीआई एयरपोर्ट से यूरोप व पश्चिम एशिया जाने वाली वाणिज्यिक उड़ानों के रूट बदले जा सकते हैं, जिससे यात्रा समय और हवाई किरायों में भारी उछाल आएगा। इसके साथ ही, होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में तनाव बढ़ने पर भारत के लिए कच्चे तेल (Crude Oil) की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है, जिससे घरेलू स्तर पर ईंधन के दाम और माल ढुलाई लागत बढ़ने से महंगाई का नया संकट खड़ा हो सकता है।

अंडरग्राउंड बंकरों और एयर डिफेंस सिस्टम को भेदने की अचूक तकनीक

B-1B लांसर की सबसे खतरनाक रणनीतिक ताकत इसका लो-एल्टीट्यूड टेरेन फॉलोइंग रडार (Terrain-Following Radar) है। यह भारी-भरकम विमान बेहद कम ऊंचाई पर, पहाड़ियों और घाटियों के बीच से गुजरते हुए रडार की नजरों से बचकर दुश्मन के एयर डिफेंस जोन में घुसने की महारत रखता है। जब यह जमीन से मात्र कुछ सौ फीट ऊपर उड़ता है, तो आधुनिक से आधुनिक एंटी-एयरक्राफ्ट रडार भी इसे समय रहते ट्रैक करने में नाकाम साबित होते हैं।

इसके अलावा, इसमें लगे उन्नत इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर और जैमिंग सुइट्स दुश्मन की मिसाइलों के ट्रैकिंग सिग्नल को भटकाने में पूरी तरह सक्षम हैं। इस बॉम्बर की यह क्षमता भूमिगत सैन्य ठिकानों, सेंट्रीफ्यूज सेंटरों और मिसाइल डिपो को तबाह करने के लिए विशेष रूप से डिजाइन की गई है, जिससे इस क्षेत्र के कई देशों के सैन्य नेतृत्व में हड़कंप मचा हुआ है।

क्या टल जाएगा संकट या शुरू होगी आर-पार की जंग

सामरिक विशेषज्ञों का आकलन है कि पेंटागन की यह आक्रामक उड़ान एक दोधारी तलवार की तरह है। एक तरफ जहां यह कदम विरोधियों को बैकफुट पर धकेलने के लिए उठाया गया है, वहीं दूसरी तरफ युद्ध के मुहाने पर इस तरह के घातक हेवी बॉम्बर की मौजूदगी से किसी भी छोटी सी गलतफहमी (Miscalculation) के चलते पूर्ण युद्ध भड़कने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।

यदि विरोधी गुटों ने इस शक्ति प्रदर्शन को चुनौती मानकर किसी अमेरिकी बेस या युद्धपोत पर जवाबी स्ट्राइक कर दी, तो B-1B लांसर की यह मौजूदगी महज चेतावनी नहीं रहेगी, बल्कि यह विमान आधुनिक सैन्य इतिहास के सबसे बड़े और विध्वंसक हवाई हमलों को अंजाम देता हुआ नजर आ सकता है। आने वाले कुछ दिन पूरे विश्व की स्थिरता और वैश्विक शांति के लिए अत्यंत निर्णायक साबित होने वाले हैं।

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