20 दिनों से भूखे सोनम वांगचुक की हालत बेहद नाजुक, 9 किलो वजन गिरा, क्या इरोम शर्मिला जैसा कदम उठाएगी सरकार?

नई दिल्ली: लद्दाख की मांगों को लेकर भूख हड़ताल पर बैठे सामाजिक और जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के आंदोलन का आज शुक्रवार को 20वां दिन है। लगातार अनशन के कारण उनका वजन 9 किलोग्राम तक गिर चुका है और उनके अंगों पर इसका बुरा असर पड़ने लगा है। वांगचुक की बिगड़ती सेहत पर दिल्ली हाई कोर्ट ने भी गहरी चिंता जताई है। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि हर नागरिक का जीवन अनमोल है और केंद्र सरकार को उनकी जान बचाने के लिए हरसंभव कोशिश करनी चाहिए। कोर्ट ने सरकारी डॉक्टरों को रोजाना उनकी क्लीनिकल मॉनिटरिंग करने का निर्देश दिया है।
सरकार के पास क्या हैं विकल्प? क्या अपनाया जाएगा मणिपुर वाला फॉर्मूला?
लगातार गिरती सेहत के बावजूद सोनम वांगचुक अपनी हड़ताल खत्म करने को तैयार नहीं हैं। उनका कहना है कि सरकार से बिना किसी ठोस आश्वासन के पीछे हटने से गलत संदेश जाएगा। ऐसे में वांगचुक की जान बचाने के लिए सरकार के पास क्या रास्ते बचे हैं? राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि क्या सरकार उनके लिए मानवाधिकार कार्यकर्ता इरोम शर्मिला वाला तरीका अपना सकती है, जिन्हें 16 साल लंबे आंदोलन के दौरान नाक में नली डालकर जिंदा रखा गया था।
जानिए क्या था इरोम शर्मिला का 16 साल लंबा अनशन
'आयरन लेडी ऑफ मणिपुर' के नाम से मशहूर इरोम शर्मिला ने साल 2000 में मणिपुर से AFSPA कानून हटाने की मांग को लेकर दुनिया की सबसे लंबी भूख हड़ताल शुरू की थी। तब पुलिस ने इसे खुदकुशी की कोशिश मानकर उन्हें न्यायिक हिरासत में ले लिया था। उनकी जान बचाने के लिए डॉक्टरों ने नाक के जरिए पेट तक जाने वाली नली (Nasogastric Intubation) का इस्तेमाल किया था। करीब 16 सालों तक डॉक्टरों और गार्ड्स की निगरानी में इसी 3 फीट लंबी ट्यूब से उन्हें लिक्विड न्यूट्रिएंट्स और दवाइयां पंप करके जिंदा रखा गया था, जिसे उन्होंने आखिरकार 2016 में शहद चखकर तोड़ा था।
वांगचुक अड़े अपनी जिद पर, 20 जुलाई को संसद मार्च का आह्वान
सोनम वांगचुक ने एक वीडियो संदेश जारी कर समर्थकों से भावुक अपील की है और 20 जुलाई को प्रस्तावित संसद मार्च में शामिल होने का आह्वान किया है। डॉक्टर लगातार चेतावनी दे रहे हैं कि अनशन का यह चरण बेहद गंभीर है, जहां अंगों का काम बंद होना (ऑर्गन फेलियर) शुरू हो सकता है। अब पूरी देश की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि 25 अगस्त को होने वाली अदालती सुनवाई या उससे पहले सरकार इस संवेदनशील गतिरोध को सुलझाने के लिए क्या कदम उठाती है।