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US Election Security: क्या वाकई हैक हो सकता है अमेरिकी चुनाव? ट्रंप के दावों के बीच जानें 10 हजार सेंटर्स और मतपत्रों की सुरक्षा का पूरा सच!

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर साइबर हमलों को लेकर एक बड़ा और चौंकाने वाला दावा किया है। ट्रंप का कहना है कि रूस, चीन, ईरान और उत्तर कोरिया जैसी विदेशी ताकतें और कुछ गैर-सरकारी समूह साइबर हमलों के जरिए अमेरिकी चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित करने की पूरी क्षमता रखते हैं। उन्होंने आशंका जताई है कि देश की डिजिटल चुनाव प्रणाली में सेंध लगाकर नतीजों के साथ छेड़छाड़ की जा सकती है। ट्रंप के इस बयान के बाद वैश्विक पटल पर अमेरिका के चुनावी सिस्टम की सुरक्षा को लेकर बहस छिड़ गई है। हालांकि, 'एसोसिएटेड प्रेस' (AP) की विस्तृत रिपोर्ट और शीर्ष चुनाव विशेषज्ञों का स्पष्ट कहना है कि अमेरिका की चुनाव व्यवस्था दुनिया की सबसे जटिल, विकेंद्रीकृत और अभेद्य प्रणालियों में से एक है। ऐसे में यह समझना जरूरी है कि अमेरिकी चुनाव प्रणाली काम कैसे करती है और इसमें सुरक्षा के क्या इंतजाम हैं।

क्यों हैक करना नामुमकिन है अमेरिका का चुनाव सिस्टम?

एसोसिएटेड प्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका में चुनाव प्रक्रिया भारत या अन्य देशों की तरह किसी एक केंद्रीय निर्वाचन आयोग द्वारा संचालित नहीं की जाती। पूरे अमेरिका में चुनाव किसी एक संस्था के बजाय 10,000 से ज्यादा स्वतंत्र और अलग-अलग स्थानीय चुनाव क्षेत्रों (लोकल ज्यूरिसडिक्शन) में कराए जाते हैं।

अमेरिकी संविधान के तहत राज्यों को अपने तरीके से चुनाव कराने का पूर्ण अधिकार प्राप्त है। हालांकि अमेरिकी कांग्रेस (संसद) कुछ बुनियादी नियम तय कर सकती है, लेकिन वोटिंग मशीनों के चयन से लेकर गिनती तक की पूरी जिम्मेदारी पूरी तरह से राज्यों और स्थानीय चुनाव अधिकारियों के कंधों पर होती है। यही वजह है कि पूरे देश में कोई एक सेंट्रलाइज्ड (केंद्रीय) डिजिटल सिस्टम नहीं है जिसे एक साथ हैक करके नतीजे बदले जा सकें। हर क्षेत्र का अपना अलग और ऑफलाइन ढांचा होता है।

वोटर फ्रॉड रोकने के लिए थ्री-लेयर सिक्योरिटी सिस्टम

अमेरिकी चुनाव प्रणाली में गड़बड़ी या धोखाधड़ी (वोटर फ्रॉड) की आशंकाएं न के बराबर होती हैं, और यदि कोई ऐसा प्रयास करता भी है, तो वह तुरंत पकड़ में आ जाता है। अमेरिकी कानून के तहत चुनावी नियमों का उल्लंघन करना एक बेहद गंभीर और गैर-जमानती श्रेणी का अपराध माना जाता है।

सुरक्षा के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:

  • कठोर कानूनी कार्रवाई: एक से अधिक बार मतदान करना, किसी अन्य मृत या जीवित व्यक्ति के नाम पर फर्जी वोट डालना, बैलेट पेपर से छेड़छाड़ करना या गलत दस्तावेज देना संघीय अपराध है, जिसके लिए भारी आर्थिक जुर्माना और लंबी जेल की सजा का प्रावधान है।

  • पहचान का कड़ा सत्यापन: मतदान केंद्र पर वोट डालते समय अधिकांश राज्यों में वैध फोटो पहचान पत्र (Photo ID) मांगा जाता है।

  • मेल-इन बैलेट सुरक्षा: डाक (Mail-in Ballot) के जरिए होने वाले मतदान में सुरक्षा को दोगुना करने के लिए मतदाता के हस्ताक्षरों का मिलान (Signature Verification), आधिकारिक गवाहों की गवाही या नोटरी जैसी बेहद जटिल और अतिरिक्त कानूनी प्रक्रियाएं अपनाई जाती हैं।

2020 चुनाव चोरी के दावों पर क्या कहते हैं आधिकारिक आंकड़े?

डोनाल्ड ट्रंप लगातार यह सार्वजनिक दावा करते रहे हैं कि साल 2020 का राष्ट्रपति चुनाव एक बड़ी धांधली के जरिए उनसे चुराया गया था। इस दावे की जमीनी हकीकत जानने के लिए एसोसिएटेड प्रेस ने साल 2021 में ट्रंप द्वारा विवादित ठहराए गए छह सबसे प्रमुख स्विंग स्टेट्स (राज्यों) में वोटर फ्रॉड के हर एक संभावित और संदिग्ध मामले की विस्तृत समीक्षा की थी।

इस गहन पड़ताल में पाया गया कि इन राज्यों में कुल मिलाकर 475 से भी कम गड़बड़ी के मामले सामने आए थे, जो कि चुनाव के अंतिम परिणाम को बदलने के लिहाज से तिनके के बराबर भी नहीं थे। बड़े पैमाने पर चुनावी धांधली के ट्रंप के इन तमाम कानूनी आरोपों को अमेरिका की कई प्रांतीय व संघीय अदालतों, राज्य के चुनाव अधिकारियों और यहां तक कि ट्रंप सरकार के खुद के 'होमलैंड सिक्योरिटी विभाग' ने सिरे से खारिज कर दिया था। उस दौरान ट्रंप द्वारा ही नियुक्त किए गए तत्कालीन अमेरिकी अटॉर्नी जनरल विलियम बार ने भी सार्वजनिक रूप से स्पष्ट किया था कि जांच में ऐसा कोई भी ठोस सबूत नहीं मिला है जो 2020 के चुनावी नतीजों को प्रभावित कर सके।

ट्रंप के आरोपों पर भड़का चीन, कहा- "बेबुनियाद और मनगढ़ंत"

डोनाल्ड ट्रंप द्वारा राष्ट्र के नाम संबोधन में लगाए गए साइबर घुसपैठ के आरोपों पर चीन ने बेहद कड़ी और आक्रामक प्रतिक्रिया दी है। एपी की रिपोर्ट के अनुसार, चीनी विदेश मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता लिन जियान ने बीजिंग में आयोजित एक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान साफ कहा कि चीन ने कभी भी अमेरिका के आंतरिक मामलों या उनके चुनावों में किसी भी तरह का हस्तक्षेप नहीं किया है और न ही भविष्य में उसकी ऐसी कोई मंशा है।

प्रवक्ता लिन जियान ने ट्रंप के दावों को "पूरी तरह से मनगढ़ंत, राजनीति से प्रेरित और बेबुनियाद" करार दिया। उन्होंने वाशिंगटन को नसीहत देते हुए अपील की कि अमेरिका अपनी घरेलू राजनीति और चुनावी खींचतान में चीन का नाम घसीटना तुरंत बंद करे और इसके बजाय दोनों महाशक्तियों के द्विपक्षीय रिश्तों को रचनात्मक तरीके से बेहतर बनाने की दिशा में काम करे।

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