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57 अरब डॉलर की निकासी के बाद बदला विदेशी निवेशकों का मिजाज, क्या अब रॉकेट बनेगा शेयर बाजार

भारतीय शेयर बाजार के लिए पिछले कुछ महीने काफी उतार-चढ़ाव भरे रहे हैं, लेकिन अब विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की रणनीति में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। हाल ही में भारतीय बाजारों से रिकॉर्ड तोड़ निकासी करने के बाद विदेशी निवेशकों ने एक बार फिर भारतीय अर्थव्यवस्था और कंपनियों के मजबूत बुनियादी फंडामेंटल्स पर भरोसा जताना शुरू कर दिया है। बाजार के जानकारों का मानना है कि इस नए घटनाक्रम से निवेशकों में एक बार फिर सकारात्मक ऊर्जा का संचार हुआ है और बाजार की चाल में एक नया सुधार देखने को मिल सकता है।

भारी बिकवाली के बाद विदेशी निवेशकों की रणनीति में यू-टर्न

भारतीय पूंजी बाजार से विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) ने पिछले कुछ समय के दौरान लगभग 57 अरब डॉलर की भारी-भरकम राशि बाहर निकाल ली थी। इस रिकॉर्ड निकासी की वजह से घरेलू शेयर बाजार में लगातार दबाव बना हुआ था और निवेशकों की चिंताएं काफी बढ़ गई थीं। वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव, अमेरिका में ब्याज दरों का उच्च स्तर और अन्य उभरते बाजारों की तुलना में भारतीय शेयरों का मूल्यांकन (Valuation) अधिक होना इस बिकवाली के मुख्य कारण माने जा रहे थे। हालांकि, अब विदेशी निवेशकों के इस रुख में अचानक आए बदलाव ने बाजार विश्लेषकों को भी चौंका दिया है और यह इस बात का संकेत है कि विदेशी निवेशक अब भारतीय बाजार की दीर्घकालिक विकास गाथा पर फिर से दांव लगाने के लिए तैयार हैं।

क्या भारतीय शेयर बाजार में आने वाली है बड़ी तेजी?

विदेशी निवेशकों द्वारा बिकवाली का दौर थमने और लिवाली की तरफ कदम बढ़ाने से घरेलू निवेशकों के चेहरे पर मुस्कान लौट आई है। विशेषज्ञों का कहना है कि जब बड़े ग्लोबल फंड्स भारतीय बाजार में दोबारा पैसा लगाना शुरू करते हैं, तो लार्ज कैप शेयरों के साथ-साथ मिड कैप और स्मॉल कैप शेयरों में भी एक नया जोश भर जाता है। भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूत जीडीपी ग्रोथ, खुदरा महंगाई पर नियंत्रण और कंपनियों के शानदार तिमाही नतीजे इस बात की गवाही देते हैं कि देश का बाजार किसी भी वैश्विक झटके से निपटने के लिए पूरी तरह सक्षम है। ऐसे में यह सवाल हर निवेशक के मन में है कि क्या आने वाले दिनों में बाजार नई ऊंचाइयों को छूने के लिए पूरी तरह तैयार है।

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