82 साल पुराने डूबे जहाज से निकला चांदी का अकूत खजाना: जानिए क्या है पूरा मामला

समुद्र की अथाह गहराइयों में न जाने कितने ही रहस्य और बेशकीमती खजाने दफन हैं, जिनका समय-समय पर खुलासा दुनिया को हैरान कर देता है। हाल ही में इतिहास के पन्नों से जुड़ी एक ऐसी ही रोमांचक और हैरान करने वाली घटना फिर से चर्चा में आ गई है, जो द्वितीय विश्व युद्ध के दौर की याद दिलाती है। आज से करीब 82 साल पहले अरब सागर में एक अमेरिकी मालवाहक जहाज दुश्मन देश की पनडुब्बी के हमले का शिकार होकर समुद्र की गहराइयों में हमेशा के लिए समा गया था। इस जहाज में कोई आम सामान नहीं, बल्कि सऊदी अरब के लिए ले जाए जा रहे लाखों की संख्या में चांदी के चमचमाते सिक्के यानी सिल्वर रियाल लदे हुए थे। हाल ही में जब इस डूबे हुए पोत के मलबे से लगभग 16 टन वजन की चांदी और उसके सिक्के बाहर निकाले गए, तो दुनिया भर के इतिहासकारों, खोजकर्ताओं और खजाने के शिकारियों की आंखें फटी की फटी रह गईं। इस बड़ी खोज ने एक बार फिर से उस दौर के समुद्री इतिहास और उस खजाने से जुड़े अनसुने रहस्यों को हवा दे दी है, जिसके बारे में जानकर हर कोई अचंभित है।
द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान कैसे समंदर में समाया था एस एस जॉन बैरी जहाज?
यह पूरी कहानी साल 1944 के उस दौर की है जब पूरी दुनिया द्वितीय विश्व युद्ध की आग में जल रही थी। अमेरिका का 'एस एस जॉन बैरी' (SS John Barry) नामक एक लिबर्टी कार्गो जहाज अपनी एक बेहद गोपनीय और महत्वपूर्ण यात्रा पर निकला था। इस जहाज के होल्ड में लगभग 30 लाख अमेरिकी टकसाल में ढाले गए विशेष सऊदी सिल्वर रियाल भरे हुए थे। इन सिक्कों को सऊदी अरब भेजने के पीछे मुख्य उद्देश्य वहां तेजी से विकसित हो रहे तेल उद्योग (ऑयल इंडस्ट्री) और Aramco से जुड़े कामगारों को उनका वेतन चुकाना था, क्योंकि उस समय सऊदी अर्थव्यवस्था में कागजी नोटों का चलन नहीं था और केवल चांदी के सिक्कों का ही बोलबाला था। अगस्त 1944 के दौरान जब यह जहाज अरब सागर के रास्ते से गुजर रहा था, तभी एक जर्मन पनडुब्बी (U-Boat) ने इस पर टॉरपीडो से अचानक हमला बोल दिया। इस घातक हमले के बाद जहाज खुद को संभाल नहीं पाया और देखते ही देखते पानी में डूब गया। हालांकि जहाज पर सवार अधिकांश नाविकों और कर्मचारियों को सुरक्षित बचा लिया गया था, लेकिन इसके साथ ही लाखों चांदी के सिक्के समुद्र की करीब 8,500 फीट यानी ढाई किलोमीटर से अधिक गहराई में हमेशा के लिए दफन हो गए।
गहरे समुद्र में चलाए गए विशेष अभियान में मिली 16 टन चांदी और सिक्कों की खेप
दशकों तक यह कीमती खजाना समुद्र की खामोश गहराइयों में ही छिपा रहा और किसी को इसकी सटीक स्थिति का अंदाजा नहीं था। लेकिन आधुनिक तकनीक और गहरे समुद्र में खोजबीन करने वाली विशेष कंपनियों ने हार नहीं मानी। दशकों बाद इस डूबे हुए जहाज के मलबे का पता लगाने के लिए एक हाई-टेक और बेहद खर्चीला रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया। फ्रांसीसी शोध संगठनों और आधुनिक ड्रिलिंग जहाजों की मदद से पानी के मीलों नीचे वीडियो-सुसज्जित भारी-भरकम उपकरणों को उतारा गया। जब इन रोबोटिक और तकनीकी उपकरणों ने मलबे की थाह ली, तो वहां चांदी के सिक्कों का जखीरा देखकर खोजकर्ताओं के होश उड़ गए। इस सफल और ऐतिहासिक रिकवरी अभियान के दौरान लगभग 13 लाख से अधिक सऊदी सिल्वर रियाल बाहर निकाले गए, जिनका कुल वजन लगभग 16 से 17 टन बैठता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार और नीलामी घरों में जब इन प्राचीन और ऐतिहासिक सिक्कों की अनुमानित कीमत आंकी गई, तो वह करोड़ों और अरबों रुपये में आंकी गई। समंदर की तलहटी से निकाले गए इन सिक्कों पर आज भी उस समय की चमक और टकसाल की मुहरें सुरक्षित हैं, जो इस रोमांचक खोज को और भी खास बनाती हैं।
खजाने से जुड़े अनसुलझे रहस्य और आज भी दफन हैं कई अनकहे राज़
भले ही इस सफल अभियान के जरिए 16 टन से ज्यादा चांदी और लाखों सिक्के समंदर की गहराई से खींचकर बाहर निकाल लिए गए हों, लेकिन इस पूरे प्रकरण से जुड़े कई ऐसे रहस्य हैं जो आज भी अबूझ पहेली बने हुए हैं। ऐतिहासिक दस्तावेजों और उस समय के क्रू मेंबरों के बयानों के अनुसार, जहाज में केवल जितने सिक्के आधिकारिक तौर पर दर्ज थे, उससे कहीं अधिक मात्रा में चांदी और बुलियन (Silver Bullion) होने की चर्चाएं समय-समय पर होती रही हैं। कई जानकारों और जहाज के पुराने अधिकारियों का दावा था कि इस पोत पर भारी मात्रा में चांदी की सिल्लियां भी लदी हुई थीं, जिनका आधिकारिक रिकॉर्ड ढूंढ पाना आज भी मुश्किल साबित हुआ है। यही वजह है कि आज भी इस डूबे हुए जहाज का बचा हुआ हिस्सा और उसमें छिपे होने की संभावना वाले अवशेष दुनिया भर के खजाना खोजियों और समुद्री पुरातत्वविदों के लिए गहरी दिलचस्पी का विषय बने हुए हैं। समुद्र के पानी में दशकों तक दबे रहने के बावजूद इन सिक्कों की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक वैल्यू ने इन्हें दुनिया के सबसे दुर्लभ संग्रहों में ला खड़ा किया है। यह घटना इस बात का जीवंत उदाहरण है कि इंसानी इतिहास की कितनी ही अनमोल धरोहरें आज भी समंदर की गोद में अपनी खोज का इंतजार कर रही हैं।