अमेरिका की बादशाहत को ड्रैगन की चुनौती कौन बनेगा दुनिया का अगला सुपरपावर? चीन ने ऐसे बदला पूरा गेम

News India Live, Digital Desk: क्या 21वीं सदी के अंत तक अमेरिका अपनी नंबर-1 की कुर्सी गंवा देगा? यह सवाल आज दुनिया के हर रणनीतिक गलियारे में गूंज रहा है। दशकों से वैश्विक मंच पर एकछत्र राज करने वाले अमेरिका और तेजी से उभरते चीन के बीच ‘सुपरपावर’ बनने की जंग अब अपने निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। चीन ने जिस तरह से अपनी आर्थिक और सैन्य रणनीति बदली है, उसने पेंटागन से लेकर व्हाइट हाउस तक की नींद उड़ा दी है।1. आर्थिक बिसात: डॉलर बनाम युआनचीन ने अपनी अर्थव्यवस्था को केवल ‘मैन्युफैक्चरिंग हब’ तक सीमित नहीं रखा है। ‘बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव’ (BRI) के जरिए चीन ने एशिया, अफ्रीका और यूरोप के दर्जनों देशों को अपने कर्ज के जाल और बुनियादी ढांचे के नेटवर्क में फंसा लिया है। जानकारों का मानना है कि चीन का लक्ष्य वैश्विक व्यापार में डॉलर के वर्चस्व को चुनौती देना और युआन को एक मजबूत विकल्प के रूप में पेश करना है।2. तकनीक की रेस: AI और 5G में चीन की बढ़तकभी नकल के लिए बदनाम रहा चीन आज आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), क्वांटम कंप्यूटिंग और 5G तकनीक में अमेरिका के कंधे से कंधा मिलाकर चल रहा है। ‘मेड इन चाइना 2025’ अभियान के तहत बीजिंग खुद को तकनीक का ग्लोबल लीडर बनाने में जुटा है। यदि चीन भविष्य की तकनीकों पर कब्जा कर लेता है, तो वह बिना युद्ध लड़े ही अमेरिका को पछाड़ सकता है।3. सैन्य विस्तार: समुद्र से अंतरिक्ष तक चुनौतीचीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) अब केवल जमीन तक सीमित नहीं है। दक्षिण चीन सागर में कृत्रिम द्वीपों का निर्माण हो या अंतरिक्ष में अपनी मौजूदगी दर्ज कराना, ड्रैगन हर जगह अमेरिका की घेराबंदी कर रहा है। अमेरिका के पास भले ही अनुभव और आधुनिक हथियार हों, लेकिन चीन की जहाज निर्माण की क्षमता और ‘हाइपरसोनिक मिसाइल’ तकनीक ने खतरे की घंटी बजा दी है।4. अमेरिका की रणनीति: क्या अंकल सैम के पास है जवाब?डोनाल्ड ट्रंप और जो बाइडन, दोनों ही प्रशासनों ने चीन को ‘सबसे बड़ा रणनीतिक खतरा’ माना है। अमेरिका अब QUAD (भारत, अमेरिका, जापान, ऑस्ट्रेलिया) और AUKUS जैसे गठबंधनों के जरिए चीन को हिंद-प्रशांत क्षेत्र में रोकने की कोशिश कर रहा है। अमेरिका का ट्रंप कार्ड उसकी सॉफ्ट पावर, मजबूत लोकतांत्रिक मूल्य और वैश्विक वित्तीय प्रणाली पर नियंत्रण है।