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Gujarat UCC Bill 2026: गुजरात में भी लागू हुआ ‘समान नागरिक संहिता’, लिव-इन और शादी का रजिस्ट्रेशन न कराया तो जेल; जानें नए नियम

गांधीनगर: उत्तराखंड के बाद अब पश्चिमी राज्य गुजरात ने भी इतिहास रच दिया है। मंगलवार (25 मार्च, 2026) को भारी हंगामे और सात घंटे की लंबी बहस के बाद गुजरात विधानसभा ने ‘समान नागरिक संहिता’ (Uniform Civil Code – UCC) बिल 2026 को हरी झंडी दे दी है। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल द्वारा पेश किए गए इस बिल का मकसद शादी, तलाक, विरासत और लिव-इन रिलेशनशिप जैसे निजी मामलों को धर्म की परवाह किए बिना एक ही कानून के दायरे में लाना है। जहाँ भाजपा इसे ‘समानता का युग’ बता रही है, वहीं विपक्ष ने इसे मौलिक अधिकारों का हनन करार दिया है।धोखे से शादी और बहुविवाह पर 7 साल की जेलगुजरात UCC बिल की सबसे बड़ी और सख्त विशेषता महिलाओं की सुरक्षा से जुड़ी है। नए कानून के तहत:जबरन शादी: यदि कोई व्यक्ति जबरदस्ती, दबाव या धोखे से शादी करता है, तो उसे 7 साल की जेल भुगतनी होगी।बहुविवाह (Polygamy) पर रोक: एक से ज्यादा शादियां करने पर अब पूर्ण पाबंदी होगी और दोषी पाए जाने पर वही 7 साल की सजा का प्रावधान लागू होगा।समान अधिकार: विरासत और संपत्ति के मामलों में अब बेटों और बेटियों को एक समान कानूनी अधिकार प्राप्त होंगे।लिव-इन रिलेशनशिप: रजिस्ट्रेशन अनिवार्य, वर्ना होगी जेलनए कानून में लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर बेहद कड़े नियम बनाए गए हैं। अब गुजरात में रहने वाले जोड़ों के लिए अपने लिव-इन संबंधों का रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य होगा।सजा का प्रावधान: यदि कोई जोड़ा रजिस्ट्रेशन नहीं कराता है, तो उन्हें 3 महीने की जेल या ₹10,000 का जुर्माना देना पड़ सकता है।सुरक्षा का तर्क: मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि इसका उद्देश्य किसी की निजी आजादी छीनना नहीं, बल्कि बेटियों को कानूनी सुरक्षा प्रदान करना है।60 दिन में शादी का रजिस्ट्रेशन जरूरीअब राज्य में होने वाली हर शादी का पंजीकरण (Registration) अनिवार्य कर दिया गया है।जुर्माना: यदि शादी के 60 दिनों के भीतर रजिस्ट्रेशन नहीं कराया जाता है, तो ₹10,000 का जुर्माना लगाया जाएगा।यह नियम गुजरात की भौगोलिक सीमाओं के बाहर रहने वाले गुजरातियों पर भी समान रूप से लागू होगा।किसे मिलेगी इस कानून से छूट?सरकार ने साफ किया है कि यह कानून सभी धर्मों के लिए एक समान कानूनी ढांचा तैयार करता है, लेकिन अनुसूचित जनजातियों (ST) और कुछ विशिष्ट समूहों को इससे बाहर रखा गया है। उनके पारंपरिक और संवैधानिक अधिकारों में कोई हस्तक्षेप नहीं किया जाएगा। सीएम भूपेंद्र पटेल ने जोर देकर कहा कि धार्मिक रीति-रिवाजों और पूजा पद्धति में इस कानून से कोई बदलाव नहीं आएगा।राजनीतिक घमासान: विपक्ष ने बताया ‘मुस्लिम विरोधी’सदन में बिल पारित होते समय कांग्रेस और आम आदमी पार्टी (AAP) ने इसका जोरदार विरोध किया। कांग्रेस का तर्क है कि यह कानून संविधान के अनुच्छेद 25 (धार्मिक स्वतंत्रता) का उल्लंघन करता है और लक्षित रूप से मुस्लिम समुदाय के खिलाफ है। हालांकि, सरकार ने अनुच्छेद 14 (समानता) और अनुच्छेद 44 (UCC के लिए राज्य के निर्देश) का हवाला देते हुए इसे संवैधानिक रूप से जायज ठहराया है।

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