Chaitra Navratri 7th Day: चैत्र नवरात्रि की सप्तमी आज, मां कालरात्रि की पूजा से दूर होगा हर डर; जानें शुभ मुहूर्त, विधि और प्रिय भोग

नई दिल्ली: चैत्र नवरात्रि 2026 के सातवें दिन आज पूरे देश में श्रद्धा और उल्लास के साथ माँ कालरात्रि की पूजा की जा रही है। माँ दुर्गा का यह सातवाँ स्वरूप अत्यंत उग्र और शक्तिशाली माना गया है, जो अज्ञानता के अंधेरे को मिटाकर भक्तों के जीवन में ज्ञान का प्रकाश फैलाता है। मान्यता है कि जो भक्त आज के दिन सच्चे मन से माता की उपासना करते हैं, उन्हें भूत-प्रेत, भय और अकाल मृत्यु जैसी बाधाओं से मुक्ति मिल जाती है। आइए जानते हैं माँ कालरात्रि का स्वरूप, उनकी विशेष पूजा विधि और उन्हें प्रसन्न करने वाला प्रिय भोग।माँ कालरात्रि का स्वरूप: काल का नाश करने वाली शक्तिमाँ कालरात्रि का रंग रात के घने अंधकार जैसा काला है, इसलिए उन्हें कालरात्रि कहा जाता है। उनके तीन नेत्र ब्रह्मांड की तरह गोल हैं और उनके बिखरे हुए बाल बिजली की तरह चमकते हैं।वाहन: माँ की सवारी गधा (गर्दभ) है।अस्त्र-शस्त्र: माँ के चार हाथ हैं, जिनमें से एक में खड्ग और दूसरे में लोहे का कांटा है। बाकी दो हाथ भक्तों को ‘वर’ और ‘अभय’ प्रदान करने की मुद्रा में रहते हैं।महिमा: पौराणिक कथाओं के अनुसार, अत्यंत शक्तिशाली राक्षस रक्तबीज का संहार करने के लिए देवी ने यह भयानक रूप धारण किया था।क्यों लगाया जाता है गुड़ का भोग?शास्त्रों के अनुसार, माँ कालरात्रि को गुड़ (Jaggery) अत्यंत प्रिय है। सप्तमी के दिन माता को गुड़ या उससे बने पकवानों का भोग लगाना विशेष फलदायी माना जाता है।मान्यता: गुड़ का भोग लगाने से साधक के जीवन में आने वाली शारीरिक और मानसिक बाधाएं दूर होती हैं और घर में सुख-समृद्धि का वास होता है। पूजा के बाद इस गुड़ को ब्राह्मणों को दान करना या प्रसाद के रूप में बांटना शुभ माना जाता है।माँ कालरात्रि की सरल पूजा विधिनवरात्रि की सप्तमी पर तांत्रिक और सामान्य गृहस्थ दोनों ही माता की विशेष पूजा करते हैं। आप घर पर इस विधि से पूजा संपन्न कर सकते हैं:शुद्धिकरण: सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ (संभव हो तो नीले या लाल) वस्त्र धारण करें।कलश पूजन: सबसे पहले कलश और गणेश जी की पूजा करें, फिर माँ कालरात्रि का ध्यान करें।अर्पण: माता को लाल रंग के फूल, विशेषकर गुड़हल या रातरानी अर्पित करें। रोली, अक्षत और धूप-दीप से पूजन करें।आरती और मंत्र: घी का दीपक जलाकर माँ की आरती करें और नीचे दिए गए शक्तिशाली मंत्रों का जाप करें।इन सिद्ध मंत्रों का करें जापमाँ कालरात्रि को प्रसन्न करने और नकारात्मक ऊर्जा से बचने के लिए इन मंत्रों का कम से कम 108 बार जाप करें:बीज मंत्र: ॐ कालरात्र्यै नम:महामंत्र: ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं दुर्गति नाशिन्यै महामायायै स्वाहानर्वाण मंत्र: ऊं ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चै ऊं कालरात्रि दैव्ये नम:सप्तमी का विशेष महत्वआज के दिन ‘अन्नपूर्णा परिक्रमा’ की भी शुरुआत हो रही है। माँ कालरात्रि न केवल शत्रुओं का नाश करती हैं, बल्कि अपने भक्तों को साहस और आत्मविश्वास भी प्रदान करती हैं। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, शनि ग्रह की शांति के लिए भी माँ कालरात्रि की पूजा अचूक मानी जाती है।