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US Iran conflict : अब ट्रंप जलडमरूमध्य कहलाएगा होरमुज? डोनाल्ड ट्रंप के अजीबोगरीब ऐलान से दुनिया सन्न

News India Live, Digital Desk : अपनी बेबाकी और चौंकाने वाले फैसलों के लिए मशहूर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय राजनीति में खलबली मचा दी है। दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक मार्ग ‘होरमुज जलडमरूमध्य’ (Strait of Hormuz) को लेकर ट्रंप ने एक ऐसी इच्छा जाहिर की है, जिसने भूगोलवेत्ताओं से लेकर राजनेताओं तक के होश उड़ा दिए हैं। चर्चा है कि ट्रंप इस रणनीतिक जलमार्ग का नाम बदलकर ‘स्ट्रेस ऑफ ट्रंप’ (Strait of Trump) करना चाहते हैं। ट्रंप का तर्क है कि चूंकि अमेरिकी सेना इस क्षेत्र की सुरक्षा में सबसे बड़ी भूमिका निभाती है, इसलिए इसका नाम भी उनके नाम पर होना चाहिए।क्या है ट्रंप का ‘नामकरण’ वाला मास्टरप्लान?ट्रंप ने हाल ही में एक संबोधन के दौरान संकेत दिया कि ‘होरमुज’ नाम पुराना हो चुका है और यह क्षेत्र अब अमेरिकी प्रभाव का केंद्र है। उन्होंने कहा कि “हम यहां खरबों डॉलर खर्च करते हैं, अपने जहाजों की रक्षा करते हैं, तो दुनिया को पता होना चाहिए कि यहां किसका दबदबा है।” हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि यह ट्रंप की एक ‘साइकोलॉजिकल वॉरफेयर’ (मनोवैज्ञानिक युद्ध) की रणनीति है, जिसका मकसद ईरान को उकसाना और घरेलू स्तर पर अपनी ‘सुपरपावर’ छवि को चमकाना है।क्या अंतरराष्ट्रीय कानून इसकी इजाजत देते हैं?सवाल उठता है कि क्या कोई देश किसी अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग का नाम अपनी मर्जी से बदल सकता है? कानून के जानकारों के मुताबिक, किसी भी समुद्री मार्ग या भौगोलिक स्थल का नाम बदलने के लिए ‘इंटरनेशनल हाइड्रोग्राफिक ऑर्गेनाइजेशन’ (IHO) और संयुक्त राष्ट्र (UN) की मंजूरी जरूरी होती है। होरमुज जलडमरूमध्य ईरान और ओमान की सीमाओं के बीच स्थित है, ऐसे में अमेरिका द्वारा एकतरफा नाम बदलना अंतरराष्ट्रीय नियमों का खुला उल्लंघन माना जाएगा। तेहरान ने पहले ही इस पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए इसे ‘साम्राज्यवादी सनक’ करार दिया है।वैश्विक व्यापार पर पड़ेगा क्या असर?होरमुज जलडमरूमध्य दुनिया के कुल तेल व्यापार का लगभग 20% हिस्सा संभालता है। अगर ट्रंप इस तरह के प्रतीकात्मक लेकिन आक्रामक कदम उठाते हैं, तो इससे खाड़ी देशों में तनाव और बढ़ सकता है। इससे न केवल कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आने की आशंका है, बल्कि शिपिंग कंपनियों के लिए बीमा प्रीमियम भी बढ़ सकता है। भारत जैसे देशों के लिए यह खबर चिंताजनक है, क्योंकि हमारी ऊर्जा जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से होकर आता है। अब देखना यह है कि ट्रंप का यह बयान केवल एक ‘चुनावी जुमला’ है या वे वाकई वैश्विक नक्शे को बदलने की तैयारी में हैं।

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