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Nokia Layoffs 2026 : नोकिया में मची खलबली 14,000 कर्मचारियों की छंटनी का ऐलान, भारत में भी गिर सकती है गाज

News India Live, Digital Desk : एक समय मोबाइल फोन की दुनिया की बेताज बादशाह रही Nokia अब अपने अस्तित्व और मुनाफे को बचाने के लिए कड़े फैसले ले रही है। कंपनी ने अपने वैश्विक वर्कफोर्स में 20% तक की कटौती करने का मन बनाया है, जिसका सीधा असर लगभग 14,000 कर्मचारियों पर पड़ेगा। इस छंटनी की लहर ने अब नोकिया इंडिया (Nokia India) के गलियारों में भी बेचैनी पैदा कर दी है, जहाँ कंपनी के 17,000 से ज्यादा कर्मचारी कार्यरत हैं।भारत में क्यों मंडरा रहा है खतरा?नोकिया के लिए भारत हमेशा से एक बड़ा और महत्वपूर्ण बाजार रहा है, लेकिन हाल के कुछ महीनों में यहाँ कंपनी के प्रदर्शन में गिरावट दर्ज की गई है:सेल्स में गिरावट: 2025 की चौथी तिमाही में नोकिया इंडिया की नेट सेल्स में 15% की कमी आई है। रेवेन्यू 463 मिलियन यूरो (करीब ₹5,000 करोड़) से गिरकर 393 मिलियन यूरो (करीब ₹4,290 करोड़) पर आ गया है।5G की धीमी रफ्तार: भारत में 5G रोलआउट की गति अब पहले जैसी नहीं रही है, जिससे टेलीकॉम उपकरणों की मांग में कमी आई है।छंटनी के 3 बड़े कारण (Major Reasons)ग्लोबल रीस्ट्रक्चरिंग: कंपनी अपनी कार्यप्रणाली को सरल बनाने के लिए ‘होरिजॉन्टल सेटअप’ की ओर लौट रही है। 2023 में क्लाउड और मोबाइल नेटवर्क के विलय के कारण कई पदों पर दोहराव (Duplication) हो गया था, जिसे अब हटाया जा रहा है।लागत में कटौती: नोकिया का लक्ष्य 2026 के अंत तक लगभग 1.2 बिलियन यूरो (करीब ₹11,000 करोड़) बचाने का है, ताकि वह भविष्य की AI आधारित नेटवर्क जरूरतों के लिए तैयार हो सके।बाजार की अनिश्चितता: वैश्विक स्तर पर आर्थिक मंदी की आहट और टेलीकॉम ऑपरेटरों द्वारा कम खर्च करने से नोकिया के मुनाफे पर दबाव बढ़ गया है।भारत में नेतृत्व परिवर्तन (Leadership Shift)संकट की इस घड़ी में नोकिया ने भारत में अपनी कमान भी बदल दी है:समर मित्तल: इन्हें ‘इंडिया कंट्री बिजनेस लीडर’ नियुक्त किया गया है।विभा मेहरा: यह 1 अप्रैल 2026 से ‘इंडिया कंट्री मैनेजर’ का पद संभालेंगी।पूर्व हेड तरुण छाबड़ा ने इस बड़े फेरबदल के बीच कंपनी छोड़ दी है।भविष्य की राह: ‘AI’ और ‘नेटवर्क इंफ्रा’ पर फोकसभले ही कंपनी छंटनी कर रही है, लेकिन नोकिया का विजन भविष्य के ‘AI-driven’ नेटवर्क को लेकर स्पष्ट है। सीईओ लुंडमार्क का मानना है कि इन कड़े फैसलों से कंपनी ज्यादा मजबूत और फुर्तीली (Agile) बनेगी। हालांकि, कर्मचारियों के लिए अगले कुछ महीने अनिश्चितता भरे रहने वाले हैं।

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