Assam Election 2026 : कांग्रेस छोड़ना चाहते हैं 99% हिंदू सदस्य,सीएम हिमंत विश्व शर्मा का बड़ा दावा बन जाएगी कांग्रेस

News India Live, Digital Desk : असम में 9 अप्रैल 2026 को होने वाले विधानसभा चुनाव से ठीक पहले मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने विपक्ष पर अब तक का सबसे तीखा हमला बोला है। एक समाचार एजेंसी को दिए साक्षात्कार में मुख्यमंत्री ने दावा किया कि कांग्रेस के भीतर भारी असंतोष है और पार्टी के लगभग 99 प्रतिशत हिंदू नेता और कार्यकर्ता अब वहां घुटन महसूस कर रहे हैं और पार्टी छोड़ना चाहते हैं। उन्होंने भविष्यवाणी की कि इस चुनाव के नतीजों के बाद कांग्रेस केवल एक खास समुदाय तक ही सिमट कर रह जाएगी।”कांग्रेस का विघटन शुरू हो चुका है”मुख्यमंत्री शर्मा ने कांग्रेस की वर्तमान स्थिति को ‘डूबता हुआ जहाज’ बताते हुए कहा:हिन्दू नेताओं का पलायन: उन्होंने हाल ही में कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में आए दिग्गज नेताओं (जैसे प्रद्युत बरदलै और भूपेन कुमार बोराह) का हवाला देते हुए कहा कि स्वाभिमानी असमिया अब कांग्रेस में नहीं रह सकता।एक समुदाय की पार्टी: सीएम ने तंज कसते हुए कहा, “चुनाव के बाद कांग्रेस असम में केवल ‘मियां’ समुदाय (अवैध प्रवासियों के संदर्भ में) की प्रतिनिधि बनकर रह जाएगी। यह पार्टी अब भारत में नहीं, बल्कि पाकिस्तान या बांग्लादेश में सरकार बनाने के सपने देख सकती है।”विपक्ष का पलटवार: “यह ध्रुवीकरण की राजनीति है”मुख्यमंत्री के इस बयान पर कांग्रेस और विपक्षी गठबंधन ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है।कर्नाटक के डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार ने पलटवार करते हुए कहा कि हिमंत विश्व शर्मा असम प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गौरव गोगोई से डरे हुए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी चुनाव जीतने के लिए केवल ‘ध्रुवीकरण’ का सहारा ले रही है क्योंकि उनके पास विकास के नाम पर दिखाने के लिए कुछ नहीं है।असमिया अस्मिता का सवाल: विपक्ष का तर्क है कि बीजेपी डरा-धमकाकर और लालच देकर नेताओं को तोड़ रही है, लेकिन जनता उनके साथ है।असम चुनाव 2026 का गणित (Quick Facts)मतदान की तारीख: 9 अप्रैल 2026 (एक ही चरण में सभी 126 सीटों पर)।नतीजे: 4 मई 2026।मुख्य मुकाबला: बीजेपी के नेतृत्व वाला NEDA बनाम कांग्रेस के नेतृत्व वाला ‘असम सम्मिलित मोर्चा’ (ASM)।प्रमुख मुद्दे: घुसपैठ, 1.65 लाख सरकारी नौकरियां (बीजेपी का दावा), और ‘मजबूत असमिया समाज’ का निर्माण।बगावत और दल-बदल का दौरटिकट बंटवारे के बाद दोनों ही खेमों में बगावत देखने को मिल रही है। जहाँ बीजेपी में कुछ पुराने नेता निर्दलीय चुनाव लड़ने की धमकी दे रहे हैं, वहीं कांग्रेस के कई विधायक और पूर्व अध्यक्ष पहले ही पाला बदल चुके हैं। मुख्यमंत्री खुद ‘नाराज’ नेताओं को मनाने के लिए उनके घर-घर जा रहे हैं।