ईंधन संकट में भारत के लिए संकटमोचक बना ये पुराना दोस्त, मोदी से मिलकर खोल दिए तेल और गैस के अकूत भंडार

News India Live, Digital Desk: पश्चिम एशिया में भड़के भीषण युद्ध ने पूरी दुनिया में हाहाकार मचा दिया है। ईरान और इजरायल-अमेरिका के बीच जारी जंग से ग्लोबल सप्लाई चेन चरमरा गई है और कई देशों में ईंधन का भारी संकट मंडरा रहा है। इसी मुश्किल घड़ी में भारत के एक सबसे पुराने और भरोसेमंद दोस्त ने आगे बढ़कर मदद का मजबूत हाथ बढ़ाया है। रूस ने वैश्विक ईंधन संकट से निपटने के लिए भारत को और अधिक मात्रा में कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस (Natural Gas) की सप्लाई करने का बड़ा ऑफर दिया है।रूसी उप-प्रधानमंत्री ने खुद दिल्ली आकर दिया मदद का भरोसा रूस के उप-प्रधानमंत्री डेनिस मांतुरोव ने अपनी दो दिवसीय भारत यात्रा के दौरान सीधे तौर पर भारत सरकार को इस संकट से उबारने का भरोसा दिलाया है। मांतुरोव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, विदेश मंत्री एस. जयशंकर और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजित डोभाल के साथ बेहद अहम बैठकें कीं। पीएम मोदी ने सोशल मीडिया पर इस मुलाकात की जानकारी देते हुए बताया कि रूसी उप-प्रधानमंत्री के साथ उनकी बैठक में व्यापार, आपसी कनेक्टिविटी और उर्वरकों की आपूर्ति जैसे रणनीतिक मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। इन बैठकों में विशेष तौर पर तेल और गैस क्षेत्र में द्विपक्षीय सहयोग को एक नए मुकाम पर ले जाने पर जोर दिया गया।होर्मुज जलमार्ग के बंद होने से मंडरा रहा था भारी संकट दरअसल, ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच जारी तनाव के कारण दुनिया का सबसे अहम और व्यस्त समुद्री जलमार्ग ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ प्रभावी रूप से ठप पड़ गया है। गौर करने वाली बात यह है कि भारत अपनी जरूरत का लगभग 90 फीसदी तेल और गैस इसी समुद्री रास्ते से आयात करता है। युद्ध के कारण इस जलमार्ग के बंद होने से भारत आने वाले कई व्यापारिक जहाज बीच रास्ते में ही फंस गए थे, जिससे ईंधन आपूर्ति की बड़ी चिंता पैदा हो गई थी। इसी विकट परिस्थिति में रूस ने खुले दिल से अपने खजाने भारत के लिए खोल दिए हैं।भारत को 40 फीसदी तक ज्यादा मिलेगा फर्टिलाइजर इन उच्च स्तरीय बैठकों के बाद रूसी दूतावास की ओर से जारी बयान में स्थिति एकदम स्पष्ट कर दी गई है। बयान में कहा गया है कि रूसी ऊर्जा कंपनियों के पास भारतीय बाजार की विशाल मांग को पूरा करने के लिए तेल और लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) की सप्लाई लगातार बढ़ाने की भरपूर क्षमता है। इसके अलावा, मांतुरोव ने यह भी साफ किया कि रूस ने 2025 के अंत तक भारत को उच्च मांग वाले खनिज उर्वरकों (फर्टिलाइजर) की सप्लाई में 40 फीसदी का भारी इजाफा किया है। दोनों देश मिलकर कार्बाइड उत्पादन के लिए एक संयुक्त परियोजना पर भी तेजी से काम कर रहे हैं।भारत की कूटनीति आई काम, प्रतिबंधों को किया दरकिनार पश्चिम एशिया में युद्ध की आहट मिलते ही भारत सरकार ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा के लिए मास्टरप्लान तैयार कर लिया था। भारत ने समय रहते रूस, वेनेजुएला समेत कई अन्य देशों से तेल का आयात बढ़ा दिया। सबसे अहम बात यह रही कि अमेरिकी प्रतिबंधों के भारी दबाव के बावजूद भारत ने अपनी स्वतंत्र विदेश नीति का पालन करते हुए रूसी तेल की खरीद जारी रखी। अब यही बेबाक कूटनीतिक फैसला इस भयंकर वैश्विक संकट के दौरान भारत की अर्थव्यवस्था के लिए सबसे बड़ी संजीवनी साबित हो रहा है।