Surya Gochar 2026 : मेष राशि में सूर्य का महागोचर, शनि-राहु के दोषों से मुक्ति के लिए संक्रांति पर करें ये अचूक उपाय

News India Live, Digital Desk: ज्योतिष शास्त्र में सूर्य का राशि परिवर्तन एक अत्यंत महत्वपूर्ण घटना मानी जाती है। वर्ष 2026 में जब सूर्य देव अपनी उच्च राशि मेष में प्रवेश करेंगे, तो इसे ‘मेष संक्रांति’ के रूप में मनाया जाएगा। मेष संक्रांति से ही सौर नववर्ष का प्रारंभ भी होता है। इस बार का सूर्य गोचर विशेष है क्योंकि यह शनि, राहु और मंगल जैसे क्रूर ग्रहों के अशुभ प्रभावों को शांत करने का एक सुनहरा अवसर लेकर आ रहा है। यदि आपकी कुंडली में इन ग्रहों की स्थिति ठीक नहीं है, तो संक्रांति के दिन किए गए कुछ विशेष उपाय आपके जीवन की दिशा बदल सकते हैं।शनि और राहु की शांति के लिए विशेष दानसूर्य और शनि के बीच पिता-पुत्र का संबंध होने के बावजूद ज्योतिषीय दृष्टि से इनके बीच शत्रुता मानी जाती है। वहीं राहु सूर्य को ग्रहण लगाता है। इन दोनों ग्रहों के दुष्प्रभाव को कम करने के लिए मेष संक्रांति के दिन काली उड़द, काले तिल या लोहे की वस्तुओं का दान करना अत्यंत लाभकारी होता है। इस दिन गरीब और जरूरतमंदों को भोजन कराने से राहु का नकारात्मक प्रभाव कम होता है और अटके हुए काम बनने लगते हैं।मंगल दोष और सूर्य का संबंधमेष राशि का स्वामी मंगल है, और सूर्य मंगल की राशि में उच्च के होते हैं। यदि आपकी कुंडली में मंगल भारी है या आप मांगलिक दोष से परेशान हैं, तो सूर्य गोचर के दिन गुड़ और लाल मसूर की दाल का दान करें। इस दिन हनुमान चालीसा का पाठ करने से सूर्य और मंगल दोनों की शुभता प्राप्त होती है, जिससे आत्मविश्वास में वृद्धि होती है और भूमि-भवन से जुड़े विवाद सुलझ जाते हैं।मेष संक्रांति पर सूर्य अर्घ्य का महत्वसंक्रांति के दिन सूर्योदय के समय तांबे के लोटे में जल, लाल चंदन, अक्षत और लाल फूल डालकर भगवान सूर्य को अर्घ्य देना सबसे प्रभावशाली उपाय माना जाता है। अर्घ्य देते समय ‘ॐ घृणि सूर्याय नमः’ मंत्र का जाप करें। मान्यता है कि उच्च के सूर्य को जल देने से व्यक्ति के मान-सम्मान में वृद्धि होती है और सरकारी नौकरी या प्रशासनिक कार्यों में आ रही बाधाएं स्वतः ही समाप्त हो जाती हैं।पितृ दोष से मुक्ति और आत्मिक शांतिमेष संक्रांति के दिन पवित्र नदियों में स्नान और पितरों के निमित्त तर्पण करने का भी विधान है। यदि परिवार में कलह रहती है या मानसिक शांति का अभाव है, तो इस दिन सत्तू और ठंडे जल का दान अवश्य करें। सूर्य का मेष राशि में आना नई ऊर्जा का संचार करता है, इसलिए इस दिन आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करना स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं, विशेषकर नेत्र और हड्डियों के रोगों में राहत दिलाता है।बदलेगी आपकी किस्मत, बस रखें इन बातों का ध्यानसूर्य के इस गोचर के दौरान तामसिक भोजन और नशीली वस्तुओं से दूर रहना चाहिए। जितना संभव हो सके, बड़े-बुजुर्गों और पिता का सम्मान करें, क्योंकि कुंडली में सूर्य पिता का प्रतिनिधित्व करते हैं। नियम और संयम के साथ किए गए ये उपाय न केवल ग्रहों के दोषों को शांत करेंगे, बल्कि आने वाले पूरे वर्ष के लिए सौभाग्य के द्वार भी खोल देंगे।