Bengal SSR Row: बंगाल चुनाव से पहले मतदाता सूची में बड़ी कटौती, 91 लाख नाम हटने से सियासी समीकरण हुए ध्वस्त; जानें किन सीटों पर बढ़ी TMC-BJP की धड़कनें?

कोलकाता | पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 से ठीक पहले राज्य की सियासत में ‘मतदाता सूची पुनरीक्षण’ (SSR) ने एक बड़ा भूचाल ला दिया है। चुनाव आयोग द्वारा जारी ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक, विशेष सतत पुनरीक्षण के तहत राज्य की वोटर लिस्ट से 90.83 लाख से अधिक नाम हटा दिए गए हैं। इस भारी कटौती के बाद बंगाल में कुल मतदाताओं की संख्या 7.56 करोड़ से घटकर अब 6.77 करोड़ रह गई है। इस बदलाव ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) के गढ़ों और भाजपा (BJP) के उभरते प्रभाव वाले क्षेत्रों में चुनावी गणित को पूरी तरह उलझा दिया है।TMC के गढ़ों में सबसे बड़ी सेंध: 178 सीटों पर सीधा असरआंकड़ों का विश्लेषण करें तो पता चलता है कि हटाए गए कुल नामों में से लगभग तीन-चौथाई (करीब 66.5 लाख) नाम उन जिलों से हैं, जिन्हें ममता बनर्जी का अभेद्य दुर्ग माना जाता है। इनमें उत्तर और दक्षिण 24 परगना, मुर्शिदाबाद, नदिया, मालदा, हुगली और हावड़ा जैसे जिले शामिल हैं।प्रभावित सीटें: इन जिलों में विधानसभा की 294 में से 178 सीटें आती हैं।सीमावर्ती जिलों का हाल: बांग्लादेश सीमा से लगे जिलों में सबसे ज्यादा नाम कटे हैं। उत्तर 24 परगना में 12.5 लाख और दक्षिण 24 परगना में 10.91 लाख वोटर्स कम हुए हैं।BJP के ‘मतुआ’ वोट बैंक में भी अस्थिरतायह कटौती केवल सत्ताधारी दल के लिए ही नहीं, बल्कि भाजपा के लिए भी चिंता का सबब बनी हुई है। उत्तर बंगाल और नदिया के उन क्षेत्रों में जहाँ मतुआ समुदाय और शरणार्थी आबादी निर्णायक भूमिका निभाती है, वहां भी बड़ी संख्या में नाम हटाए गए हैं। मतुआ बहुल 55 सीटों पर इस पुनरीक्षण का गहरा असर पड़ा है, जिससे भाजपा के उस भरोसेमंद वोट बैंक में अनिश्चितता पैदा हो गई है जिसके दम पर पार्टी ने 2019 के बाद बढ़त बनाई थी।’घुसपैठ और जनसांख्यिकी’ पर जुबानी जंग तेजमतदाता सूची में हुए इस बदलाव को भाजपा ने ‘घुसपैठ’ के मुद्दे से जोड़ दिया है। उत्तर बंगाल के अलीपुरद्वार में एक रैली के दौरान भाजपा के राष्ट्रीय सचिव नवीन ने ममता सरकार पर तीखा हमला बोला।”ममता सरकार ने बंगाल के लोगों के भूमि अधिकार छीनकर घुसपैठियों को दे दिए हैं, जिससे राज्य की जनसांख्यिकी (Demography) बदल गई है। भाजपा की सरकार बनने पर इन परिवर्तनों को ठीक किया जाएगा और घुसपैठियों को बाहर निकाला जाएगा।” — नवीन, भाजपा नेताचुनाव आयोग बनाम TMC: बढ़ती जा रही है तल्खीमतदाता सूची में इस बड़ी कटौती और चुनावी तैयारियों के बीच तृणमूल कांग्रेस और चुनाव आयोग के बीच टकराव भी चरम पर है। टीएमसी सांसद डेरेक ओ ब्रायन ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर गंभीर आरोप लगाते हुए पक्षपात का दावा किया है। वहीं, चुनाव आयोग ने भी पलटवार करते हुए टीएमसी को सार्वजनिक तौर पर कड़ा जवाब दिया है।2021 से कितनी अलग होगी 2026 की जंग?2021 के चुनाव में ममता बनर्जी ने भारी बहुमत से जीत दर्ज की थी, लेकिन तब मतदाता सूची का स्वरूप अलग था। अब 91 लाख मतदाताओं के कम होने और नागरिकता व प्रवासन जैसे मुद्दों के दोबारा गरमाने से दक्षिण बंगाल से लेकर उत्तर बंगाल तक की जंग बेहद दिलचस्प हो गई है।