मनोरंजन

Bollywood Evergreen : देव आनंद की एक ना और चमक गई शम्मी कपूर की किस्मत, जिन फिल्मों को एवरग्रीन स्टार ने ठुकराया

News India Live, Digital Desk: बॉलीवुड के इतिहास में ऐसी कई कहानियाँ दर्ज हैं जहाँ एक अभिनेता के हाथ से छूटी फिल्म दूसरे के लिए मील का पत्थर साबित हुई। ऐसी ही एक दिलचस्प दास्तां हिंदी सिनेमा के दो दिग्गजों देव आनंद और शम्मी कपूर से जुड़ी है। आज भले ही शम्मी कपूर को ‘एल्विस प्रेस्ली ऑफ इंडिया’ और ‘याहू’ स्टार के रूप में जाना जाता है, लेकिन उनके इस सुनहरे सफर के पीछे देव आनंद के कुछ फैसलों का बड़ा हाथ था। देव आनंद ने जिन फिल्मों को ठुकराया, उन्होंने शम्मी कपूर के डूबते करियर में नई जान फूंक दी और उन्हें रातों-रात सुपरस्टार बना दिया।जब देव आनंद ने छोड़ी ‘तुमसा नहीं देखा’साल 1957 में निर्देशक नासिर हुसैन अपनी फिल्म ‘तुमसा नहीं देखा’ के लिए पहली पसंद के तौर पर देव आनंद के पास गए थे। उस समय देव साहब इंडस्ट्री के बड़े स्टार थे। हालांकि, व्यस्तता या किसी अन्य कारण से उन्होंने इस फिल्म का हिस्सा बनने से इनकार कर दिया। इसके बाद यह फिल्म शम्मी कपूर की झोली में गिरी। इस फिल्म से पहले शम्मी कपूर की लगभग 18 फिल्में फ्लॉप हो चुकी थीं और लोग उन्हें ‘फ्लॉप स्टार’ कहने लगे थे। लेकिन ‘तुमसा नहीं देखा’ ब्लॉकबस्टर रही और शम्मी कपूर का नया अंदाज़ दर्शकों के सिर चढ़कर बोला।’जंगली’ और वह ‘याहू’ का जादूसिनेमाई गलियारों में चर्चा है कि फिल्म ‘जंगली’ के लिए भी देव आनंद की चर्चा हुई थी, लेकिन अंततः यह फिल्म भी शम्मी कपूर के पास गई। इस फिल्म ने शम्मी कपूर की ‘चॉकलेट बॉय’ इमेज को बदलकर उन्हें एक विद्रोही और ऊर्जावान नायक के रूप में स्थापित किया। बर्फ की पहाड़ियों पर शम्मी कपूर का ‘याहू’ चिल्लाना आज भी भारतीय सिनेमा के सबसे यादगार दृश्यों में गिना जाता है। अगर देव आनंद ने यह फिल्म की होती, तो शायद हमें वह खास अंदाज़ कभी देखने को नहीं मिलता जो शम्मी कपूर की पहचान बना।तीसरी कसम और देव आनंद का इनकारशम्मी कपूर की एक और बड़ी फिल्म ‘तीसरी कसम’ को लेकर भी कुछ ऐसी ही कहानी बताई जाती है। देव आनंद अपनी फिल्मों के चुनाव को लेकर बहुत चूजी थे और उनकी ‘अर्बन’ (शहरी) इमेज की वजह से वह अक्सर देसी और ग्रामीण पृष्ठभूमि वाली फिल्मों को ना कह देते थे। देव साहब का यही इनकार शम्मी कपूर के लिए वरदान साबित हुआ। इन फिल्मों ने न केवल शम्मी कपूर को सफलता दिलाई, बल्कि बॉलीवुड को एक ऐसा डांसिंग स्टार दिया जिसकी बराबरी आज भी कोई नहीं कर सका।किस्मत और कर्मा: बॉलीवुड का अनूठा संयोगबॉलीवुड में कहा जाता है कि फिल्में अपनी किस्मत खुद लिखती हैं। देव आनंद उस समय अपनी पीक पर थे और उन्हें इन फिल्मों को ठुकराने का कोई मलाल नहीं था, क्योंकि उन्होंने ‘गाइड’, ‘ज्वेल थीफ’ और ‘जॉनी मेरा नाम’ जैसी कालजयी फिल्में दीं। वहीं शम्मी कपूर को एक ऐसी फिल्म की तलाश थी जो उन्हें पहचान दिला सके। देव आनंद की ‘ना’ ने शम्मी कपूर को वह मंच दिया जहाँ से उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। यह किस्सा आज भी फिल्म प्रेमियों के बीच चर्चा का विषय रहता है कि कैसे एक का इनकार दूसरे का इकरार बन गया।

Back to top button