Bengal Election 2026 : क्या अमित शाह के M-फैक्टर ने बिगाड़ा ममता बनर्जी का खेल? बंगाल की रणभेरी में छिड़ा महायुद्ध

News India Live, Digital Desk:पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 की तारीखों (23 और 29 अप्रैल) के करीब आते ही राज्य में सियासी पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया है। इस बार का मुकाबला 2021 से भी कहीं अधिक कांटे का नजर आ रहा है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की आक्रामक घेराबंदी और उनके द्वारा उछाले गए ‘M-फैक्टर’ (मुस्लिम तुष्टीकरण और मतुआ समुदाय) ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की रणनीतियों के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि क्या बीजेपी का यह दांव दीदी के अभेद्य दुर्ग में सेंध लगाने में कामयाब होगा?अमित शाह का ‘M-फैक्टर’ और ध्रुवीकरण की बिसातअमित शाह ने अपनी रैलियों में ममता सरकार पर ‘घुसपैठियों के संरक्षण’ और ‘तुष्टीकरण’ का आरोप लगाते हुए हिंदू वोटों के एकीकरण की कोशिश तेज कर दी है। दूसरी ओर, बीजेपी मतुआ (Matua) समुदाय को साधने के लिए CAA (नागरिक संशोधन कानून) के क्रियान्वयन पर जोर दे रही है। शाह का दावा है कि बंगाल में इस बार ‘परिवर्तन’ होकर रहेगा और बीजेपी 170 से अधिक सीटें जीतकर सरकार बनाएगी। जानकारों का मानना है कि ‘M-फैक्टर’ का इस्तेमाल कर बीजेपी ने ममता बनर्जी के पारंपरिक वोट बैंक में दरार पैदा करने की कोशिश की है, जिससे टीएमसी की चुनाव पूर्व गणना प्रभावित हो सकती है।ममता बनर्जी का पलटवार: ‘226 पार’ का लक्ष्यअमित शाह की चुनौती को स्वीकार करते हुए ममता बनर्जी ने इस बार ‘दो-तिहाई बहुमत’ का नारा बुलंद किया है। उन्होंने दावा किया है कि टीएमसी 294 में से 226 से ज्यादा सीटें जीतेगी। ममता बनर्जी ने अमित शाह के आरोपों को खारिज करते हुए इसे बंगाल की संस्कृति पर हमला करार दिया है। हालांकि, इस बार उनके पास प्रशांत किशोर की आई-पैक (I-PAC) वाली वैसी ‘विजिबल’ रणनीतिक परत नहीं है जैसी 2021 में थी, फिर भी ‘लखी भंडार’ जैसी कल्याणकारी योजनाओं और अपनी जमीनी पकड़ के भरोसे वे बीजेपी के विजयरथ को रोकने की पूरी कोशिश कर रही हैं।भ्रष्टाचार और भतीजे पर हमले ने बढ़ाया तनावबीजेपी इस बार भ्रष्टाचार, कोयला घोटाला और ‘भतीजावाद’ (अभिषेक बनर्जी के बढ़ते प्रभाव) को मुख्य मुद्दा बना रही है। अमित शाह ने सीधे तौर पर आरोप लगाया है कि ममता बनर्जी का एकमात्र उद्देश्य अभिषेक बनर्जी को मुख्यमंत्री बनाना है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) और सीबीआई (CBI) की हालिया कार्रवाइयों ने भी बंगाल की राजनीति में ‘विक्टिम कार्ड’ और ‘एजेंसी पॉलिटिक्स’ की जंग को हवा दी है। अब देखना यह होगा कि 4 मई को जब चुनावी नतीजे आएंगे, तो बंगाल की जनता ‘ममता के भरोसे’ पर मुहर लगाती है या अमित शाह के ‘मिशन 170’ को हकीकत में बदलती है।