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हॉर्मुज जलडमरूमध्य में US की नाकेबंदी फेल, ईरानी बंदरगाह से तेल लेकर निकला चीन का विशाल टैंकर

News India Live, Digital Desk: पश्चिम एशिया (Middle East) में चल रहे भीषण तनाव के बीच एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने पूरी दुनिया को हैरत में डाल दिया है। अमेरिकी नौसेना द्वारा ईरानी बंदरगाहों की सख्त ‘नाकेबंदी’ (Blockade) के बावजूद, चीन का एक विशाल तेल टैंकर ‘रिच स्टार्री’ (Rich Starry) न केवल ईरानी तट से तेल भरने में कामयाब रहा, बल्कि वह सुरक्षित रूप से हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को भी पार कर गया है। चीन के इस कदम को सीधे तौर पर अमेरिका और इजराइल की सैन्य रणनीति को दी गई बड़ी चुनौती माना जा रहा है।US नेवल ब्लॉकेड को चीन ने दिखाया ठेंगा: कैसे मुमकिन हुआ ये?पिछले कई दिनों से अमेरिका ने दावा किया था कि उसने ईरान के तेल निर्यात को पूरी तरह से ठप कर दिया है। अमेरिकी युद्धपोत हॉर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास कड़ी निगरानी रख रहे हैं ताकि ईरान का एक बूंद तेल भी बाहर न जा सके। लेकिन ‘रिच स्टार्री’ नामक इस चीनी टैंकर ने इस सुरक्षा घेरे को धता बता दिया। सैटेलाइट तस्वीरों और ट्रैकिंग डेटा के अनुसार, टैंकर ने ईरानी बंदरगाह पर लंगर डाला और कच्चे तेल की एक बड़ी खेप लेकर खुले समुद्र की ओर निकल पड़ा।हॉर्मुज जलडमरूमध्य: युद्ध का नया अखाड़ाहॉर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया का सबसे संवेदनशील समुद्री रास्ता है, जहाँ से वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग 20% हिस्सा गुजरता है। चीन द्वारा इस रास्ते से तेल का परिवहन करना यह दर्शाता है कि बीजिंग, तेहरान के साथ अपने व्यापारिक रिश्तों को अमेरिकी दबाव के आगे झुकने नहीं देगा। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि चीन ने शायद अपनी नौसेना या गुप्त संचार प्रणालियों का उपयोग करके इस टैंकर को ‘कवर’ दिया हो, जिससे अमेरिकी रडार इसे रोकने में नाकाम रहे।क्या चीन और अमेरिका के बीच बढ़ेगा तनाव?इस घटना ने वॉशिंगटन में हलचल पैदा कर दी है। ट्रंप प्रशासन, जो पहले से ही ईरान पर ‘मैक्सिमम प्रेशर’ की नीति अपनाए हुए है, चीन के इस दुस्साहस को हल्के में नहीं लेगा। व्हाइट हाउस के सूत्रों का कहना है कि यह केवल तेल का व्यापार नहीं है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री नियमों और अमेरिकी प्रतिबंधों का खुला उल्लंघन है। अब सवाल यह उठता है कि क्या अमेरिका इस चीनी टैंकर को बीच समुद्र में रोकने या जब्त करने की हिम्मत जुटा पाएगा? यदि ऐसा होता है, तो यह सीधे तौर पर दो महाशक्तियों के बीच टकराव की स्थिति पैदा कर सकता है।ईरान की इकोनॉमी के लिए ‘बूस्टर डोज़’एक ओर जहाँ ईरान पर अमेरिकी हमलों से उसकी अर्थव्यवस्था 12 साल पीछे जाने की बात कही जा रही है, वहीं चीन का यह साथ उसके लिए किसी संजीवनी से कम नहीं है। चीन द्वारा ईरानी तेल की खरीद जारी रखने से तेहरान को वह जरूरी फंड मिल रहा है, जिसकी उसे युद्ध और पुनर्निर्माण के लिए सख्त जरूरत है। ग्लोबल मार्केट में इस खबर के आने के बाद कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव की संभावना जताई जा रही है, क्योंकि अब यह साफ है कि ईरान की नाकेबंदी करना अमेरिका के लिए उतना आसान नहीं है जितना वह सोच रहा था।

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