US-Iran : 20 साल पुराने परमाणु समझौते पर अड़ा ईरान, ट्रंप की नो डील नीति ने इस्लामाबाद में पलटी बाजी

News India Live, Digital Desk: पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में पिछले कुछ दिनों से जारी दुनिया की सबसे बड़ी कूटनीतिक हलचल का अंत फिलहाल ‘शून्य’ पर हुआ है। अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु कार्यक्रम को लेकर चल रही गहन चर्चा किसी नतीजे पर नहीं पहुँच सकी। ताज़ा अपडेट के अनुसार, 20 साल पुराने परमाणु समझौते (Nuclear Deal) की शर्तों को लेकर दोनों देशों के बीच ऐसी ठनी कि मेज पर रखा शांति का मसौदा धरा का धरा रह गया। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सख्त रुख और ईरान की पुरानी जिद ने इस वार्ता को बेनतीजा खत्म करने पर मजबूर कर दिया।20 साल पुरानी शर्तों पर फंसा पेच: आखिर क्यों नहीं बनी बात?इस वार्ता के विफल होने की सबसे बड़ी वजह ईरान का वह प्रस्ताव था, जिसमें उसने 20 साल पहले की कूटनीतिक स्थितियों के आधार पर रियायतें मांगी थीं। ईरान चाहता था कि उसे 2015 के परमाणु समझौते (JCPOA) से भी आगे जाकर छूट मिले और उस पर लगे सभी आर्थिक प्रतिबंध एक झटके में हटा लिए जाएं। दूसरी ओर, अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल ने साफ कर दिया कि 20 साल पुरानी नीतियों का आज के दौर में कोई महत्व नहीं है। ट्रंप प्रशासन का तर्क था कि ईरान का वर्तमान परमाणु ढांचा पहले के मुकाबले कहीं अधिक उन्नत और खतरनाक है, इसलिए शर्तें भी नई और कड़ी होंगी।डोनाल्ड ट्रंप का ‘मैक्सिमम प्रेशर’ और इस्लामाबाद समिटइस्लामाबाद में हुई इस बैठक में अमेरिकी रुख काफी आक्रामक रहा। व्हाइट हाउस से मिले संकेतों के आधार पर अमेरिकी दल ने ‘नो डील’ (कोई समझौता नहीं) की रणनीति अपनाई। ट्रंप का मानना है कि ईरान केवल समय काटने के लिए बातचीत का नाटक कर रहा है। अमेरिका ने मांग रखी थी कि ईरान अपने सभी परमाणु ठिकानों को हमेशा के लिए नष्ट करे और अपनी बैलिस्टिक मिसाइल तकनीक पर रोक लगाए। ईरान ने इन मांगों को अपनी संप्रभुता पर हमला बताते हुए मानने से इनकार कर दिया, जिसके बाद बातचीत टूट गई।पाकिस्तान की मध्यस्थता को झटका, अब क्या होगा अगला कदम?इस वार्ता की विफलता पाकिस्तान के लिए भी एक बड़ा कूटनीतिक झटका है, जो खुद को एक बड़े वैश्विक मध्यस्थ के रूप में पेश करने की कोशिश कर रहा था। इस्लामाबाद में सुरक्षा के कड़े इंतजामों के बीच हुई इस बैठक के फेल होने से अब पश्चिम एशिया (Middle East) में युद्ध का खतरा और बढ़ गया है। जानकारों का कहना है कि अब अमेरिका और इजराइल मिलकर ईरान पर और भी कड़े प्रतिबंध लगा सकते हैं या फिर सैन्य कार्रवाई का विकल्प चुन सकते हैं।वैश्विक बाजार और तेल की कीमतों पर मंडराया संकटजैसे ही इस्लामाबाद से ‘वार्ता विफल’ होने की खबर बाहर आई, वैश्विक तेल बाजार में हलचल शुरू हो गई। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अमेरिका और ईरान के बीच कूटनीतिक रास्ते बंद होते हैं, तो हॉर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव बढ़ेगा, जिससे कच्चे तेल की सप्लाई बाधित हो सकती है। आने वाले दिनों में दुनिया भर में ईंधन की कीमतें बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। अब सबकी नजरें इस पर हैं कि क्या कोई तीसरा देश फिर से इन दोनों को बातचीत की मेज पर ला पाएगा या फिर यह गतिरोध किसी बड़े महायुद्ध की शुरुआत बनेगा।