Women Reservation: जम्मू-कश्मीर की महिलाओं के लिए गेम चेंजर साबित होगा आरक्षण? सोशल वर्कर्स ने खोल दिए राज

News India Live, Digital Desk: केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर में राजनीतिक बदलाव की लहर के बीच महिला आरक्षण का मुद्दा चर्चा के केंद्र में है। संसद द्वारा पारित नारी शक्ति वंदन अधिनियम के बाद अब जम्मू-कश्मीर की महिलाओं में नई उम्मीद जगी है। सामाजिक कार्यकर्ताओं और जमीनी स्तर पर काम करने वाली महिलाओं का मानना है कि यह केवल सीटों का बंटवारा नहीं, बल्कि घाटी की आधी आबादी को मुख्यधारा की राजनीति में सशक्त बनाने का एक ऐतिहासिक कदम है।दशकों का इंतजार अब होगा खत्म!जम्मू-कश्मीर के सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि यहां की महिलाओं ने दशकों तक उथल-पुथल और चुनौतियों का सामना किया है। अब जब विधानसभा में महिलाओं के लिए आरक्षण की राह साफ हो रही है, तो इसे एक बड़े लोकतांत्रिक सुधार के रूप में देखा जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, राजनीति में महिलाओं की सीधी भागीदारी से शिक्षा, स्वास्थ्य और घरेलू हिंसा जैसे बुनियादी मुद्दों पर बेहतर नीति निर्धारण हो सकेगा, जिन्हें अक्सर हाशिए पर धकेल दिया जाता था।सामाजिक कार्यकर्ताओं ने क्या कहा?क्षेत्र की प्रमुख सोशल वर्कर्स का मानना है कि जम्मू-कश्मीर की महिलाओं में नेतृत्व की क्षमता की कभी कमी नहीं रही, लेकिन उन्हें उचित मंच नहीं मिल पाया। आरक्षण मिलने से पंचायत स्तर से लेकर विधानसभा तक महिलाओं का प्रतिनिधित्व बढ़ेगा। एक सामाजिक कार्यकर्ता ने चर्चा के दौरान बताया, “यह कदम घाटी की युवा लड़कियों को प्रेरित करेगा कि वे भी नीति निर्माता बन सकती हैं। जब एक महिला निर्णय लेने वाली कुर्सी पर बैठती है, तो वह पूरे समाज के प्रति अधिक संवेदनशील दृष्टिकोण रखती है।”चुनौतियां अभी भी बरकरार, लेकिन हौसले बुलंदभले ही आरक्षण एक स्वागत योग्य कदम है, लेकिन सामाजिक कार्यकर्ताओं ने कुछ चुनौतियों की ओर भी इशारा किया है। उनका कहना है कि केवल कानून बना देना काफी नहीं है, बल्कि समाज की मानसिकता में भी बदलाव लाना होगा ताकि महिलाएं स्वतंत्र रूप से फैसले ले सकें। ‘प्रॉक्सी’ लीडरशिप (जहां पति या परिवार के अन्य सदस्य महिला प्रतिनिधि के पीछे से शासन करते हैं) को रोकने के लिए जागरूकता अभियान चलाने की जरूरत पर भी जोर दिया गया है।घाटी के भविष्य पर क्या पड़ेगा असर?राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि महिलाओं के लिए सुरक्षित सीटें जम्मू-कश्मीर की राजनीति में नया संतुलन पैदा करेंगी। इससे न केवल चुनावी भागीदारी बढ़ेगी, बल्कि यह शांति और विकास की प्रक्रिया में महिलाओं को एक सक्रिय भागीदार के रूप में स्थापित करेगा। आने वाले विधानसभा चुनावों में महिला उम्मीदवारों की बढ़ती संख्या प्रदेश की राजनीति की नई तस्वीर पेश करेगी, जो समावेशी और प्रगतिशील होगी।