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मुइज्जू की मिसाइल कूटनीति, भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर को मालदीव में लगा झटका आखिरी पल में रद्द की बैठक

News India Live, Digital Desk: मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू और अमेरिका के बीच कूटनीतिक दूरियां अब सतह पर आने लगी हैं। पिछले महीने मालदीव पहुंचे भारत में अमेरिकी राजदूत और डोनाल्ड ट्रंप के खास दूत सर्जियो गोर को राष्ट्रपति मुइज्जू से मिले बिना ही खाली हाथ लौटना पड़ा। कूटनीतिक गलियारों में इसे अमेरिका के लिए एक बड़ा ‘स्नब’ (झटका) माना जा रहा है। मुइज्जू ने 23 मार्च 2026 को होने वाली इस तय बैठक को बिल्कुल आखिरी पलों में रद्द कर दिया, जिसके बाद सर्जियो गोर को माले से दिल्ली वापस आना पड़ा।’सीक्रेट मीटिंग’ का ऑफर ठुकराया, तनाव चरम परसूत्रों के मुताबिक, बैठक रद्द होने के बाद अमेरिकी राजदूत ने कूटनीतिक चैनलों के जरिए मुइज्जू कार्यालय से दोबारा विचार करने का आग्रह किया था। इसके जवाब में मालदीव सरकार ने राष्ट्रपति के साथ ‘बंद दरवाजे के पीछे’ (गुप्त बैठक) का प्रस्ताव रखा। हालांकि, 39 वर्षीय शक्तिशाली अमेरिकी दूत ने इस गोपनीय मुलाकात के प्रस्ताव को ठुकरा दिया। उनका मानना था कि एक आधिकारिक दौरे पर इस तरह की गुप्त बैठक प्रोटोकॉल के खिलाफ है। गौरतलब है कि सर्जियो गोर ने मालदीव के विदेश और रक्षा मंत्रियों से तो मुलाकात की, लेकिन राष्ट्रप्रमुख से दूरी बनी रही।ईरान-इजरायल युद्ध बना मुइज्जू की नाराजगी की वजहमुइज्जू द्वारा अमेरिकी दूत से दूरी बनाने के पीछे का असली कारण अब सामने आ रहा है। दरअसल, मालदीव के राष्ट्रपति ईरान पर हुए अमेरिका और इजरायल के हमलों के सख्त खिलाफ हैं। खुद को बेंजामिन नेतन्याहू और इजरायल का कट्टर विरोधी पेश करने वाले मुइज्जू नहीं चाहते थे कि इस युद्ध के बीच वह किसी भी अमेरिकी प्रतिनिधि के साथ सार्वजनिक रूप से दिखें। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि वह मध्य पूर्व के युद्ध को लेकर अमेरिका से कोई चर्चा नहीं करना चाहते और न ही मालदीव की धरती का इस्तेमाल किसी सैन्य अभियान के लिए होने देंगे।घर में घिरे मुइज्जू, कंगाली की कगार पर मालदीवएक तरफ मुइज्जू अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिका जैसे शक्तिशाली देशों को आंखें दिखा रहे हैं, तो दूसरी तरफ उनकी घरेलू राजनीति और अर्थव्यवस्था गहरे संकट में है। हाल ही में हुए स्थानीय नगर निकाय चुनावों में मुइज्जू की पार्टी को करारी हार का सामना करना पड़ा है। इसके साथ ही मालदीव की वित्तीय स्थिति भी खस्ताहाल है। कंगाली से बचने के लिए मालदीव ने अब भारत से गुहार लगाई है कि उसके 400 मिलियन डॉलर के कर्ज को रोलओवर (समय सीमा बढ़ाने) कर दिया जाए। चीन के प्रति झुकाव रखने वाले मुइज्जू के लिए अब भारत और अमेरिका के बीच संतुलन बनाना एक बड़ी चुनौती बन गया है।

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