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MP Farmer Success Story: पारंपरिक खेती छोड़ इस किसान ने शुरू की ‘विदेशी सब्जियों’ की खेती, आजादपुर मंडी में माल बेचकर हर सीजन छाप रहे ₹20 लाख

Farmer Success Story: अक्सर किसानों को पारंपरिक खेती (गेहूं, चना, सोयाबीन) में मौसम की मार और कम मुनाफे की शिकायत रहती है। लेकिन मध्य प्रदेश के सागर जिले के एक प्रगतिशील किसान ने खेती करने के तरीके को ही पूरी तरह से बदल डाला है। सागर जिला मुख्यालय से करीब 70 किलोमीटर दूर खिमलासा ग्राम पंचायत के रहने वाले अमित जैन ने ‘स्मार्ट फार्मिंग’ को अपनाकर कृषि क्षेत्र में एक नई और शानदार मिसाल पेश की है। पिछले 5 सालों से विदेशी सब्जियों (Exotic Vegetables) की आधुनिक खेती कर रहे अमित आज हर सीजन में 15 से 20 लाख रुपये का शुद्ध मुनाफा कमा रहे हैं।पिता के सपने को बनाया हकीकत, दिल्ली तक है सब्जियों की डिमांडअमित जैन की सफलता की कहानी उनके पिता की विरासत से जुड़ी है। अमित के पिता को खेती में हमेशा नए-नए प्रयोग (Innovation) करने का शौक था। पिता के आकस्मिक निधन के बाद अमित ने इस प्रयोग को रुकने नहीं दिया। शुरुआत में उन्होंने छोटे स्तर पर विदेशी सब्जियों की खेती शुरू की, लेकिन जब बाजार की समझ और मुनाफा बढ़ा, तो उन्होंने इसे बड़े पैमाने पर करना शुरू कर दिया। आज अमित के 5 से 7 एकड़ के खेत में उगी प्रीमियम सब्जियां सीधे दिल्ली की मशहूर आजादपुर मंडी में सप्लाई होती हैं। उनके खेत से रोजाना लगभग 5 क्विंटल विदेशी सब्जियां दिल्ली भेजी जाती हैं।खेतों में उग रहा ‘विदेशी सोना’, 12 महीने रहती है हाई डिमांडअमित अपने खेतों में मुख्य रूप से उन विदेशी सब्जियों का उत्पादन करते हैं, जिनकी डिमांड फाइव-स्टार होटल्स और मेट्रो शहरों में सालभर बनी रहती है। भयंकर गर्मी वाले मई और जून के महीने को छोड़ दें, तो वे रोटेशन पद्धति के जरिए पूरे साल भर इन प्रीमियम सब्जियों को उगाते हैं। उनके खेतों में पैदा होने वाली प्रमुख फसलें इस प्रकार हैं:ब्रोकली (Broccoli)ब्रसेल्स स्प्राउट्स (Brussels Sprouts)पोकचोई या बोक चॉय (Bok Choy)चाइनीज कैबेज (Chinese Cabbage)रेड लेट्यूस (Red Lettuce)स्मार्ट फार्मिंग की ये आधुनिक तकनीक बना रही करोड़पतिअमित जैन की सफलता का असली राज उनकी एडवांस कृषि तकनीक में छिपा है। गर्मी और तेज धूप से फसलों को बचाने के लिए उन्होंने ‘कवर क्रॉपिंग’ (Cover Cropping) व्यवस्था अपनाई है। इसके साथ ही वे खेतों में आधुनिक ‘बेड पद्धति’ का इस्तेमाल करते हैं।मल्चिंग और ड्रिप इरिगेशन: पानी की बचत और खरपतवार (Weeds) से बचाव के लिए खेतों में मल्चिंग फिल्म लगाई गई है और सिंचाई पूरी तरह से ड्रिप सिस्टम (टपक सिंचाई) के जरिए होती है।फर्टिगेशन पद्धति: पौधों को खाद और जरूरी कीटनाशकों का छिड़काव भी पानी के साथ ड्रिप सिस्टम से ही किया जाता है। इससे न सिर्फ लेबर का खर्च बचता है, बल्कि पौधों को सटीक मात्रा में पोषण भी मिलता है।लागत और मुनाफे का पूरा गणित (एक एकड़ का हिसाब)विदेशी सब्जियों की खेती आर्थिक रूप से कितनी फायदेमंद है, इसे अमित जैन के इस फॉर्मूले से आसानी से समझा जा सकता है:विवरणलागत और कमाई का आंकड़ाएक एकड़ में कुल खर्चलगभग ₹1 लाख (बीज से लेकर सप्लाई तक)एक एकड़ से कुल कमाई₹4 लाख से ₹5 लाख तकएक एकड़ पर शुद्ध लाभलगभग ₹3.5 से ₹4 लाख5 एकड़ पर कुल मुनाफा₹15 से ₹20 लाख (प्रति सीजन)इंग्लैंड और जर्मनी से आते हैं हाई-क्वालिटी बीजइस मुनाफे वाली खेती का सबसे अहम पहलू है ‘अच्छे बीज का चुनाव’। अमित का मानना है कि बीजों की क्वालिटी के साथ कोई समझौता नहीं किया जा सकता। वे अपने खेतों के लिए आम बीज नहीं, बल्कि इंग्लैंड, जर्मनी और चीन जैसे देशों से इंपोर्ट किए गए बीज इस्तेमाल करते हैं। ये बीज दिल्ली के आयातकों के जरिए खिमलासा गांव तक पहुंचते हैं।अमित जैन आज उन तमाम युवाओं और किसानों के लिए एक प्रेरणा बन गए हैं, जो कहते हैं कि खेती में पैसा नहीं है। सही तकनीक, विदेशी फसलों का चुनाव और बाजार की समझ के दम पर आज सागर का यह किसान लाखों में खेल रहा है।

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