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Stock Market Today: शेयर बाजार में आज हाहाकार या बल्ले-बल्ले? सेंसेक्स-निफ्टी की चाल ने निवेशकों को चौंकाया

News India Live, Digital Desk: भारतीय शेयर बाजार के लिए आज यानी 29 अप्रैल का दिन बेहद हलचल भरा रहा। ग्लोबल मार्केट से मिल रहे मिले-जुले संकेतों और घरेलू निवेशकों की सक्रियता के बीच सेंसेक्स और निफ्टी ने आज एक नई कहानी लिखी है। सुबह बाजार खुलने के साथ ही निवेशकों की धड़कनें तेज थीं कि आज बाजार ‘क्रैश’ होगा या नई ऊंचाईयों को छुएगा (‘Fly’)। दलाल स्ट्रीट पर आज दिन भर उतार-चढ़ाव का ऐसा दौर चला जिसने दिग्गज निवेशकों को भी सोचने पर मजबूर कर दिया।सेंसेक्स और निफ्टी का हाल: शुरुआती तेजी के बाद दिखा दबाव कारोबारी सत्र की शुरुआत शानदार बढ़त के साथ हुई थी, लेकिन ऊपरी स्तरों पर मुनाफावसूली ने बाजार की रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया। निफ्टी आज एक महत्वपूर्ण मनोवैज्ञानिक स्तर के आसपास संघर्ष करता नजर आया। आईटी और बैंकिंग सेक्टर के शेयरों में सबसे ज्यादा एक्शन देखने को मिला। जहां कुछ चुनिंदा हेवीवेट शेयरों ने बाजार को संभालने की कोशिश की, वहीं मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स में भारी अस्थिरता दर्ज की गई।क्या रहे बाजार की इस चाल के मुख्य कारण? बाजार के विशेषज्ञों का मानना है कि आज की इस उठापटक के पीछे तीन बड़े कारण हैं। पहला, अमेरिकी बाजार में महंगाई के आंकड़ों को लेकर जारी अनिश्चितता। दूसरा, कच्चे तेल की कीमतों में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हो रहे बदलाव और तीसरा, घरेलू कंपनियों के तिमाही नतीजों का प्रभाव। कई कंपनियों के नतीजे उम्मीद से कम रहने के कारण निवेशकों ने बिकवाली को प्राथमिकता दी, जिससे बाजार में बिकवाली का दबाव (Selling Pressure) हावी रहा।इन शेयरों ने मारी बाजी, तो इन्हें लगा तगड़ा झटका आज के कारोबार में कुछ चुनिंदा सेक्टर्स जैसे फार्मा और ऑटोमोबाइल में खरीदारी देखने को मिली। दिग्गज कंपनियों के शेयरों में आज ‘हरे निशान’ पर कारोबार हुआ, जिससे निवेशकों को थोड़ी राहत मिली। दूसरी ओर, मेटल और एनर्जी सेक्टर के कुछ शेयरों में आज गिरावट का रुख रहा। छोटे निवेशकों के लिए आज का दिन ‘वेट एंड वॉच’ की रणनीति वाला रहा, क्योंकि बाजार की दिशा स्पष्ट नहीं थी।निवेशकों के लिए क्या है विशेषज्ञों की सलाह? बाजार में आई इस अनिश्चितता को देखते हुए एक्सपर्ट्स का कहना है कि निवेशकों को घबराने की जरूरत नहीं है। गिरावट के समय अच्छी गुणवत्ता वाले शेयरों में धीरे-धीरे निवेश करना फायदेमंद साबित हो सकता है। साथ ही, स्टॉप-लॉस का सख्ती से पालन करने की सलाह दी गई है। आने वाले दिनों में बाजार की चाल काफी हद तक वैश्विक घटनाक्रमों और विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) के रुख पर निर्भर करेगी।

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