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अजीब है मगर सच है: शराब की ही तरह आपके लिवर को अंदर से तबाह कर सकती है रोज खाई जाने वाली चीनी!

शराब और चीनी… ये दोनों नाम एक साथ पढ़कर शायद आपको थोड़ा अजीब लग रहा होगा। हममें से ज्यादातर लोग यही सोचते हैं कि शराब तो सेहत के लिए एक बेहद बुरी चीज है, लेकिन चीनी का क्या है? उसे तो हम रोज सुबह-शाम चाय में, मिठाइयों में या कोल्ड ड्रिंक्स के जरिए बड़े चाव से लेते हैं। लेकिन अब समय आ गया है कि हम इस भ्रम को तोड़ें और गहराई से समझें कि जिस चीनी को हम रोज बड़े मजे से खा रहे हैं, वह हमारे शरीर के भीतर क्या खेल खेल रही है। यहाँ हम चीनी और शराब की कोई सीधी तुलना नहीं कर रहे हैं, बल्कि विज्ञान के नजरिए से यह बताने की कोशिश कर रहे हैं कि इन दोनों में एक ऐसी डरावनी समानता है जिसके बारे में बहुत कम लोगों को पता होता है। वह समानता है— इन दोनों का हमारे लिवर पर होने वाला सीधा और घातक असर। चीनी और शराब का 'लिवर कनेक्शन' हमारा लिवर हमारे शरीर की सबसे बड़ी केमिकल फैक्ट्री और फिल्टर मशीन है। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ अल्कोहल एब्यूज एंड अल्कोहॉलिज्म (NIAAA) की रिपोर्ट बताती है कि शराब हमारे लिवर को कई चरणों में बर्बाद करती है। शुरुआत में लिवर में अतिरिक्त फैट जमा होता है, फिर उसके टिशूज में सूजन आती है और धीरे-धीरे स्कार टिशूज बनने लगते हैं, जिसे मेडिकल भाषा में लिवर सिरोसिस या फाइब्रोसिस कहते हैं। अंत में यह स्थिति लिवर कैंसर का कारण भी बन सकती है। अब बात करते हैं चीनी की। प्रसिद्ध मेडिकल जर्नल 'पबमेड' (Pubmed) में प्रकाशित एक शोध के अनुसार, चीनी (विशेषकर फ्रुक्टोज) का हमारे लिवर के साथ बेहद सीधा और खतरनाक रिश्ता है। फ्रुक्टोज और फैटी लिवर का खतरा जब हम लंबे समय तक बहुत ज्यादा मात्रा में चीनी, पैकेज्ड जूस, कोल्ड ड्रिंक्स या मीठी चीजों का सेवन करते हैं, तो उसमें मौजूद फ्रुक्टोज को हमारा लिवर संभाल नहीं पाता। नतीजा यह होता है कि वह इस अतिरिक्त चीनी को फैट (वसा) में बदलना शुरू कर देता है। इसी वजह से जो लोग शराब नहीं भी पीते, वे भी नॉन-अल्कोहॉलिक फैटी लिवर डिजीज (NAFLD) नाम की गंभीर बीमारी के शिकार हो जाते हैं। चीनी बनाम शराब: कौन है ज्यादा खतरनाक? अगर हम लिवर की सेहत को केंद्र में रखकर इन दोनों की तुलना करें, तो दोनों के काम करने का तरीका थोड़ा अलग है, जिसे नीचे दी गई तालिका से आसानी से समझा जा सकता है: इस तुलना से साफ है कि तात्कालिक रूप से शराब ज्यादा खतरनाक है, लेकिन इसका मतलब यह कतई नहीं है कि चीनी पूरी तरह सुरक्षित है। लिमिट से ज्यादा मीठा खाना आपके लिवर को उसी मुकाम पर लाकर खड़ा कर सकता है, जहां एक शराब पीने वाले का लिवर होता है। अपने लिवर को सुरक्षित और हेल्दी रखने के अचूक उपाय लिवर हमारे शरीर का वो इकलौता अंग है जो खुद को दोबारा ठीक (Regenerate) कर सकता है, बशर्ते हम उसे सही माहौल दें। अपने लिवर को हमेशा जवान और सेहतमंद बनाए रखने के लिए आज से ही अपनी लाइफस्टाइल में ये बदलाव करें: वजन पर रखें काबू: शरीर का वजन न तो बहुत ज्यादा होना चाहिए और न ही अचानक बहुत कम। संतुलित वजन फैटी लिवर के खतरे को 80% तक कम कर देता है। नियमित एक्सरसाइज: हफ्ते में कम से कम 3 से 4 दिन आधे घंटे के लिए वॉक, रनिंग या कोई भी शारीरिक कसरत जरूर करें। खान-पान में सुधार: अपने भोजन में साबुत अनाज, हरी पत्तेदार सब्जियां और ताजे फलों को शामिल करें। डिब्बाबंद जूस और कोल्ड ड्रिंक्स से पूरी तरह दूरी बना लें। बिना सलाह दवाइयां न लें: बार-बार सिरदर्द या बदन दर्द होने पर खुद से पेनकिलर (दर्द निवारक गोलियां) खाने की आदत छोड़ दें। यह लिवर को सीधे डैमेज करती हैं। सप्लीमेंट्स से बचें: बिना डॉक्टर की लिखित सलाह के किसी भी तरह के हर्बल, एलोपैथी या प्रोटीन सप्लीमेंट्स का सेवन न करें। नींद से समझौता नहीं: रात को सोने और सुबह उठने का एक फिक्स समय तय करें। रोजाना 7 से 8 घंटे की गहरी नींद लिवर को डिटॉक्स होने में मदद करती है। लिवर की सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि इसके शुरुआती लक्षणों का आसानी से पता नहीं चलता। इसलिए, अगर आपको लगातार थकान, पेट के दाहिने हिस्से में भारीपन या पाचन की समस्या रहती है, तो इसे मामूली कमजोरी समझकर नजरअंदाज न करें और तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। डिस्क्लेमर: इस लेख का मुख्य उद्देश्य केवल चीनी और शराब का लिवर पर पड़ने वाले असर के प्रति जागरूकता बढ़ाना है। इसे किसी भी प्रकार के चिकित्सीय इलाज या डॉक्टरी सलाह के रूप में न लिया जाए। सेहत से जुड़ी किसी भी समस्या के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।

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