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भारत को लगा बड़ा झटका! चौथी बड़ी अर्थव्यवस्था बनने का सपना टूटा, ब्रिटेन ने डॉलर के आधार पर पछाड़ा

भारत को लगा बड़ा झटका! चौथी बड़ी अर्थव्यवस्था बनने का सपना टूटा, ब्रिटेन ने डॉलर के आधार पर पछाड़ा

ग्लोबल इकोनॉमी और आर्थिक मोर्चे से भारत के लिए एक बेहद चौंकाने वाली और तगड़ा झटका देने वाली खबर सामने आ रही है। पिछले कुछ समय से जिस तेजी के साथ भारतीय अर्थव्यवस्था आगे बढ़ रही थी, उसे देखकर यह अनुमान लगाया जा रहा था कि भारत बहुत जल्द जर्मनी और जापान को पीछे छोड़कर दुनिया की चौथी और फिर तीसरी सबसे बड़ी आर्थिक महाशक्ति (Global Economic Superpower) बन जाएगा। लेकिन ताजा वैश्विक आंकड़ों ने देश के इस बड़े सपने को फिलहाल एक बड़ा झटका दे दिया है। अमेरिकी डॉलर के मूल्य के आधार पर की गई नई रैंकिंग में ब्रिटेन (UK) ने एक बार फिर जबरदस्त वापसी करते हुए भारत को पीछे धकेल दिया है। इस उलटफेर के बाद भारत दुनिया की शीर्ष अर्थव्यवस्थाओं की सूची में पांचवें स्थान से फिसलकर अब छठे पायदान पर पहुंच गया है।

ब्रिटेन की करेंसी पाउंड में मजबूती और डॉलर के उतार-चढ़ाव ने बिराड़ा खेल अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थाओं के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, इस बड़े बदलाव के पीछे मुख्य कारण वैश्विक मुद्रा बाजार (Currency Market) में चल रही भारी उथल-पुथल है। पिछले कुछ महीनों में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले ब्रिटेन की करेंसी 'पाउंड स्टर्लिंग' में काफी मजबूती देखी गई है। चूंकि वैश्विक स्तर पर जीडीपी (GDP) का मूल्यांकन डॉलर के आधार पर किया जाता है, इसलिए पाउंड के मजबूत होने से ब्रिटेन की कुल जीडीपी का आकार डॉलर की तुलना में अचानक बढ़ गया। दूसरी ओर, भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले एक सीमित दायरे में बना रहा, जिसके चलते डॉलर मूल्य के पैमाने पर ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था का आकार भारत से थोड़ा आगे निकल गया और उसने भारत को छठे नंबर पर धकेल दिया।

घरेलू मोर्चे पर महंगाई और धीमी विकास दर भी बनी बड़ी वजह केवल मुद्रा बाजार का उतार-चढ़ाव ही नहीं, बल्कि भारतीय अर्थव्यवस्था के भीतर चल रही कुछ आंतरिक चुनौतियां भी इस गिरावट के लिए जिम्मेदार मानी जा रही हैं। हालिया तिमाहियों में देश के भीतर बढ़ती महंगाई, ग्रामीण इलाकों में मांग की कमी और औद्योगिक उत्पादन (IIP) की रफ्तार में आई हल्की सुस्ती ने भी आर्थिक विकास दर को थोड़ा प्रभावित किया है। आर्थिक विश्लेषकों का कहना है कि जब तक देश में निजी निवेश (Private Investment) और घरेलू खपत में भारी उछाल नहीं आता, तब तक अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग में इस तरह के उतार-चढ़ाव देखने को मिलते रहेंगे। हालांकि, विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि यह गिरावट अस्थाई हो सकती है।

क्या भारत दोबारा हासिल कर पाएगा अपनी खोई हुई पोजीशन इस झटके के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था की बुनियादी स्थिति बेहद मजबूत बनी हुई है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) दोनों ने ही अनुमान जताया है कि आने वाले समय में भारत की विकास दर दुनिया की अन्य प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के मुकाबले सबसे तेज रहने वाली है। जैसे ही भारत में त्योहारी सीजन और सरकारी सुधारों का असर दिखना शुरू होगा, देश की जीडीपी रफ्तार पकड़ेगी। आर्थिक पंडितों का दावा है कि भारत बहुत जल्द ब्रिटेन को दोबारा पछाड़कर न सिर्फ अपनी पांचवीं पोजीशन वापस पा लेगा, बल्कि साल 2028-2030 तक दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने के अपने दीर्घकालिक लक्ष्य को भी हासिल करने में कामयाब रहेगा।

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