1.29 करोड़ छात्र और 10 घंटे की महा-परीक्षा; चीन की इस ‘क्रूर’ परीक्षा के आगे भारत की JEE-NEET भी लगती हैं बेहद आसान

जब भारत में आईआईटी-जेईई (IIT-JEE), नीट (NEET) या यूपीएससी (UPSC) जैसी परीक्षाओं की बात होती है, तो इन्हें देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में गिना जाता है। छात्र इसके लिए सालों-साल कड़ी तपस्या करते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि दुनिया में एक ऐसी परीक्षा भी है जिसके सामने भारत के ये सभी कॉम्पिटिटिव एग्जाम्स बेहद आसान नजर आने लगते हैं? हम बात कर रहे हैं चीन की नेशनल कॉलेज एंट्रेंस एग्जामिनेशन यानी 'गाओकाओ' (Gaokao Exam) की। इस साल चीन में इस महा-परीक्षा की शुरुआत हो चुकी है, जिसमें इस बार रिकॉर्ड 1.29 करोड़ से अधिक छात्र अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। इसे दुनिया की सबसे तनावपूर्ण और कठिन परीक्षा माना जाता है।
दो दिनों में 10 घंटे का कड़ा इम्तिहान
चीन की इस 'गाओकाओ' परीक्षा का शेड्यूल किसी भी छात्र की मानसिक और शारीरिक क्षमता को निचोड़ कर रख देता है। यह परीक्षा लगातार दो दिनों तक चलती है, जिसमें छात्रों को कुल मिलाकर करीब 10 घंटे तक परीक्षा हॉल में बैठना पड़ता है। इस दौरान चीनी भाषा (मैंडरिन), गणित, अंग्रेजी और छात्र के चुने गए विषय (साइंस या ह्यूमैनिटीज) की परीक्षा होती है। इसमें पूछे जाने वाले सवाल इतने जटिल और घुमावदार होते हैं कि अच्छे-अच्छे मेधावी छात्रों के पसीने छूट जाते हैं। इस परीक्षा का स्कोर ही यह तय करता है कि छात्र को चीन की टॉप यूनिवर्सिटीज में दाखिला मिलेगा या फिर उसका भविष्य किसी साधारण कॉलेज में बीतेगा।
देश में थम जाती है रफ्तार, लग जाता है 'नो हॉन्किंग जोन'
गाओकाओ सिर्फ एक परीक्षा नहीं है, बल्कि पूरे चीन के लिए एक राष्ट्रीय इवेंट बन जाता है। परीक्षा के दिनों में छात्रों को किसी भी तरह की अशांति न हो, इसके लिए चीनी प्रशासन परीक्षा केंद्रों के आसपास की सड़कों पर ट्रैफिक को पूरी तरह से डायवर्ट कर देता है। कई शहरों में परीक्षा केंद्रों के पास 'नो हॉन्किंग जोन' (No Honking Zone) घोषित कर दिया जाता है, यानी वहां हॉर्न बजाने पर भारी जुर्माना है। यहां तक कि निर्माण कार्यों (Construction Works) और शोर-शराबा करने वाली सभी गतिविधियों पर पूरी तरह से रोक लगा दी जाती है। पुलिस की गाड़ियां और एम्बुलेंस सड़कों पर मुस्तैद रहती हैं ताकि परीक्षा देने जा रहे किसी भी छात्र को कोई देरी न हो।
तकनीक और सुरक्षा का ऐसा पहरा कि परिंदा भी पर न मार सके
इस परीक्षा में नकल रोकने के लिए चीनी सरकार जिस स्तर की सुरक्षा व्यवस्था अपनाती है, उसकी कल्पना भी मुश्किल है। परीक्षा केंद्रों पर फेशियल रिकग्निशन (चेहरा पहचानने वाली तकनीक), फिंगरप्रिंट स्कैनर और ड्रोन कैमरों का इस्तेमाल किया जाता है। परीक्षा हॉल के भीतर हाई-टेक सिग्नल जैमर्स लगाए जाते हैं ताकि कोई भी इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस काम न कर सके। आपको जानकर हैरानी होगी कि अगर कोई छात्र इस परीक्षा में बड़े पैमाने पर नकल करते हुए या पेपर लीक में शामिल पाया जाता है, तो चीनी कानून के तहत उसे सीधे 7 साल तक की जेल की सजा हो सकती है।
भारत की JEE और NEET से क्यों है ये कहीं ज्यादा कठिन?
भारत की जेईई और नीट जैसी परीक्षाओं में छात्रों को देश के प्रीमियम संस्थानों (IITs और AIIMS) के लिए प्रतिस्पर्धा करनी होती है, लेकिन वहां सीटों और आवेदकों का अनुपात फिर भी गाओकाओ से अलग है। चीन में 1.29 करोड़ से अधिक आवेदकों के बीच टॉप यूनिवर्सिटीज जैसे शिंगहुआ या पेकिंग यूनिवर्सिटी में जगह बनाने की रेस इतनी ज्यादा गलाकाट होती है कि महज 0.2 प्रतिशत छात्रों को ही इसमें सफलता मिल पाती है। इस परीक्षा के चलते चीन के युवाओं में मानसिक तनाव इस कदर बढ़ जाता है कि इसे 'जीवन की सबसे क्रूर परीक्षा' का नाम दिया गया है, जो सीधे तौर पर एक छात्र के पूरे करियर और सामाजिक प्रतिष्ठा को तय करती है।