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होम्योपैथी डॉक्टरों को ‘झोलाछाप’ कहना पड़ेगा भारी: अनुष्का शर्मा के पोस्ट से शुरू हुए विवाद पर नेशनल कमीशन का कड़ा रुख

इन दिनों सोशल मीडिया पर एक अलग ही बहस छिड़ी हुई है और इस बार केंद्र में है चिकित्सा पद्धति 'होम्योपैथी'। इस पूरे विवाद की शुरुआत तब हुई जब बॉलीवुड अभिनेत्री अनुष्का शर्मा ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर होम्योपैथी का समर्थन करते हुए एक पोस्ट साझा की। इसके बाद इंटरनेट यूजर्स दो गुटों में बंट गए—कोई इसके समर्थन में तर्क देने लगा तो कोई इसे पूरी तरह खारिज करने लगा। सोशल मीडिया पर बढ़ते इस विवाद और डॉक्टरों के खिलाफ हो रही तीखी बयानबाजी को देखते हुए अब नेशनल कमीशन फॉर होम्योपैथी (NCH) ने बेहद सख्त रवैया अपनाया है।

कमीशन ने एक आधिकारिक बयान जारी करके सभी स्टेकहोल्डर्स, मीडिया चैनलों और आम जनता से अपील की है कि वे होम्योपैथी और इससे जुड़े रजिस्टर्ड डॉक्टरों के बारे में कोई भी बात कहते या लिखते समय पूरी जिम्मेदारी और सावधानी बरतें।

कमिशन की चेतावनी: रजिस्टर्ड डॉक्टरों का अपमान बर्दाश्त नहीं

कमिशन ने प्रिंट, डिजिटल, इलेक्ट्रॉनिक और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर होम्योपैथी और रजिस्टर्ड डॉक्टरों के खिलाफ की जा रही अपमानजनक, मानहानि करने वाली और बिना पुष्टि वाली टिप्पणियों का खुद संज्ञान लिया है। कमीशन ने साफ कहा है कि सार्वजनिक मंचों पर बातचीत करते समय तथ्यों की सटीकता का ध्यान रखना बेहद जरूरी है। बिना किसी ठोस आधार के किसी की पेशेवर प्रतिष्ठा को ठेस नहीं पहुंचाई जा सकती।

 'झोलाछाप' शब्द इस्तेमाल करने पर होगी कानूनी कार्रवाई

नेशनल कमीशन ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि कोई भी सोशल मीडिया पोस्ट, लेख, प्रेस रिलीज, वेबसाइट कंटेंट या फिर कोई सरकारी दस्तावेज (जिसमें एफआईआर, आधिकारिक नोटिस या शिकायतें शामिल हैं), अगर किसी भी रजिस्टर्ड होम्योपैथिक डॉक्टर को "झोलाछाप डॉक्टर" (Quack) कहकर संबोधित करता है, तो उसे सीधे तौर पर मानहानि और गुमराह करने वाला माना जाएगा। यह डॉक्टरों के संवैधानिक और कानूनी अधिकारों का सीधा उल्लंघन है और ऐसा करने वालों के खिलाफ नियमों के मुताबिक सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

नेशनल कमीशन द्वारा जारी मुख्य दिशा-निर्देश

पार्टी और सोशल मीडिया पर चल रही इस बहस को सही दिशा देने के लिए कमीशन ने कुछ जरूरी बातें सामने रखी हैं:

  • बयानबाजी में बरतें सावधानी: सभी डॉक्टरों, मेडिकल संस्थानों, मीडिया और आम जनता को सलाह दी जाती है कि वे होम्योपैथी से जुड़े मुद्दों पर सार्वजनिक बयान जारी करते समय पूरी सावधानी बरतें। किसी भी ऐसी भाषा का प्रयोग करने से बचें जो पक्षपाती, भ्रामक या मानहानि करने वाली हो सकती है।

  • शिकायत के लिए कानूनी रास्ता चुनें: यदि किसी व्यक्ति को किसी विशेष डॉक्टर के आचरण, इलाज या उनकी डिग्री को लेकर कोई समस्या या शक है, तो वे सोशल मीडिया पर सामान्य टिप्पणी करने या पूरे पेशे को बदनाम करने के बजाय कानूनी और नियामक तरीकों का इस्तेमाल करें। इसकी शिकायत सीधे अनुशासनात्मक कमेटी से की जा सकती है।

  • प्रतिष्ठा की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध: कमीशन ने दोहराया है कि वह अपने डॉक्टरों की गरिमा, सामाजिक दर्जे और उनकी कानूनी पहचान की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। जानबूझकर किसी चिकित्सक की विश्वसनीयता पर सवाल उठाने या उनकी छवि खराब करने की कोशिश करने वालों से कानून के मुताबिक सख्ती से निपटा जाएगा।

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