MT Settebello Attack: ‘हथियारबंद लूट और सरकारी डकैती कर रहा है अमेरिका’; भारतीय जहाजों पर हमले को लेकर ईरान का वाशिंगटन पर अब तक का सबसे बड़ा हमला

ओमान की खाड़ी में तीन होनहार भारतीय नाविकों की दर्दनाक मौत के बाद खाड़ी क्षेत्र (Gulf Region) का भू-राजनीतिक पारा अचानक बेहद गर्म हो गया है। इस संवेदनशील समुद्री मार्ग पर व्यापारिक जहाजों (Commercial Ships) की सुरक्षा को लेकर अब दुनिया की दो बड़ी ताकतों— अमेरिका और ईरान के बीच सीधे आरोप-प्रत्यारोप का एक नया और खतरनाक दौर शुरू हो चुका है।
ईरान ने खुलकर भारत का पक्ष लेते हुए अमेरिकी सेना की इस कार्रवाई को अंतरराष्ट्रीय कानून का खुला उल्लंघन बताया है, वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इन आरोपों को ध्यान भटकाने की कोशिश करार देते हुए ईरान को ही कटघरे में खड़ा किया है। इस पूरे विवाद के बीच भारत सरकार ने भी बेहद कड़ा और सख्त रुख अपनाते हुए वाशिंगटन के सामने अपना कूटनीतिक विरोध दर्ज कराया है।
ईरान का अमेरिका पर सीधा हमला: 'यह सरकारी समुद्री डकैती है'
भारतीय क्रू (चालक दल) वाले व्यापारिक जहाजों पर हुए हालिया हमलों को लेकर ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने वाशिंगटन की नीतियों की कड़े शब्दों में निंदा की है। अराघची ने साफ तौर पर अमेरिकी नौसेना पर भारतीय जहाजों को निशाना बनाने का आरोप मढ़ा है।
ईरानी विदेश मंत्री ने अपने आधिकारिक बयान में कहा:
"भारतीय कमर्शियल जहाजों पर अमेरिका के इन बेरहम हमलों में तीन निर्दोष भारतीय नागरिकों की जान गई है। ये हिंसक घटनाएं इस बात का जीता-जागता सबूत हैं कि अमेरिका आज भी अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में 'हथियारबंद लूट' और 'सरकारी समुद्री डकैती' (State Piracy) की नीति पर चल रहा है।"
अराघची ने पीड़ित नाविकों के परिवारों, भारत की जनता और भारत सरकार के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त की। साथ ही उन्होंने वैश्विक बिरादरी से अपील की कि वे एकजुट होकर अमेरिका को इस गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार के लिए जवाबदेह ठहराएं, क्योंकि ऐसी हरकतें वैश्विक शांति, सुरक्षा और सुरक्षित समुद्री व्यापार के लिए सबसे बड़ा खतरा हैं।
ट्रंप के दावों पर मचा नया घमासान: ईरान ने आरोपों को बताया 'बेबुनियाद'
यह विवाद उस समय और ज्यादा उलझ गया जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर एक पोस्ट लिखकर ईरान के इरादों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए।
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ट्रंप का दावा: ट्रंप ने आरोप लगाया कि ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से गुजर रहे भारतीय जहाजों पर कई घातक ड्रोन दागे थे, जिसे अमेरिकी सेना ने मुस्तैदी दिखाते हुए समय रहते नाकाम कर दिया। उन्होंने ईरान को चेतावनी देते हुए लिखा कि "उन्हें अपनी हरकतें सुधारनी होंगी, और वह भी बहुत जल्दी।" इसके साथ ही ट्रंप ने ईरान को 'बेहद बेईमान' बताते हुए आगामी शांति समझौते (Peace Deal) से जुड़ी खबरों को भी खारिज कर दिया।
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ईरान का पलटवार: भारत में स्थित ईरानी दूतावास ने राष्ट्रपति ट्रंप के इन दावों को पूरी तरह से सिरे से खारिज कर दिया है। दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर लिखा कि ईरान पर लगाए गए ये सभी आरोप पूरी तरह बेबुनियाद और मनगढ़ंत हैं। ईरान का कहना है कि अमेरिका असल में अपनी उस गलती पर पर्दा डालना चाहता है, जिसके कारण पिछले एक हफ्ते में तीन भारतीय जहाजों को निशाना बनाया गया और नाविकों की जान गई।
'MT सेटेबेलो' पर हमला और भारत का कड़ा कूटनीतिक एक्शन
इस पूरे विवाद की मुख्य जड़ ओमान की खाड़ी में पलाऊ के झंडे वाले तेल टैंकर 'MT सेटेबेलो' (MT Settebello) पर अमेरिकी नौसेना द्वारा की गई घातक कार्रवाई है। इस हमले के बाद भारत सरकार ने बिना किसी देरी के मामले को सीधे अमेरिकी प्रशासन के सर्वोच्च स्तर पर उठाया है।
भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने स्पष्ट किया कि उन्होंने इस मुद्दे पर सीधे अमेरिकी विदेश मंत्री (Secretary of State) मार्को रुबियो से बात की है और भारत का कड़ा राजनयिक विरोध दर्ज कराया है। डॉ. जयशंकर ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक जहाजों के खिलाफ ऐसी जानलेवा और हिंसक कार्रवाई को किसी भी कूटनीतिक या सुरक्षा तर्क के आधार पर उचित नहीं ठहराया जा सकता।
टैंकर 'MT सेटेबेलो' का पूरा विवरण और हताहतों की स्थिति
अमेरिकी हमले का शिकार हुए इस तेल टैंकर के क्रू और उसमें हुए नुकसान की पूरी जानकारी नीचे दी गई तालिका में दी गई है:
आगे क्या? (Geopolitical Impact)
खाड़ी का यह समुद्री रास्ता वैश्विक कच्चे तेल (Crude Oil) की सप्लाई के लिए दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण लाइफलाइन माना जाता है। इस रूट पर भारतीय नाविकों की सुरक्षा भारत के विदेशी व्यापार और शिपिंग इंडस्ट्री के लिए बेहद नाजुक विषय है। एक तरफ जहां अमेरिका और ईरान इस त्रासदी को अपने निजी राजनीतिक और सैन्य हितों के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं, वहीं भारत का ध्यान पूरी तरह से अपने नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और अंतरराष्ट्रीय नियमों की बहाली पर केंद्रित है। आने वाले दिनों में देखना होगा कि मार्को रुबियो और अमेरिकी प्रशासन भारत की इस कड़ी आपत्ति पर क्या आधिकारिक जवाब सौंपता है।