व्यापार

Home Loan Management: होम लोन लेते समय न करें ये बड़ी गलती, जानिए आपकी सैलरी का कितना हिस्सा EMI में जाना चाहिए

नया घर खरीदना हर इंसान के जीवन का सबसे बड़ा सपना और निवेश होता है। लेकिन होम लोन (Home Loan) एप्रूव होने से पहले ग्राहक हमेशा एक बड़े मानसिक तनाव में रहता है। मन में लगातार कई सवाल घूमते हैं—जैसे, अगर बैंक ने लोन रिजेक्ट कर दिया तो क्या होगा? या फिर अगर बैंक ने प्रॉपर्टी की कीमत के मुकाबले बहुत कम लोन एप्रूव किया तो डाउन पेमेंट का इंतजाम कैसे होगा?

यह चिंता तब और गंभीर हो जाती है जब कोई व्यक्ति घर की कुल कीमत का एक बड़ा हिस्सा केवल होम लोन के भरोसे चुकाना चाहता है। बैंकिंग और फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स का मानना है कि लोन की राशि कितनी होनी चाहिए, यह फैसला कभी भी बैंक के भरोसे नहीं छोड़ना चाहिए, बल्कि ग्राहकों को अपनी वित्तीय क्षमता के आधार पर खुद तय करना चाहिए।

होम लोन है 20 साल की बड़ी लायबिलिटी, सोच-समझकर लें फैसला

होम लोन कोई शॉर्ट-टर्म क्रेडिट नहीं है, बल्कि यह एक लंबी अवधि की वित्तीय जिम्मेदारी (Long-Term Liability) है। आमतौर पर लोग 15 से 20 साल तक की अवधि के लिए होम लोन लेते हैं। इसका सीधा मतलब यह है कि अगले दो दशकों तक हर महीने की एक निश्चित तारीख को आपकी गाढ़ी कमाई का एक बड़ा हिस्सा ईएमआई (EMI) के रूप में बैंक के पास जाएगा।

इसलिए लोन लेने से पहले यह अच्छी तरह कैलकुलेट कर लें कि आप हर महीने कितनी ईएमआई बिना किसी मानसिक और आर्थिक दबाव के चुका सकते हैं। कई बार बैंक आपकी एलिजिबिलिटी देखकर आपको आपकी जरूरत से ज्यादा का लोन ऑफर कर देते हैं, लेकिन अगर आपको लगता है कि भविष्य में इसे चुकाने में बजट बिगड़ सकता है, तो भारी लोन ऑफर को 'ना' कहने में ही समझदारी है।

इन जरूरी मासिक खर्चों के साथ कभी नहीं कर सकते समझौता

हर मध्यमवर्गीय परिवार के महीने के कुछ ऐसे फिक्स्ड और जरूरी खर्च होते हैं, जिनमें चाहकर भी कोई कटौती या समझौता नहीं किया जा सकता है। इन खर्चों में शामिल हैं:

  • बच्चों के स्कूल-कॉलेज की मंथली फीस

  • लाइफ और हेल्थ इंश्योरेंस के प्रीमियम

  • गाड़ी की किस्त (Car/Bike EMI)

  • ऑफिस आने-जाने और पेट्रोल-डीजल का खर्च

  • भविष्य के लिए जरूरी सेविंग्स और म्यूचुअल फंड/SIP इन्वेस्टमेंट्स

  • अचानक आने वाले मेडिकल इमरजेंसी बिल और राशन का खर्च

होम लोन की किस्त कटने के बाद आपके बैंक खाते में हर महीने इतनी पर्याप्त रकम जरूर बचनी चाहिए, जिससे ऊपर दिए गए सभी जरूरी काम बिना किसी से उधार लिए आसानी से पूरे हो सकें।

थंब रूल: सैलरी के 30 फीसदी से ज्यादा न हो होम लोन की EMI

फाइनेंशियल प्लानर्स के अनुसार, पर्सनल फाइनेंस का एक बेहद महत्वपूर्ण थंब रूल है कि आपके होम लोन की मंथली ईएमआई आपकी कुल इन-हैंड सैलरी (Net Monthly Salary) के 30% से अधिक नहीं होनी चाहिए।

उदाहरण के लिए: यदि आपकी महीने की कुल टेक-होम सैलरी 1,00000 रुपये है, तो आपके घर की किस्त किसी भी परिस्थिति में 30,000 रुपये प्रति माह से ज्यादा नहीं होनी चाहिए।

अगर आप इस 30 फीसदी के बजट को पार करते हैं, तो आपको परिवार की अन्य प्राथमिकताओं के साथ समझौता करना पड़ेगा। अक्सर देखा गया है कि लोग जोश में आकर अपनी सैलरी का 50-60% हिस्सा होम लोन की ईएमआई में झोंक देते हैं, जिससे बाद में बच्चों की उच्च शिक्षा या किसी मेडिकल क्राइसिस के समय उन्हें गंभीर आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ता है।

घर खरीदने से कहीं ज्यादा जरूरी है बच्चों का क्वालिटी एजुकेशन

आज के इस दौर में सबसे बड़ा और सबसे सुरक्षित निवेश बच्चों की हायर एजुकेशन (Higher Education) को माना जाता है। जिस तेजी से देश और विदेशों में पढ़ाई का खर्च (Education Inflation) बढ़ रहा है, उसे देखते हुए बच्चों को एक बेहतरीन करियर और क्वालिटी एजुकेशन दिलाना आसान नहीं रह गया है।

अनेक माता-पिता अपने बच्चों की पढ़ाई को अपनी लाइफ की टॉप प्रायोरिटी पर रखते हैं और यह पूरी तरह सही भी है। इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि आप अपनी जिंदगी में बड़ा आलीशान घर या फ्लैट कुछ साल रुककर, अपनी इनकम बढ़ने के बाद बाद में भी खरीद सकते हैं। लेकिन, अगर सही उम्र और सही समय पर आपने बच्चों की पढ़ाई और उनके भविष्य पर फोकस नहीं किया, तो शिक्षा का यह सुनहरा मौका जीवन में दोबारा लौटकर नहीं आएगा।

Back to top button