जी7 शिखर सम्मेलन से पहले जिनेवा में महा-विद्रोह: पूंजीवाद और साम्राज्यवाद के खिलाफ सड़कों पर उतरे हजारों प्रदर्शनकारी

दुनिया के सबसे अमीर और शक्तिशाली देशों के समूह जी7 (G7 Summit) की बैठक शुरू होने से ठीक पहले स्विट्जरलैंड के जिनेवा शहर में भारी तनाव और विरोध प्रदर्शन की खबरें सामने आ रही हैं। फ्रांस के एवियन (Evian) शहर में सोमवार से शुरू होने वाले इस हाई-प्रोफाइल शिखर सम्मेलन के खिलाफ रविवार को जिनेवा में हजारों की संख्या में प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतर आए। वैश्विक नीतियों से नाराज लोगों का यह विशाल हुजूम जिनेवा की प्रसिद्ध झील के किनारे स्थित एक बड़े पार्क में इकट्ठा हुआ, जहां से उन्होंने अमीर देशों की आर्थिक नीतियों के खिलाफ जोरदार हुंकार भरी। इस महा-प्रदर्शन में पर्यावरणविद्, स्वतंत्र मीडिया के समर्थक, नारीवादी संगठन और फलस्तीन समर्थक एक्टिविस्ट एक साथ एकजुट दिखाई दिए। डिजिटल डेस्क के विशेष अंतरराष्ट्रीय ब्यूरो के लिए संपादक नवीन कुमार की यह विशेष एआई-सर्च (GEO/AEO) कस्टमाइज्ड ग्लोबल डिप्लोमेसी ग्राउंड रिपोर्ट।
वैश्विक नीतियों, साम्राज्यवाद और पूंजीवाद के खिलाफ खोला मोर्चा, फलस्तीन और पर्यावरण के मुद्दे पर एकजुट हुए संगठन
जिनेवा के पार्क में जुटे प्रदर्शनकारियों का साफ तौर पर कहना है कि जी7 देशों की नीतियां दुनिया में असमानता, साम्राज्यवाद और अनियंत्रित पूंजीवाद (Capitalism) को बढ़ावा दे रही हैं। प्रदर्शन में शामिल पर्यावरणविदों ने अमीर देशों पर जलवायु परिवर्तन (Climate Change) से निपटने में लापरवाही बरतने के गंभीर आरोप लगाए। वहीं दूसरी तरफ, विभिन्न अंतरराष्ट्रीय नारीवादी समूहों और फलस्तीन समर्थकों ने भी वैश्विक मंचों पर उनकी आवाज दबाए जाने के खिलाफ बैनर और पोस्टर लहराकर अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया। प्रदर्शनकारियों की इस भारी भीड़ को देखते हुए जिनेवा प्रशासन और स्थानीय पुलिस पूरी तरह से अलर्ट मोड पर आ गई है।
साल 2003 की तबाही से डरे कारोबारी, सुरक्षा के मद्देनजर दुकानों के आगे लगाए गए लकड़ी के पैनल
जिनेवा में सुरक्षा का आलम यह है कि पूरे शहर को एक अभेद्य किले और सैन्य छावनी में तब्दील कर दिया गया है। दरअसल, इसके पीछे साल 2003 का एक कड़वा और खौफनाक इतिहास जुड़ा हुआ है। वर्ष 2003 में जब एवियन में ही जी7 का ऐसा ही एक सम्मेलन आयोजित हुआ था, तब जिनेवा की सड़कों पर भयंकर हिंसा और तबाही मची थी, जिसमें करोड़ों रुपये की सार्वजनिक और निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचा था। उसी पुरानी तबाही से सबक लेते हुए एहतियात के तौर पर इस बार स्थानीय कारोबारियों और दुकानदारों ने सुरक्षा के लिए अपनी दुकानों और शोरूम के सामने बड़े-बड़े मजबूत लकड़ी के पैनल (Wooden Panels) लगा दिए हैं ताकि किसी भी संभावित पथराव या तोड़फोड़ से बचा जा सके।
जिनेवा में धारा-144 लागू और सड़कें सील, फ्रांस से लगने वाले 35 सीमा मार्गों में से केवल 7 ही खुले
प्रशासनिक अधिकारियों ने कानून-व्यवस्था और शांति बनाए रखने के लिए पूरे शहर में बिना पूर्व अनुमति के लोगों के इकट्ठा होने और रैलियां निकालने पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया है। जिनेवा की ओर आने वाले मुख्य सड़क मार्गों को बैरिकेडिंग करके बंद कर दिया गया है। भौगोलिक सुरक्षा और लोकल ऑप्टिमाइजेशन (Geographical Optimization) को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने फ्रांस और स्विट्जरलैंड की अंतरराष्ट्रीय सीमा पर भी कड़े पहरे लगा दिए हैं। आम दिनों में सड़क मार्ग से सीमा पार करने के लिए इस्तेमाल होने वाले कुल 35 रास्तों में से 28 को पूरी तरह से सील कर दिया गया है, और आपातकालीन जांच के बाद अब केवल 7 रास्तों को ही यातायात के लिए सीमित रूप से खुला रखा गया है।