US-Iran 14-Point Peace Agreement: आ गया अमेरिका-ईरान महाडील का वो ’14-पॉइंट’ ड्राफ्ट, जिसने दुनिया को दी बड़ी राहत; पढ़ें एक-एक शर्त

मिडिल ईस्ट (Middle East) में पिछले तीन महीनों से जारी भीषण और विनाशकारी युद्ध के खात्मे की दिशा में एक ऐतिहासिक और युगांतरकारी सफलता मिली है। अमेरिका और ईरान के बीच शांति स्थापना के लिए एक शुरुआती समझौता (US-Iran Peace Framework) आखिरकार फाइनल हो गया है। इस महाडील का मुख्य मकसद तीन महीने से अधिक समय से चल रहे खूनी संघर्ष को तुरंत रोकना, पूरी दुनिया की लाइफलाइन माने जाने वाले रणनीतिक 'होर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) को फिर से खोलना और तेहरान के विवादित परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत का एक नया दौर शुरू करना है।
वॉशिंगटन और तेहरान के शीर्ष अधिकारियों द्वारा इस शांति समझौते की पुष्टि कर दी गई है। आगामी 19 जून 2026 को स्विट्जरलैंड की धरती पर दोनों देशों के प्रतिनिधि इस मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (MoU) पर औपचारिक और आधिकारिक रूप से हस्ताक्षर करेंगे। हालांकि, इस ऐतिहासिक डील का पूरा मूल पाठ (Text) अभी तक सार्वजनिक नहीं किया गया है, लेकिन ईरान की अर्ध-सरकारी 'मेहर न्यूज एजेंसी' ने ईरान की शीर्ष नेगोशिएशन टीम के करीबी सूत्रों के हवाले से उस 14-पॉइंट वाले ड्राफ्ट समझौते को लीक कर दिया है, जो इस वैश्विक कामयाबी का असली आधार बना है।
होर्मुज जलडमरूमध्य अब रहेगा पूरी तरह 'टोल-फ्री'
अमेरिकी न्यूज चैनल 'फॉक्स न्यूज' (Fox News) ने व्हाइट हाउस के सूत्रों के हवाले से अपनी विशेष रिपोर्ट में बताया है कि इस समझौते के तहत ईरान उस रणनीतिक जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को पूरी तरह खोल देगा, जहां से गुजरने वाले किसी भी देश के व्यापारिक या तेल के जहाजों से अब कोई 'टोल' (Toll) नहीं वसूला जाएगा। अमेरिकी प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने पुष्टि की है कि जैसे ही ईरान इस जलमार्ग को व्यापार के लिए पूरी तरह री-ओपन करेगा, वैसे ही अमेरिकी नौसेना ईरानी बंदरगाहों से अपनी सख्त नाकेबंदी हटा लेगी और इसके तुरंत बाद समुद्र में बिछाई गई बारूदी सुरंगों (Naval Mines) को हटाने का संयुक्त अभियान शुरू होगा।
इससे पहले, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा था कि ईरान और ओमान जल्द ही होर्मुज जलडमरूमध्य में शिपिंग मैनेजमेंट को लेकर एक संयुक्त बयान जारी करेंगे। उन्होंने साफ किया कि हालांकि टोल लेने के बारे में कोई आधिकारिक बात नहीं हुई है, लेकिन जहाजों को दी जाने वाली नौसैनिक और तकनीकी सेवाओं के लिए बुनियादी शुल्क (Service Fees) लिए जाने की उम्मीद जरूर है।
युद्धविराम और संप्रभुता का सम्मान है समझौते का केंद्र
इस लीक हुए ड्राफ्ट के मुताबिक, समझौते की सबसे पहली और अनिवार्य शर्त यह है कि लेबनान सहित मिडिल ईस्ट के सभी मोर्चों पर जारी सैन्य युद्ध को तत्काल और स्थायी रूप से समाप्त किया जाए। इस डील में अमेरिका का यह बड़ा और लिखित वादा भी शामिल है कि वह भविष्य में ईरान की क्षेत्रीय संप्रभुता (Sovereignty) का पूरा सम्मान करेगा और उसके किसी भी आंतरिक राजनीतिक मामलों में किसी भी तरह का दखल नहीं देगा।
यह पूरा पीस फ्रेमवर्क उस भयंकर सैन्य संघर्ष के बाद आया है जिसमें दोनों तरफ के हजारों बेकसूर लोग मारे गए हैं, जिनमें से सबसे ज्यादा हताहत ईरान और लेबनान के नागरिक हुए थे। इस युद्ध के दौरान ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को प्रभावी ढंग से ब्लॉक कर दिया था, जिसके जवाब में अमेरिकी नौसेना ने ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी कर दी थी। इस तनातनी से वैश्विक स्तर पर ऊर्जा का एक बड़ा संकट (Global Energy Crisis) पैदा हो गया था और पूरी दुनिया में कच्चे तेल व गैस की कीमतें आसमान छूने लगी थीं।
जानिए अमेरिका-ईरान शांति समझौते के वो '14 प्रमुख पॉइंट्स'
मेहर न्यूज एजेंसी द्वारा लीक किए गए ड्राफ्ट फ्रेमवर्क के अनुसार, आगामी शुक्रवार को होने वाले समझौते की 14 प्रमुख शर्तें और बिंदु इस प्रकार हैं:
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तत्काल युद्धविराम: लेबनान सहित मिडिल ईस्ट के सभी मोर्चों पर जारी सैन्य अभियानों और युद्ध को हमेशा के लिए और तुरंत खत्म करना।
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संप्रभुता का सम्मान: ईरान के अंदरूनी और घरेलू मामलों में किसी भी तरह का दखल न देने और ईरान की संप्रभुता का सम्मान करने का अमेरिका का लिखित वादा।
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नाकेबंदी की समाप्ति: अगले 30 दिनों के भीतर ईरान के बंदरगाहों पर की गई अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी को पूरी तरह से हटाया जाएगा।
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अमेरिकी सेना की वापसी: ईरान की सीमाओं और उसके आसपास रणनीतिक रूप से तैनात अमेरिकी सेना और युद्धपोतों को वापस बुलाने का अमेरिका का वादा।
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होर्मुज स्ट्रेट का खुलना: ईरानी सुरक्षा व्यवस्था और प्रबंधन के तहत आगामी 30 दिनों के भीतर होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को अंतरराष्ट्रीय शिपिंग के लिए फिर से खोलना।
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प्रतिबंधों पर रोक: ईरानी कच्चे तेल, गैस और पेट्रोकेमिकल उत्पादों की वैश्विक बिक्री पर लगे सख्त आर्थिक प्रतिबंधों को रोकना और तेहरान की अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संसाधनों (बैंकिंग सिस्टम) तक पहुंच बहाल करना।
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$300 अरब का पुनर्निर्माण फंड: युद्ध से प्रभावित क्षेत्रों के लिए अमेरिका और उसके पश्चिमी सहयोगियों द्वारा कम से कम 300 अरब डॉलर (करीब ₹25 लाख करोड़) की एक व्यापक पुनर्निर्माण योजना (Reconstruction Plan) पेश करना।
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60 दिनों का डायलॉग पीरियड: ईरान के परमाणु मुद्दे और उस पर लगी तमाम अंतरराष्ट्रीय पाबंदियों को स्थायी रूप से हटाने के अंतिम समझौते तक पहुंचने के लिए दोनों देशों के बीच 60 दिनों की कूटनीतिक बातचीत की अवधि तय होना।
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परमाणु हथियार न बनाने का संकल्प: परमाणु हथियार न बनाने की वैश्विक 'परमाणु अप्रसार संधि' (NPT) के तहत ईरान द्वारा अपनी पुरानी अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं और नियमों को फिर से दोहराना।
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सख्त यथास्थिति (Status Quo): इस 60 दिनों की बातचीत की अवधि के दौरान अमेरिका द्वारा मिडिल ईस्ट क्षेत्र में अतिरिक्त सेना तैनात न करने या ईरान पर कोई भी नया आर्थिक प्रतिबंध न लगाने का वादा।
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$24 अरब के फ्रीज फंड की रिहाई: विभिन्न विदेशी बैंकों में रुके और जब्त पड़े ईरान के 24 अरब डॉलर (लगभग ₹2 लाख करोड़) को जारी करना, जिसमें से आधी रकम (12 अरब डॉलर) मुख्य बातचीत शुरू होने से पहले ही ईरान को उपलब्ध कराई जाएगी।
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निगरानी तंत्र (Monitoring System): इस पूरे शांति समझौते और इसकी शर्तों के कार्यान्वयन की बारीकी से जांच करने के लिए एक उच्च स्तरीय अंतरराष्ट्रीय संयुक्त निगरानी तंत्र की स्थापना की जाएगी।
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UNSC की मुहर: दोनों देशों के बीच होने वाले इस अंतिम शांति समझौते की पुष्टि और प्रमाणन संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के एक विशेष प्रस्ताव के माध्यम से किया जाएगा।
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अंतिम वार्ता की पूर्व-शर्त: ईरान के रुके हुए फंड का पहला आधा हिस्सा जारी होने, तेल प्रतिबंधों को रोकने और अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी पूरी तरह हटने के बाद ही अंतिम दौर की मुख्य कूटनीतिक बातचीत शुरू होगी।