Re-NEET 2026: नीट परीक्षा से पहले टेलीग्राम बैन पर छिड़ा विवाद, IIT कानपुर के डायरेक्टर से भिड़े दो युवा छात्र

देश में 21 जून 2026 को होने जा रही नीट पुन:परीक्षा (Re-NEET) से ठीक पहले सरकार ने सोशल मीडिया और माइक्रो मैसेजिंग प्लेटफॉर्म टेलीग्राम (Telegram) पर अस्थायी प्रतिबंध लगाने का निर्देश दिया है। पेपर लीक की अफवाहों और संदिग्ध गतिविधियों को रोकने के लिए सरकार ने 30 जून 2026 तक टेलीग्राम के कामकाज को भारत में प्रतिबंधित रखने का फैसला किया है। इस बड़े फैसले के बाद इंटरनेट पर एक नई बहस छिड़ गई है।
आईआईटी कानपुर (IIT Kanpur) के निदेशक मनींद्र अग्रवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर पोस्ट कर सरकार के इस फैसले को सही ठहराया। लेकिन उनकी इस पोस्ट के बाद सीबीएसई ओएसएम (OSM) पोर्टल से जुड़े खुलासों से चर्चा में आए दो बेहद होनहार और टेक-सैवी छात्रों—सार्थक सिद्धांत और निसर्ग अधिकारी—ने सीधे आईआईटी निदेशक के दावों को चुनौती दे दी।
'बिना निशान छोड़े एडिट हो जाता है मैसेज'— IIT कानपुर के डायरेक्टर का दावा
आईआईटी कानपुर के डायरेक्टर मनिंद्र अग्रवाल ने सरकार की कार्रवाई और एनटीए (NTA) के बयानों का बचाव करते हुए एक तकनीकी तर्क सामने रखा। उन्होंने लिखा कि टेलीग्राम का मैसेज-एडिटिंग फीचर धोखेबाजों को बड़ी चालाकी से फर्जी सबूत गढ़ने की आजादी देता है। उनके मुताबिक, जालसाज परीक्षा खत्म होने के बाद अपनी पुरानी पोस्ट को एडिट कर देते हैं और उसे इस तरह पेश करते हैं जैसे प्रश्न पत्र परीक्षा से पहले ही लीक हो गया था।
अग्रवाल ने तर्क दिया, "टेलीग्राम चैनलों के साथ असली समस्या सिर्फ लीक हुए पेपर को शेयर करना नहीं है, बल्कि इसका इस्तेमाल पेपर लीक की ऐसी फर्जी खबरें फैलाने के लिए किया जा सकता है जो बिल्कुल असली लगती हैं। टेलीग्राम किसी भी यूजर को बिना कोई निशान छोड़े कंटेंट को बदलने (फेक लीक करने) की अनुमति देता है।"
व्हिसलब्लोअर सार्थक और निसर्ग ने खोली पोल, दिखाया 'म्याऊं म्याऊं' मैसेज का सबूत
मनिंद्र अग्रवाल के इस दावे को कई टेक्नोलॉजी प्रोफेशनल्स, डेवलपर्स और एंटरप्रेन्योर्स ने सिरे से खारिज कर दिया। हाल ही में सीबीएसई पोर्टल विवाद के दौरान सुर्खियों में आए टीन व्हिसलब्लोअर सार्थक सिद्धांत और निसर्ग अधिकारी ने आईआईटी डायरेक्टर के दावों की लाइव फैक्ट-चेकिंग कर दी।
सार्थक सिद्धांत ने टेलीग्राम के कामकाज को समझाने के लिए एक अनोखा तरीका अपनाया। उन्होंने एक स्क्रीनशॉट शेयर किया जिसमें एक टेलीग्राम मैसेज "म्याऊं म्याऊं" लिखा हुआ था। इस मैसेज के ठीक बगल में एक 'Edited' मार्कर और उसका सटीक टाइमस्टैम्प (बदलाव का समय) साफ दिखाई दे रहा था। सार्थक ने इसे सबूत के तौर पर पेश करते हुए डायरेक्टर से पूछा, "जब टेलीग्राम पर हर एडिटेड मैसेज के साथ साफ तौर पर टाइमस्टैम्प दिखता है, तो यह कहना कैसे सही है कि कोई निशान नहीं छूटता?" जब अग्रवाल ने पूछा कि क्या पीडीएफ फाइल को बिना तारीख बदले एडिट किया जा सकता है, तो सार्थक ने एक और स्क्रीनशॉट शेयर कर दिखाया कि फाइल बदलने पर भी 'Edited' का लेबल वहां मौजूद रहता है।
'टेलीग्राम को पूरी तरह ब्लॉक करना नामुमकिन'.. निसर्ग ने गिनाईं खामियां
इस बहस में आगे कूदते हुए टेक डेवलपर निसर्ग अधिकारी ने टेलीग्राम पर लगाए गए इस बैन को तकनीकी रूप से बेअसर और बेतुका बताया। दिलचस्प बात यह है कि निसर्ग को कुछ समय पहले खुद आईआईटी कानपुर की तरफ से एक बड़ा रोल ऑफर किया गया था। निसर्ग ने तंज कसते हुए लिखा:
"पेपर लीक को रोक नहीं सकते > आखिर में टेलीग्राम को ब्लॉक कर देते हैं"
निसर्ग ने समझाया कि टेलीग्राम को इस तरह से कोड किया गया है कि इसे पूरी तरह ब्लॉक करना नामुमकिन है। इसके ओपन-सोर्स कोडबेस के कारण लोग आसानी से प्रॉक्सी (Proxy) और वीपीएन (VPN) जैसे विकल्पों का इस्तेमाल करके इसे एक्सेस कर सकते हैं। उन्होंने आगे कहा कि टेलीग्राम का एडिट टाइमस्टैम्प फंक्शन पब्लिकली दिखाई देता है और कोई भी इसे आसानी से वेरिफाई कर सकता है।
बैन पर उठे गंभीर सवाल: क्या व्हाट्सएप और प्रेस को भी बंद कर देंगे?
सार्थक सिद्धांत ने इस बैन के पीछे की मंशा पर सीधे सवाल उठाते हुए पूछा, "सिर्फ इसलिए कि एक कम्युनिकेशन मीडियम में गलत जानकारी या अफवाहें हैं, हमने उसे सीधे बंद करने का फैसला कर लिया? आईआईटी कानपुर के डायरेक्टर साहब, क्या व्हाट्सएप पर गलत जानकारी नहीं फैलती? क्या भारतीय प्रेस (मीडिया) में गलत खबरें नहीं आतीं? फिर पूरे टेलीग्राम को बंद करने के पीछे क्या तुक है?"
छात्रों का साफ कहना था कि अफवाहों या गलत जानकारी का कोई एक स्रोत नहीं होता और सरकार इस तरह हर डिजिटल माध्यम को बंद नहीं कर सकती। दो युवा छात्रों और देश के एक प्रतिष्ठित संस्थान के निदेशक के बीच चली यह तीखी तकनीकी बहस इस समय सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रही है।