विदेश

खामेनेई ने दी अमेरिका से सीधी बात को मंजूरी, उधर बाइडेन प्रशासन ने इजरायल को लताड़ा, ईरान की नाकेबंदी खत्म

पश्चिम एशिया के अशांत और तनावपूर्ण माहौल के बीच वैश्विक कूटनीति के पन्नों पर एक नया और ऐतिहासिक अध्याय जुड़ने जा रहा है। सालों की घोर कड़वाहट, कड़े आर्थिक प्रतिबंधों और युद्ध जैसी स्थितियों के बाद आखिरकार ईरान और अमेरिका के रिश्तों में जमी बर्फ पिघलती नजर आ रही है। ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने वाशिंगटन के साथ सीधे बातचीत करने को अपनी आधिकारिक मंजूरी दे दी है। इस अप्रत्याशित फैसले के तुरंत बाद, अमेरिकी प्रशासन ने गाजा और लेबनान के मोर्चे पर इजरायल के आक्रामक रुख को लेकर उसे कड़ी लताड़ लगाई है। इस त्रिकोणीय घटनाक्रम ने ईरान के चारों तरफ की गई वैश्विक और आर्थिक नाकेबंदी को लगभग समाप्त कर दिया है, जिससे पूरी दुनिया के बाजार और समीकरण बदलने वाले हैं।

खामेनेई का यू-टर्न: अमेरिका से सीधे संवाद को क्यों मिली हरी झंडी?

ईरान के भीतर गहराते आर्थिक संकट और अंतरराष्ट्रीय दबाव के बीच सर्वोच्च नेता खामेनेई का यह फैसला बेहद रणनीतिक माना जा रहा है। अब तक अमेरिका को 'बड़ा शैतान' बताने वाला ईरान अपनी चरमराई अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने और तेल निर्यात पर लगे कड़े प्रतिबंधों को हटवाने के लिए सीधे बातचीत की मेज पर आने को मजबूर हुआ है। तेहरान के राजनयिक सूत्रों के अनुसार, इस बातचीत का मुख्य एजेंडा परमाणु समझौते (JCPOA) को नए स्वरूप में बहाल करना और मध्य पूर्व में जारी तनाव को कम करना है। इस फैसले से ईरान के नए राष्ट्रपति को पश्चिमी देशों के साथ डील करने की खुली छूट मिल गई है।

अमेरिका की इजरायल को दोटूक: अब मनमानी नहीं चलेगी

इस पूरे घटनाक्रम का सबसे दिलचस्प पहलू अमेरिका का बदला हुआ रुख है। वाशिंगटन ने इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को कड़े शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा है कि वे क्षेत्रीय शांति को खतरे में डालने वाले कदम तुरंत रोकें। अमेरिका की इस अप्रत्याशित फटकार को ईरान के साथ होने जा रही महाडील की बैकग्राउंड स्क्रिप्ट माना जा रहा है। अमेरिका अच्छी तरह जानता है कि अगर ईरान के साथ कूटनीतिक रास्ता खोलना है, तो इजरायल की आक्रामकता पर लगाम कसना बेहद जरूरी है। यही वजह है कि अमेरिका ने इजरायल को दी जाने वाली कुछ विशेष सैन्य सहायताओं की समीक्षा करने तक की बात कह दी है।

खत्म हुई ईरान की नाकेबंदी: ग्लोबल मार्केट और भारत पर क्या होगा असर?

ईरान की नाकेबंदी खत्म होने और कूटनीतिक रास्ते बहाल होने का सबसे बड़ा और सीधा असर वैश्विक तेल बाजार (Global Crude Oil Market) पर पड़ने वाला है। अगर ईरान का कच्चा तेल अंतरराष्ट्रीय बाजार में बिना किसी रुकावट के दोबारा भारी मात्रा में आने लगता है, तो कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट देखने को मिल सकती है। भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए यह खबर किसी बड़ी राहत से कम नहीं है, क्योंकि नई दिल्ली को एक बार फिर ईरान से सस्ते दामों पर तेल खरीदने का मौका मिल सकता है। इसके साथ ही, चाबहार पोर्ट प्रोजेक्ट (Chabahar Port) जैसी भारतीय परियोजनाओं को भी इस बदले हुए भू-राजनीतिक माहौल में जबरदस्त रफ्तार मिलने की उम्मीद है।

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