US-Iran Ceasefire Over: ट्रंप के एक बयान से टूटा सोने का गुरूर, इंटरनेशनल मार्केट से लेकर MCX तक सोने की कीमतों में भारी गिरावट

वैश्विक भू-राजनीतिक (Geopolitical) परिदृश्य में आए एक अचानक और बड़े भूचाल ने भारत सहित दुनिया भर के वित्तीय और कमोडिटी बाजारों को हिलाकर रख दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे अंतरिम शांति समझौते (Ceasefire Deal) को 'पूरी तरह खत्म' बताने वाले बयान के बाद पश्चिम एशिया (West Asia) में युद्ध का तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण जलमार्ग 'स्ट्रैट ऑफ हॉर्मुज' (Strait of Hormuz) में दोनों देशों के बीच ताजा सैन्य झड़पों के बाद कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में 5% से अधिक का तेज उछाल आया है। तेल महंगा होने से वैश्विक स्तर पर महंगाई (Inflation) बढ़ने की आशंका गहरा गई है, जिसके चलते निवेशकों ने सुरक्षित निवेश माने जाने वाले सोने में भारी मुनाफावसूली (Profit Booking) शुरू कर दी है। इसके परिणामस्वरूप अंतरराष्ट्रीय और भारतीय वायदा बाजार (MCX) दोनों जगह सोने की कीमतों में भारी गिरावट दर्ज की गई है।
इंटरनेशनल मार्केट में स्पॉट और फ्यूचर्स गोल्ड औंधे मुंह गिरे
अमेरिकी राष्ट्रपति के इस कड़े बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय सर्राफा बाजार में बुधवार को सोने की कीमतों में तेज बिकवाली देखी गई।
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स्पॉट गोल्ड (Spot Gold): अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाजिर सोना 1.2% की बड़ी गिरावट के साथ 4,057.09 डॉलर प्रति औंस पर आ गया।
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कॉमेक्स गोल्ड फ्यूचर्स (Comex Gold): अमेरिकी वायदा बाजार में अगस्त डिलीवरी वाला सोना 94.69 डॉलर (2.28%) की भारी टूट के साथ 4,062.71 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार करता दिखा।
इसके चलते लंदन और वैश्विक बाजारों में कीमती धातुओं का खनन करने वाली बड़ी कंपनियों (Miners) के शेयरों में भी 4% से लेकर 8% तक की भारी गिरावट दर्ज की गई।
भारतीय वायदा बाजार (MCX) में सोना ₹2,308 टूटा
वैश्विक बाजारों से मिले कमजोर और निराशाजनक संकेतों के कारण भारतीय घरेलू वायदा बाजार में भी सोने के भाव बुरी तरह क्रैश हो गए। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर अगस्त डिलीवरी वाला सोना 2,308 रुपये (1.59%) की बड़ी गिरावट के साथ 1,43,084 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर आ गया। बाजार में मचे इस भारी हड़कंप के बीच बुधवार के सत्र के दौरान रिकॉर्ड 10,440 लॉट का भारी-भरकम कमोडिटी कारोबार दर्ज किया गया।
क्यों बढ़ रहा है सोने पर दबाव? समझिए बाजार का गणित
आमतौर पर जब भी दुनिया में युद्ध या तनाव के हालात बनते हैं, तो सोने की कीमतें बढ़ती हैं क्योंकि इसे सबसे सुरक्षित निवेश (Safe-Haven Asset) माना जाता है। लेकिन इस बार बाजार का गणित थोड़ा अलग काम कर रहा है:
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कच्चे तेल में उछाल और महंगाई: पश्चिम एशिया संकट के चलते ब्रेंट क्रूड और डब्ल्यूटीआई (WTI) कच्चे तेल के दाम अचानक 5% से ज्यादा बढ़ गए हैं। कच्चे तेल की यह तेजी दुनिया भर में महंगाई को दोबारा हवा दे सकती है।
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फेडरल रिजर्व पर ब्याज दरें बढ़ाने का दबाव: यदि ऊर्जा की बढ़ती कीमतों के कारण महंगाई बढ़ती है, तो अमेरिकी केंद्रीय बैंक 'फेडरल रिजर्व' (US Federal Reserve) पर ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचा रखने या उनमें दोबारा बढ़ोतरी करने का दबाव बढ़ जाएगा।
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मजबूत डॉलर का दबाव: ब्याज दरें बढ़ने की उम्मीद और वैश्विक अनिश्चितता के बीच अमेरिकी डॉलर इंडेक्स (US Dollar Index) को भारी मजबूती मिली है। चूंकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने का व्यापार डॉलर में होता है, इसलिए मजबूत डॉलर और ऊंची ब्याज दरें गैर-ब्याज देने वाली संपत्ति जैसे सोने की मांग को कमजोर कर देती हैं। यही वजह है कि निवेशकों ने सोने से पैसा निकालकर डॉलर और अन्य संपत्तियों में लगाना शुरू कर दिया है।
एक्सपर्ट्स की राय: एक बेहद अहम मोड़ पर खड़ा है सोना
विदेशी ब्रोकरेज फर्म FXTM के मार्केट रिसर्च प्रमुख लुकमैन ओटुनुगा (Lukman Otunuga) के मुताबिक, वैश्विक बाजार में सोना फिलहाल एक बेहद नाजुक और अहम मोड़ पर खड़ा है। पश्चिम एशिया का जियो-पॉलिटिकल तनाव निश्चित रूप से सुरक्षित निवेश के रूप में सोने को एक बुनियादी सपोर्ट दे रहा है, लेकिन अगर कच्चे तेल की कीमतों में आई यह तेजी महंगाई को बढ़ाती है और अमेरिकी फेड की ओर से सख्त मौद्रिक नीति के संकेत मिलते हैं, तो आने वाले दिनों में भी सोने की कीमतों पर यह दबाव और गिरावट का सिलसिला जारी रह सकता है। ट्रेडर्स की नजरें अब अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों और फेडरल रिजर्व की आगामी बैठकों के मिनट्स पर टिकी हैं।