भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन: किराया सिर्फ ₹5, जापान-इंग्लैंड से भी सस्ता सफर

भारत ने हरित ऊर्जा की दिशा में एक ऐतिहासिक छलांग लगाई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हरियाणा के जींद से देश की पहली स्वदेशी हाइड्रोजन ट्रेन (Hydrogen Train) को हरी झंडी दिखा दी है। यह ट्रेन न केवल पर्यावरण के अनुकूल है, बल्कि इसका किराया भी बेहद किफायती है, जो इसे दुनिया के अन्य विकसित देशों की तुलना में काफी सस्ता बनाता है।
बेहद सस्ता सफर, प्लेटफॉर्म टिकट से भी कम किराया
इस ट्रेन की सबसे बड़ी खासियत इसका किराया है। जींद-सोनीपत रूट पर चलने वाली इस ट्रेन का न्यूनतम किराया महज ₹5 रखा गया है, जो अधिकतम ₹25 तक जाता है। दिलचस्प बात यह है कि यह किराया कई रेलवे स्टेशनों पर मिलने वाले प्लेटफॉर्म टिकट से भी सस्ता है। रेलवे का उद्देश्य आम यात्रियों पर आर्थिक बोझ डाले बिना उन्हें अत्याधुनिक और प्रदूषण मुक्त यात्रा का अनुभव कराना है। स्टेशन के अनुसार किराया सूची इस प्रकार है:
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जींद सिटी से पांडु पिंडारा: ₹5
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जींद से भंभेवा: ₹10
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जींद से गोहाना: ₹15
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जींद से मोहाना: ₹20
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जींद से सोनीपत (पूरा सफर): ₹25
जापान और इंग्लैंड से क्यों है बेहतर?
हाइड्रोजन ट्रेन तकनीक का उपयोग पहले से ही जर्मनी, इंग्लैंड, फ्रांस, इटली और अमेरिका जैसे देशों में किया जा रहा है। भारत ने भी अब इस 'हाइड्रोजन क्लब' में अपनी जगह बना ली है। भारतीय रेलवे की यह स्वदेशी ट्रेन न केवल तकनीकी रूप से सक्षम है, बल्कि इसकी परिचालन लागत और यात्री किराया वैश्विक मानकों की तुलना में काफी कम है। जहां विकसित देशों में हाइड्रोजन ट्रेन की यात्रा काफी महंगी हो सकती है, वहीं भारत ने इसे 'आम आदमी की पहुंच' के भीतर रखा है।
कैसे काम करती है यह 'ग्रीन ट्रेन'?
यह ट्रेन 1,200 किलोवाट क्षमता वाले प्रोटॉन एक्सचेंज मेम्ब्रेन (PEM) फ्यूल सेल सिस्टम से लैस है। यह हाइड्रोजन और ऑक्सीजन की रासायनिक प्रक्रिया से बिजली बनाती है, जिससे ट्रेन चलती है और उत्सर्जन के नाम पर केवल पानी की भाप निकलती है। 10 कोच वाली इस ट्रेन में एक साथ लगभग 2,600 यात्री सफर कर सकते हैं। इसकी रफ्तार 75 किमी प्रति घंटा है, जिसे 110 किमी प्रति घंटा तक बढ़ाया जा सकता है।
सुरक्षा के कड़े इंतजाम
यात्रियों की सुरक्षा के लिए ट्रेन में हाइड्रोजन लीक डिटेक्टर, फ्लेम डिटेक्टर और धुआं व तापमान की निगरानी करने वाले हाई-टेक सेंसर लगे हैं। किसी भी असामान्य स्थिति में हाइड्रोजन सप्लाई खुद-ब-खुद बंद हो जाती है, जिससे यह यात्रा पूरी तरह सुरक्षित है। यह न केवल डीजल ट्रेनों पर निर्भरता कम करेगी, बल्कि 'आत्मनिर्भर भारत' और 'विकसित भारत' के संकल्प को और मजबूती देगी।