3 साल में 25% ग्रोथ का टारगेट! ग्रामीण भारत में असुरक्षित लोन की बाढ़ लाने की तैयारी में पीरामल फाइनेंस

देश की दिग्गज गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी (NBFC) पीरामल कैपिटल एंड हाउसिंग फाइनेंस, जिसे आमतौर पर पीरामल फाइनेंस के नाम से जाना जाता है, ने अपने बिजनेस विस्तार के लिए एक आक्रामक ब्लूप्रिंट तैयार किया है। कंपनी ने अगले तीन वर्षों के भीतर अपने असुरक्षित ऋण (Unsecured Loan) कारोबार को 25 प्रतिशत तक बढ़ाने का एक महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है। पीरामल फाइनेंस का यह कदम भारतीय क्रेडिट मार्केट में अपनी हिस्सेदारी को मजबूत करने और टियर-2, टियर-3 शहरों के साथ-साथ ग्रामीण बाजारों में वित्तीय सेवाओं की पहुंच को और अधिक गहरा करने की रणनीति का हिस्सा है।
ग्रामीण और अर्ध-शहरी भारत पर केंद्रित है कंपनी की बड़ी रणनीति
पीरामल फाइनेंस का मुख्य ध्यान इस बार देश के उन हिस्सों पर है, जहां पारंपरिक बैंकिंग सेवाएं अब भी पूरी तरह नहीं पहुंच पाई हैं। कंपनी लखनऊ, इंदौर, जयपुर, पटना और कोयंबटूर जैसे उभरते हुए शहरों और उनसे जुड़े ग्रामीण इलाकों में अपनी पैठ मजबूत कर रही है। ग्रामीण बाजारों में छोटे व्यापारियों, स्वरोजगार करने वाले लोगों (Self-Employed) और वेतनभोगी वर्ग को बिना किसी सिक्योरिटी या कोलेटरल के आसान लोन मुहैया कराना इस योजना का सबसे बड़ा हिस्सा है। जानकारों के मुताबिक, ग्रामीण अर्थव्यवस्था में आ रहे सुधार और डिजिटल ट्रांजैक्शंस में हुई बढ़ोतरी को देखते हुए कंपनी को इस सेगमेंट में लोन डिफॉल्ट का जोखिम कम और ग्रोथ की संभावनाएं ज्यादा नजर आ रही हैं।
रिस्क मैनेजमेंट और एआई टेक्नोलॉजी का होगा तगड़ा इस्तेमाल
असुरक्षित ऋण यानी पर्सनल लोन और बिजनेस लोन में जोखिम हमेशा ज्यादा होता है। इस जोखिम को नियंत्रित करने के लिए पीरामल फाइनेंस आधुनिक जनरेटिव एआई (Generative AI) और एडवांस्ड डेटा एनालिटिक्स टूल्स का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल कर रही है। इसके जरिए कंपनी ग्रामीण इलाकों के ग्राहकों के क्रेडिट स्कोर और रीपेमेंट क्षमता का सटीक आकलन कर सकेगी, भले ही उनके पास कोई मजबूत क्रेडिट हिस्ट्री न हो। कंपनी के इस तकनीकी अपग्रेडेशन से लोन अप्रूवल की प्रक्रिया न सिर्फ तेज होगी, बल्कि बैड लोंस यानी एनपीए (NPA) के खतरे को भी न्यूनतम स्तर पर रखा जा सकेगा।
क्या आम ग्राहकों को लोन मिलना अब हो जाएगा और आसान?
कंपनी के इस रणनीतिक फैसले का सीधा फायदा उन आम ग्राहकों और छोटे उद्यमियों को मिलेगा, जिन्हें अपनी तात्कालिक जरूरतों या बिजनेस विस्तार के लिए तुरंत फंड की आवश्यकता होती है। अगले तीन साल में 25 फीसदी की यह लक्षित बढ़ोतरी बाजार में नकदी के प्रवाह को बढ़ाएगी। वित्तीय विश्लेषकों का मानना है कि पीरामल फाइनेंस की यह पहल ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में वित्तीय समावेशन (Financial Inclusion) को एक नई दिशा देगी, जिससे न केवल कंपनी के एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) में रिकॉर्ड बढ़ोतरी होगी, बल्कि स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियों को भी भारी रफ्तार मिलेगी।