एजुकेशन

NEET में शानदार 680 अंक और एम्स (AIIMS) में एमबीबीएस की सीट मिलने के बाद भी ठुकरा दिया था ऑफर

करियर की शुरुआत में जब देश के सबसे प्रतिष्ठित मेडिकल संस्थानों के दरवाजे आपके लिए खुले हों और एम्स जैसे सुपर-स्पेशलिटी अस्पताल में डॉक्टर बनने का सुनहरा मौका सामने हो, तो अमूमन हर कोई बिना सोचे-समझे उसे अपना लेता है। लेकिन कुछ जज्बे ऐसे होते हैं जो सुख-सुविधाओं और चकाचौंध से परे देश की रक्षा और वर्दी के सम्मान को प्राथमिकता देते हैं। कुछ ऐसी ही प्रेरणादायक और दिल को छू लेने वाली कहानी इन दिनों चिकित्सा जगत और सोशल मीडिया पर चर्चा का केंद्र बनी हुई है, जहां एक मेधावी छात्रा ने नीट परीक्षा में 680 जैसे शानदार नंबर हासिल करने और एम्स की एमबीबीएस सीट का शानदार ऑफर मिलने के बावजूद उसे ठुकरा दिया। अपने अदम्य साहस और देश प्रेम के चलते इस होनहार बेटी ने भारतीय सेना का दामन थामा और आज सेना में लेफ्टिनेंट डॉक्टर बनकर पूरे देश का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया है। इस अनोखे और संघर्ष भरे सफर के बारे में आइए विस्तार से जानते हैं।

नीट में शानदार स्कोर और एम्स की सीट ठुकराने का कड़ा फैसला

जब मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट (NEET) के परिणाम सामने आए, तो इस होनहार छात्रा ने 720 में से 680 अंक हासिल करके अपनी असाधारण प्रतिभा का लोहा मनवाया था। इस बेहतरीन स्कोर के आधार पर देश के शीर्ष चिकित्सा संस्थान यानी एम्स (AIIMS) में एमबीबीएस पाठ्यक्रम के लिए उनका चयन पक्का था और उन्हें सीट का ऑफर मिल रहा था। हर सामान्य छात्र के लिए यह किसी सपने के सच होने जैसा होता है, क्योंकि एम्स से डिग्री लेना डॉक्टर बनने के सफर का सबसे बड़ा मुकाम माना जाता है। लेकिन इस छात्रा के मन में कुछ और ही ख्वाब पल रहे थे। उसने एम्स की इस आरामदायक और प्रतिष्ठित सीट को स्वीकार करने के बजाय भारतीय सशस्त्र बलों (Armed Forces) की चिकित्सा सेवा में जाने का दृढ़ संकल्प लिया और इस बड़े ऑफर को हंसते-हंसते ठुकरा दिया।

वर्दी का जुनून और देश सेवा के जज्बे ने बदली दिशा

बचपन से ही देश की सेवा करने और भारतीय सेना के अनुशासन में जीने का सपना देखने वाली इस बेटी के लिए वर्दी का आकर्षण किसी भी अन्य सुख-सुविधा से कहीं बढ़कर था। सेना के अस्पतालों में सैनिकों और उनके परिवारों की सेवा करने का विचार उसके दिल में गहराई से बसा हुआ था। इसी मजबूत इच्छाशक्ति के बल पर उसने आर्म्ड फोर्सेज मेडिकल सर्विसेज (AFMS) के कड़े और चुनौतीपूर्ण चयन दौर को पार किया। अपने इसी अटूट दृढ़ निश्चय के दम पर उसने यह साबित कर दिया कि सफलता केवल बड़े संस्थानों की डिग्री हासिल करने में नहीं है, बल्कि उस मुकाम को पाने में है जो आपके भीतर देश के प्रति समर्पण की भावना को पूरा कर सके।

भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट डॉक्टर बनकर रचा इतिहास, युवाओं के लिए बनी मिसाल

कड़ी ट्रेनिंग, अनुशासन और चिकित्सा की उच्च शिक्षा को सफलतापूर्वक पूरा करने के बाद अब वह दिन आ ही गया जब इस होनहार बेटी ने भारतीय सेना में 'लेफ्टिनेंट डॉक्टर' के रूप में अपनी आधिकारिक सेवाएं शुरू कर दीं। उनके इस मुकाम तक पहुंचने की कहानी आज देश के लाखों युवाओं, विशेषकर उन बेटियों के लिए एक मिसाल बन गई है जो डॉक्टर बनकर समाज और देश की सेवा करना चाहती हैं। यह साबित करता है कि यदि आपके सपने स्पष्ट हैं और आपके इरादों में चट्टान जैसी मजबूती है, तो आप दुनिया के हर उस रास्ते को चुन सकते हैं जो आपको देश के प्रति अपने कर्तव्यों को निभाने का मौका देता है।

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