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वैश्विक शिपिंग इंडस्ट्री का पावरहाउस: जानिए क्यों दुनिया में फिलीपींस के बाद भारत ही है नाविकों का सबसे बड़ा टैलेंट हब

हाल ही में काला सागर के रूसी जल क्षेत्र में व्यावसायिक जहाजों 'एमवी ओमोरफी' (MV Omorfi) और 'एमवी गोल्‍डन लियो' (MV Golden Lion) पर हुए घातक हमलों ने पूरी दुनिया का ध्यान खींच लिया है। इन हादसों में भारतीय क्रू मेंबर्स की दुखद मौत के बाद भारत सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है। भारत ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित नहीं की गई, तो वैश्विक सप्लाई चेन पूरी तरह ठप हो सकती है।

इस घटना ने एक बार फिर साबित किया है कि दुनिया के समुद्री जहाजों को चलाने में भारत का योगदान कितना विशाल है। बाल्टिक एंड इंटरनेशनल मैरीटाइम काउंसिल (BIMCO) और इंटरनेशनल चैंबर ऑफ शिपिंग (ICS) की ताजी रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया भर के 25.65 लाख नाविकों में से 56% से अधिक हिस्सेदारी अकेले फिलीपींस, भारत, चीन, रूस और इंडोनेशिया की है। फिलीपींस के बाद भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा नाविक (Seafarers) सप्लायर देश है। आखिर वैश्विक शिपिंग इंडस्ट्री में भारतीय टैलेंट का ऐसा डंका क्यों बजता है? आइए इसके मुख्य कारणों को गहराई से समझते हैं।

1. विशाल तटरेखा और प्राचीन समुद्री परंपरा

भारत के पास लगभग 7,500 किलोमीटर से अधिक लंबी समृद्ध तटरेखा है। गुजरात, महाराष्ट्र, गोवा, केरल, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और पश्चिम बंगाल जैसे तटीय राज्यों का सदियों से समुद्र से गहरा व्यावसायिक व सामाजिक नाता रहा है। इन क्षेत्रों की पीढ़ियां मछली पालन, बंदरगाहों के काम और समुद्री व्यापार से जुड़ी रही हैं, जिससे यहां के युवाओं के भीतर समुद्र में काम करने का स्वाभाविक झुकाव और साहस देखने को मिलता है।

2. युवाओं का जोश और अंग्रेजी भाषा पर मजबूत पकड़

  • विशाल युवा आबादी: भारत की सबसे बड़ी ताकत उसकी युवा शक्ति है। कठिन परिस्थितियों, महीनों परिवार से दूर रहने और समुद्र की चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बावजूद अच्छी आय व अंतरराष्ट्रीय एक्सपोजर के कारण भारतीय युवा इस क्षेत्र को पहली पसंद मानते हैं।

  • कम्युनिकेशन में बढ़त: अंतरराष्ट्रीय जहाजों पर कैप्टन, मरीन इंजीनियर और क्रू मेंबर्स अलग-अलग देशों से होते हैं, जहां 'अंग्रेजी' ही संचार का एकमात्र माध्यम बनती है। भारतीय युवाओं की बेहतर अंग्रेजी समझ और संवाद क्षमता उन्हें अन्य गैर-अंग्रेजी भाषी देशों के नाविकों पर स्वाभाविक बढ़त दिलाती है।

3. मजबूत समुद्री शिक्षा और एडवांस्ड टेक्निकल स्किल्स

आधुनिक समुद्री जहाज अब केवल साधारण जहाजों तक सीमित नहीं हैं; वे एआई (AI), सैटेलाइट नेविगेशन, रडार सिस्टम, डिजिटल ऑटोमेशन और जटिल मरीन इंजीनियरिंग पर काम करते हैं।

भारत में मौजूद विश्वस्तरीय मैरीटाइम ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट युवाओं को केवल नेविगेशन और इंजन रखरखाव ही नहीं सिखाते, बल्कि आपातकालीन प्रबंधन, आग पर काबू पाने और जीवन रक्षा उपकरणों का कड़ा अंतरराष्ट्रीय मानक प्रशिक्षण देते हैं। यही वजह है कि मरीन इंजीनियर और इलेक्ट्रो-टेक्निकल ऑफिसर के रूप में भारतीय युवाओं की सबसे ज्यादा मांग रहती है।

4. अनुशासन और कैप्टन-लेवल लीडरशिप में बढ़ता दबदबा

समुद्र में हुई एक छोटी सी लापरवाही बड़े हादसे का कारण बन सकती है। भारतीय नाविक अपने कड़े अनुशासन, टीम भावना और विपरीत परिस्थितियों में शांत रहकर निर्णय लेने की क्षमता के लिए जाने जाते हैं।

एक समय था जब भारतीयों की पहचान केवल निचले स्तर के क्रू मेंबर्स तक सीमित थी, लेकिन आज भारतीय कैप्टन, चीफ इंजीनियर और डेक ऑफिसर वैश्विक जहाजों की कमान संभाल रहे हैं।

चुनौतियां और भविष्य की राह

भले ही भारत वैश्विक शिपिंग का सबसे बड़ा पावरहाउस बन रहा है, लेकिन अभी भी प्रशिक्षण की बढ़ती लागत, कुछ संस्थानों में गुणवत्ता का अभाव और लंबे समय तक घर से दूर रहने के कारण नाविकों के मानसिक स्वास्थ्य जैसी बड़ी चुनौतियां मौजूद हैं। इसके अलावा, जहाजों पर महिला नाविकों की भागीदारी बढ़ाना भी एक बड़ा लक्ष्य है।

यदि केंद्र सरकार और मरीन कंपनियां नाविकों की सुरक्षा, पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया और आधुनिक वेलफेयर पर ध्यान देती हैं, तो आने वाले वर्षों में भारत फिलीपींस को पछाड़कर दुनिया का नंबर-1 'मैरीटाइम टैलेंट हब' बनने की पूरी क्षमता रखता है।

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