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कश्मीर की खूबसूरती को किसकी नजर लगी? चीड़-चिनार की जगह कंक्रीट का जंगल, 90% होटल अवैध

अपनी प्राकृतिक सुंदरता, बर्फ से ढके पहाड़ों और चिनार के घने पेड़ों के लिए दुनिया भर में मशहूर कश्मीर अब एक गंभीर पर्यावरण संकट से जूझ रहा है। धरती का स्वर्ग कही जाने वाली यह घाटी तेजी से कंक्रीट के जंगल में बदलती जा रही है। एक ताजा रिपोर्ट और स्थानीय सर्वेक्षणों से यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि विकास और पर्यटन के नाम पर कश्मीर के जंगलों को बेदर्दी से काटा जा रहा है। सबसे ज्यादा चिंता की बात यह है कि पर्यटन स्थलों पर तेजी से बन रहे 90 प्रतिशत होटल और रिसॉर्ट पूरी तरह से अवैध हैं, जो घाटी के नाजुक इकोसिस्टम के लिए बड़ा खतरा बन गए हैं।

चीड़ और चिनार के पेड़ों पर चल रही कुल्हाड़ी, खत्म हो रही हरियाली

कश्मीर की पहचान माने जाने वाले सदियों पुराने चिनार और चीड़ (पाइन) के पेड़ अब तेजी से गायब हो रहे हैं। गुलमर्ग, पहलगाम और सोनमर्ग जैसे प्रमुख पर्यटन स्थलों के आसपास अंधाधुंध पेड़ों की कटाई हो रही है। पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि अगर जंगलों का कटान इसी रफ्तार से जारी रहा, तो घाटी का मौसम और भी असंतुलित हो जाएगा। पेड़ों की कमी के कारण भूस्खलन, मिट्टी का कटाव और प्राकृतिक जल स्रोतों के सूखने की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। स्थानीय लोगों का भी मानना है कि पेड़ों की कटाई से कश्मीर की असली खूबसूरती और ठंडक धीरे-धीरे खत्म हो रही है।

घाटी में 90% होटल अवैध, नियमों की उड़ रही हैं धज्जियां

जंगलों की इस बर्बादी के पीछे सबसे बड़ा कारण अनियंत्रित और अवैध निर्माण है। जांच और स्थानीय रिपोर्टों में यह बात सामने आई है कि घाटी के प्रमुख टूरिस्ट स्पॉट पर चल रहे लगभग 90 प्रतिशत होटल, गेस्ट हाउस और कमर्शियल इमारतें बिना किसी वैध अनुमति या पर्यावरण मानकों का पालन किए बनाई गई हैं। हरित क्षेत्रों (ग्रीन बेल्ट) और नदी-नालों के किनारों पर अवैध रूप से कंक्रीट की इमारतें खड़ी कर दी गई हैं। संबंधित विभागों की लापरवाही और मिलीभगत के चलते यह अवैध निर्माण लगातार बढ़ रहा है, जिससे कश्मीर का बुनियादी ढांचा बुरी तरह चरमरा रहा है।

पर्यटन और पर्यावरण के बीच असंतुलन, सख्त कार्रवाई की जरूरत

कश्मीर में पर्यटन स्थानीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ है, लेकिन पर्यावरण की कीमत पर किया जा रहा विकास घाटी के भविष्य के लिए घातक हो सकता है। जनशक्ति और संसाधनों पर जरूरत से ज्यादा दबाव पड़ने के कारण कचरा प्रबंधन और सीवेज की व्यवस्था भी फेल हो रही है। पर्यावरणविदों और जागरूक नागरिकों ने सरकार से मांग की है कि अवैध होटलों पर तुरंत सख्त कार्रवाई की जाए और पेड़ों की कटाई पर पूर्ण प्रतिबंध लगे। अगर समय रहते इस कंक्रीट के जंगल को नहीं रोका गया, तो आने वाली पीढ़ियों के लिए कश्मीर का प्राकृतिक स्वरूप केवल तस्वीरों में ही सिमट कर रह जाएगा।

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