भारत में हर मौत का मेडिकल सर्टिफिकेट (MCCD) क्यों है जरूरी? जानिए यह नियम कैसे बचा सकता है लाखों लोगों की जान

जब भी किसी का निधन होता है, तो कानूनी और कागजी कामों के लिए परिवार वाले डेथ सर्टिफिकेट बनवाते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इंसान की मौत असल में किस बीमारी या वजह से हुई, इसका सटीक मेडिकल रिकॉर्ड रखना कितना जरूरी है? भारत में अब स्वास्थ्य विशेषज्ञ 'मेडिकल सर्टिफिकेशन ऑफ कॉज ऑफ डेथ' यानी एमसीसीडी (MCCD) पर सबसे ज्यादा जोर दे रहे हैं। इसका मकसद सिर्फ कागजी खानापूर्ति करना नहीं है, बल्कि देश के हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत कर भविष्य में लाखों लोगों की जान बचाना है। आइए आसान भाषा में समझते हैं कि यह सर्टिफिकेट आम जनता और देश के लिए क्यों इतना अहम है।
क्या है MCCD और क्यों हो रही है इसकी चर्चा?
एमसीसीडी एक ऐसा आधिकारिक दस्तावेज है, जिसे एक रजिस्टर्ड डॉक्टर द्वारा प्रमाणित किया जाता है। इसमें साफ तौर पर दर्ज होता है कि व्यक्ति की मौत किस बीमारी, संक्रमण, हादसे या मेडिकल कंडीशन की वजह से हुई है। भारत के कई ग्रामीण और यहां तक कि शहरी इलाकों में भी आज मौत का सटीक कारण दर्ज नहीं हो पाता है। लोग सिर्फ नगर निगम या पंचायत से सामान्य डेथ सर्टिफिकेट बनवा लेते हैं, जिसमें मौत की असली वजह का कोई जिक्र नहीं होता। इसी बड़ी कमी को दूर करने के लिए हर मौत का मेडिकल सर्टिफिकेशन अनिवार्य करने की मांग उठ रही है।
सही आंकड़ा ही बनाएगा देश की बेहतर स्वास्थ्य नीतियां
शायद आप सोच रहे होंगे कि किसी के जाने के बाद मौत का कारण जानकर क्या फायदा? असल में, इसी बारीक डेटा से देश और राज्यों की स्वास्थ्य नीतियां (Health Policies) तय होती हैं। अगर सरकार और स्वास्थ्य मंत्रालय को पता ही नहीं होगा कि देश के किस हिस्से में हार्ट अटैक, कैंसर, डायबिटीज या किसी अज्ञात वायरस से सबसे ज्यादा मौतें हो रही हैं, तो वे उसके इलाज की तैयारी कैसे करेंगे? एमसीसीडी से मिलने वाला सटीक आंकड़ा स्वास्थ्य विभाग को यह बताता है कि किन बीमारियों पर ज्यादा मेडिकल बजट खर्च करने की जरूरत है और कहां नए अस्पताल या रिसर्च सेंटर खोलने चाहिए।
कैसे बच सकती हैं लाखों मासूमों की जान?
जब हर मौत का कारण सही-सही दर्ज होगा, तो मेडिकल रिसर्चर्स को यह समझने में बहुत आसानी होगी कि कौन सी बीमारी किस इलाके में महामारी का रूप ले रही है। उदाहरण के लिए, अगर किसी खास जिले में अचानक सांस की बीमारी या दूषित पानी से होने वाली मौतों का आंकड़ा बढ़ता है, तो प्रशासन तुरंत वहां मेडिकल टीमें भेजकर बीमारी को फैलने से रोक सकता है। समय रहते उठाया गया यही कदम आने वाले वक्त में लाखों लोगों को मौत के मुंह में जाने से बचा सकता है। इसके अलावा, लाइफ इंश्योरेंस क्लेम पास कराने और परिवार की जेनेटिक बीमारियों (पारिवारिक मेडिकल हिस्ट्री) को समझने में भी यह सर्टिफिकेट बहुत काम आता है।