Bodybuilders Sudden Deaths: सिर्फ 1 साल में 56 बॉडीबिल्डरों की मौत, औसत उम्र महज 35 साल; ऊपर से फिट दिखने वाले इन एथलीट्स की अंदर से क्यों जा रही है जान? एक्सपर्ट्स से जानें इसका कड़वा सच

फिटनेस, मस्कुलर बॉडी और सिक्स-पैक एब्स को आज के दौर में अच्छी सेहत की सबसे बड़ी निशानी माना जाता है। लेकिन इसी फिटनेस और बॉडीबिल्डिंग की दुनिया के पीछे का एक ऐसा खौफनाक और काला सच सामने आया है जिसने पूरे खेल जगत और मेडिकल एक्सपर्ट्स को हिलाकर रख दिया है। स्वास्थ्य आंकड़ों और अंतरराष्ट्रीय फिटनेस रिपोर्टों के अनुसार, बीते महज एक साल के भीतर दुनिया भर में 56 पेशेवर और शौकिया बॉडीबिल्डरों की अचानक मौत हो चुकी है। सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात यह है कि जान गंवाने वाले इन एथलीट्स की औसत उम्र महज 35 साल थी—यानी वह उम्र जब इंसान का शरीर अपने जीवन के सबसे मजबूत दौर में होता है।
जो एथलीट्स स्टेज पर अपनी लोहे जैसी नसों, उभरे हुए मसल्स और जीरो-फैट बॉडी का प्रदर्शन करते हैं, आखिर बाहर से बेहद 'फिट' दिखने वाले वे युवा अंदर से इतने कमजोर क्यों हो रहे हैं? कम उम्र में आ रहे हार्ट अटैक, किडनी फेलियर और अचानक कार्डियक अरेस्ट से हो रही इन मौतों के पीछे क्या वजहें हैं? आइए स्वास्थ्य विशेषज्ञों और स्पोर्ट्स मेडिसिन डॉक्टर्स से जानते हैं इसका कड़वा और खौफनाक सच।
1. एनाबॉलिक स्टेरॉयड्स और PEDs का अंधाधुंध इस्तेमाल
बॉडीबिल्डिंग इंडस्ट्री में असमय हो रही मौतों के पीछे सबसे बड़ी और घातक वजह एनाबॉलिक-एंड्रोजेनिक स्टेरॉयड्स (AAS) और परफॉर्मेंस एनहांसिंग ड्रग्स (PEDs) का अत्यधिक और अनियंत्रित सेवन है। मांसपेशियों को तेजी से बढ़ाने और कम समय में विशालकाय साइज (Hypertrophy) पाने के लिए कई एथलीट्स सिंथेटिक टेस्टोस्टेरोन, ट्रैनबोलोन (Trenbolone), और ह्यूमन ग्रोथ हार्मोन (HGH) के भारी डोज लेते हैं।
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दिल का अनियंत्रित बढ़ना (Left Ventricular Hypertrophy): स्टेरॉयड केवल हाथों-पैरों की मांसपेशियों को ही नहीं बढ़ाते, बल्कि वे शरीर के सबसे मुख्य मसल यानी 'दिल' का आकार भी असामान्य रूप से बढ़ा देते हैं। इससे दिल की दीवारें मोटी और सख्त हो जाती हैं, जिससे खून पंप करने की क्षमता घट जाती है और अचानक कार्डियक अरेस्ट (Sudden Cardiac Arrest) का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।
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खराब कोलेस्ट्रॉल में उछाल: स्टेरॉयड्स शरीर में अच्छे कोलेस्ट्रॉल (HDL) को लगभग खत्म कर देते हैं और खराब कोलेस्ट्रॉल (LDL) को अत्यधिक बढ़ा देते हैं। इसके कारण धमनियों में ब्लॉकेज (Artery Blockage) बहुत कम उम्र में ही हो जाता है।
2. कॉम्पिटिशन से ठीक पहले खतरनाक डिहाइड्रेशन और ड्यूरेटिक्स का खेल
स्टेज पर जाने से पहले बॉडीबिल्डर्स अपनी त्वचा को कागज की तरह पतली (Paper-thin skin) दिखाने और मसल्स की एक-एक नस को उभारने के लिए शरीर से पानी की अंतिम बूंद तक निचोड़ देते हैं। इसके लिए वे पानी पीना पूरी तरह बंद कर देते हैं और वाटर पिल्स या ड्यूरेटिक्स (Diuretics) का सहारा लेते हैं।
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इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन: ड्यूरेटिक्स दवाएं शरीर से पोटेशियम और सोडियम को तेजी से बाहर निकाल देती हैं। दिल की धड़कन (Heart Rhythm) को सही चलाने के लिए पोटेशियम बेहद जरूरी मिनरल है। पोटेशियम का स्तर अचानक गिरते ही दिल में 'एरिथमिया' (Arrhythmia) होता है और दिल की धड़कन एक पल में बंद हो जाती है।
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खून का गाढ़ा होना: शरीर में पानी की भारी कमी से खून बेहद गाढ़ा (Thick) हो जाता है, जिससे दिल को खून पंप करने में अत्यधिक जोर लगाना पड़ता है और स्ट्रोक या क्लॉट बनने से मौत हो जाती है।
3. फैट बर्नर्स, थर्माजेनिक्स और कैफीन का जानलेवा ओवरडोज
शरीर के फैट को 3 से 4 प्रतिशत तक नीचे लाने के लिए बॉडीबिल्डर्स क्लैनब्यूटेरोल (Clenbuterol), एफेड्रिन और अत्यधिक कैफीन युक्त थर्माजेनिक फैट बर्नर्स का इस्तेमाल करते हैं। क्लैनब्यूटेरोल मूल रूप से घोड़ों और मवेशियों के फेफड़ों के इलाज की दवा है, जिसे इंसान फैट बर्न करने के लिए गलत तरीके से लेते हैं।
यह दवा केंद्रीय तंत्रिका तंत्र (CNS) को जरूरत से ज्यादा उत्तेजित कर देती है। इससे आराम की स्थिति में भी दिल की धड़कन (Resting Heart Rate) 140 से 160 बीट प्रति मिनट तक पहुंच जाती है और ब्लड प्रेशर खतरनाक स्तर तक बढ़ जाता है। लगातार बने रहने वाले इस अत्यधिक स्ट्रेस के कारण सोए-सोए ही एथलीट का दिल काम करना बंद कर देता है।
4. इंसुलिन और ग्रोथ हार्मोन का खतरनाक कॉम्बिनेशन
आधुनिक बॉडीबिल्डिंग में विशाल आकार पाने के लिए इंसुलिन (Insulin) का इस्तेमाल एक नया और बेहद घातक ट्रेंड बन चुका है। बॉडीबिल्डर्स बॉडी में प्रोटीन और कार्ब्स को तेजी से पुश करने के लिए बाहरी इंसुलिन के इंजेक्शन लेते हैं।
इंसुलिन की थोड़ी सी भी गलत डोज शरीर में ब्लड शुगर लेवल को शून्य के करीब (Severe Hypoglycemia) पहुंचा देती है। इसके कारण एथलीट कोमा में जा सकता है या दिमाग की नसें फटने और ऑर्गन फेलियर से तुरंत मौत हो सकती है। वहीं, अत्यधिक ग्रोथ हार्मोन (HGH) के सेवन से शरीर के अंदरूनी अंग (लिवर, आंतें और दिल) असामान्य रूप से बड़े हो जाते हैं जिसे 'विसेरल ओबेसिटी' या 'प्रो-हार्मोन बेली' कहा जाता है।
5. भारी वजन और ओवरट्रेनिंग का कार्डियाक स्ट्रेस
मांसपेशियों को चीरकर बड़ा करने के लिए एथलीट अपनी शारीरिक क्षमता से कहीं अधिक वजन (Extreme Heavy Weightlifting) उठाते हैं। अत्यधिक वजन उठाते समय जब कोई व्यक्ति सांस रोककर जोर लगाता है (Valsalva Maneuver), तो सीने के अंदर दबाव बहुत बढ़ जाता है। इससे ब्लड प्रेशर अचानक 250 से 300 mm Hg तक पहुंच जाता है, जो दिल या दिमाग की नसों को फाड़ने (Aneurysm Rupture) के लिए काफी होता है।
'फिटनेस' और 'हेल्थ' के बीच का फर्क समझना क्यों जरूरी है?
हेल्प एंड स्पोर्ट्स मेडिसिन एक्सपर्ट्स का स्पष्ट कहना है कि "बाहर से फिट और मस्कुलर दिखना अंदर से सेहतमंद होने की गारंटी बिल्कुल नहीं है।" स्टेज पर दिखने वाली बॉडी असल में अत्यधिक कुपोषण, डिहाइड्रेशन और केमिकल्स के अत्यधिक इस्तेमाल का नतीजा होती है।
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फिटनेस (Fitness): किसी खास खेल या लुक के लिए शरीर को ढालना (जो कभी-कभी अस्वस्थ तरीकों से भी किया जाता है)।
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हेल्थ (Health): शरीर के सभी अंदरूनी अंगों (हार्ट, किडनी, लिवर, लंग्स) का प्राकृतिक और सुचारू रूप से सही काम करना।
युवाओं और जिम जाने वालों के लिए डॉक्टरों की गंभीर चेतावनी
आजकल जिम जाने वाले सामान्य युवा भी सोशल मीडिया पर दिखने वाले इन्फ्लुएंसर्स और बॉडीबिल्डर्स की तरह रातों-रात कटिंग और मस्कुलर साइज पाने के लिए बिना किसी योग्य डॉक्टर की सलाह के प्रो-हार्मोन, स्टेरॉयड शॉट्स और फैट बर्नर सप्लीमेंट्स लेने लगते हैं। 1 साल में 56 बॉडीबिल्डरों की असमय मौत का यह आंकड़ा उन सभी युवाओं के लिए एक बड़ी चेतावनी है जो शॉर्टकट के चक्कर में अपनी जान जोखिम में डालते हैं।
प्राकृतिक तरीके से बनाई गई बॉडी (Natural Bodybuilding), सही संतुलित पोषण, पर्याप्त नींद और नियमित कार्डियो ही लंबे जीवन और वास्तविक स्वास्थ्य का एकमात्र रास्ता है। केमिकल्स और ड्रग्स के दम पर बनाई गई मस्कुलर बॉडी केवल कुछ समय की चमक दे सकती है, लेकिन इसकी कीमत इंसान को अपनी जिंदगी देकर चुकानी पड़ती है।