मायावती के दो दिनों में ताबड़तोड़ 3 हमले: दलितों के मुद्दों पर बीजेपी या किसी के भी मूड में मर्सी के मूड में नहीं हैं बीएसपी सुप्रीमो

उत्तर प्रदेश की राजनीति के पटल पर बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) की राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने अपने आक्रामक तेवरों से सियासी पारा पूरी तरह सातवें आसमान पर पहुंचा दिया है। पिछले महज दो दिनों के भीतर मायावती ने सरकार और विरोधी दलों पर एक के बाद एक ताबड़तोड़ तीन बड़े हमले करते हुए यह साफ कर दिया है कि जब-जब देश और प्रदेश में दलितों, शोषितों और पिछड़ों के अधिकारों पर आंच आएगी, तब-तब वह किसी भी राजनीतिक दल या पार्टी के प्रति जरा भी नरमी (मर्सी) बरतने के मूड में नहीं हैं। उनके इन तीखे और बेबाक बयानों ने राज्य की मुख्यधारा की राजनीति में हलचल मचा दी है, जिससे सभी राजनीतिक दलों की रणनीतियों पर नए सिरे से मंथन शुरू हो गया है।
दो दिनों में मायावती के तीन बड़े सियासी वार और कड़े तेवर
बीएसपी सुप्रीमो मायावती ने पिछले 48 घंटों के अंतराल में अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स और आधिकारिक बياनों के जरिए जिस प्रकार से सरकार की नीतियों और विपक्षी दलों की खामोशी पर सवाल खड़े किए हैं, उसने राजनीतिक विश्लेषकों को भी चौंका दिया है। अपने बयानों में उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि वंचित समाज के साथ हो रहे अन्याय और अत्याचार के मामलों में अब बीएसपी किसी भी प्रकार का समझौता नहीं करेगी। लगातार दो दिनों में आए इन तीन धारदार हमलों ने यह साबित कर दिया है कि मायावती आगामी राजनीतिक समीकरणों के बीच अपने पारंपरिक दलित वोट बैंक को यह कड़ा संदेश देने में जुटी हैं कि केवल वही उनकी सबसे मजबूत और बेखौफ आवाज हैं।
यूपी की राजनीति में नए समीकरण और दलित वोट बैंक पर टिकी निगाहें
मायावती का यह आक्रामक अवतार ऐसे समय में सामने आया है जब उत्तर प्रदेश की राजनीति में हर दल अपनी जमीन मजबूत करने के लिए नए-नए सियासी दांव चल रहा है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि मायावती की यह रणनीति न केवल सत्ताधारी दल बल्कि अन्य विपक्षी दलों पर भी सीधा दबाव बनाने का काम कर रही है। जिस तरह से बीएसपी सुप्रीमो ने दलित उत्पीड़न और सामाजिक न्याय के मुद्दों को लेकर पूरी ताकत झोंक दी है, उससे यह साफ हो जाता है कि आने वाले दिनों में राज्य का सियासी संघर्ष और अधिक रोचक और तीखा होने वाला है, जिस पर हर किसी की पैनी नजर टिकी हुई है।