‘राहुल माइनो नाम रखकर खत्म करें पितृसत्ता’, सुधांशु त्रिवेदी का राहुल गांधी पर तीखा हमला, मनुस्मृति पर उठाए बड़े सवाल

भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता और सांसद डॉ. सुधांशु त्रिवेदी ने नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी द्वारा मनुस्मृति और पितृसत्ता की मानसिकता पर दिए गए बयानों को लेकर तीखा पलटवार किया है। एक साक्षात्कार के दौरान सुधांशु त्रिवेदी ने राहुल गांधी को तथ्यों और तर्कों के चक्रव्यूह में घेरते हुए एक अनोखी चुनौती दी है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि यदि कांग्रेस नेता वास्तव में पितृसत्ता को समाप्त करना चाहते हैं, तो उन्हें अपने नाम से पिता का सरनेम हटाकर अपनी माता का नाम जोड़ते हुए खुद को 'राहुल माइनो' कहना चाहिए।
पितृसत्ता के दावों पर राहुल गांधी को सीधी चुनौती
सुधांशु त्रिवेदी ने राहुल गांधी के उस वैचारिक तर्क पर सवाल उठाया जिसमें उन्होंने भारतीय संस्कृति और परंपराओं में पितृसत्ता के प्रभाव का आरोप लगाया था। भाजपा सांसद ने आड़े हाथों लेते हुए पूछा कि सोनिया गांधी स्वयं अपने पति राजीव गांधी का सरनेम क्यों लगाती हैं? उन्होंने चुनौती भरे लहजे में कहा कि यदि पितृसत्ता को खत्म करने की इतनी ही इच्छा है, तो राहुल गांधी अपने पिता का उपनाम छोड़ें और एंटोनिया माइनो का संदर्भ लेते हुए अपना नाम 'राहुल माइनो' रखें। त्रिवेदी ने आगे कहा कि जो लोग हिजाब, बहुविवाह, और तीन तलाक जैसी कुप्रथाओं को पितृसत्ता नहीं मानते, लेकिन 'यत्र नार्यस्तु पूज्यंते' और शिव-शक्ति जैसी अवधारणाओं वाले सनातन धर्म को पितृसत्तात्मक करार देते हैं, वे वैचारिक रूप से पूर्वाग्रही हैं।
मनुस्मृति की मूल प्रति और ऐतिहासिक संदर्भ पर सवाल
मनुस्मृति के अस्तित्व और उसके इतिहास पर बात करते हुए सुधांशु त्रिवेदी ने सवाल उठाया कि आखिर आज के समय में मनुस्मृति की मूल प्रति कहां उपलब्ध है? उन्होंने दावा किया कि 1783 में इंग्लैंड से आए विलियम जोन्स ने एक साल में संस्कृत सीखकर 1784 में मनुस्मृति का अंग्रेजी अनुवाद किया था। इसके साथ ही उन्होंने महात्मा गांधी और देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के पुराने बयानों का हवाला दिया। त्रिवेदी ने बताया कि महात्मा गांधी ने 4 मई 1928 को लिखे एक पत्र में कहा था कि वे मनुस्मृति की कई बातों को सराहनीय मानते हैं, हालांकि इसके वर्तमान स्वरूप में कुछ प्रक्षेपण बाद में जोड़े गए हो सकते हैं। इसी तरह, पं. जवाहरलाल नेहरू ने भी मई 1955 में संसद में दिए गए अपने बयानों में मनु और याज्ञवल्क्य के योगदान का सम्मान किया था।
'अल्ट्रा लेफ्ट ने हैक कर लिया है राहुल गांधी का दिमाग'
भाजपा सांसद ने कांग्रेस पार्टी पर करारा प्रहार करते हुए कहा कि 1972 में इंदिरा गांधी के कार्यकाल और 1985 में राजीव गांधी सरकार के सहयोग से भारतीय विद्या भवन द्वारा मनुस्मृति पर टीकाओं की पुस्तकें प्रकाशित की गई थीं। उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा कि आज राहुल गांधी अपने पिता, अपनी दादी, अपने परनाना नेहरू, डॉ. भीमराव आंबेडकर और महात्मा गांधी—इन सभी के विचारों को गलत साबित करने पर तुले हुए हैं। सुधांशु त्रिवेदी ने अंत में गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि कांग्रेस पार्टी का वैचारिक नियंत्रण अब पूरी तरह से 'अल्ट्रा लेफ्ट' (वामपंथी) विचारधारा के लोगों के हाथ में चला गया है, जिन्होंने राहुल गांधी के मानसिक और राजनीतिक विमर्श को पूरी तरह से हैक कर लिया है।