धर्म

राखी बांधते समय जरूर रखें दिशा का ध्यान, जानें तिलक, थाली और कलाई से जुड़े ये 5 जरूरी नियम; गलती करने से बचें

भाई-बहन के अटूट प्रेम और विश्वास का महापर्व रक्षाबंधन सनातन परंपरा में अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है। इस दिन बहनें अपने भाई की लंबी उम्र, सुख-समृद्धि और सुरक्षा की कामना करते हुए उनकी कलाई पर रक्षासूत्र यानी राखी बांधती हैं, वहीं भाई अपनी बहनों की रक्षा का संकल्प लेते हैं। शास्त्रों और ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, रक्षासूत्र बांधना केवल एक औपचारिक रिवाज नहीं है, बल्कि यह एक अत्यंत पवित्र और वैदिक अनुष्ठान है। इसलिए राखी बांधते समय सही दिशा, बैठने का तरीका, पूजा की थाली की सामग्री और शुभ मुहूर्त से जुड़े नियमों का विशेष ध्यान रखना आवश्यक होता है ताकि इसका पूर्ण शुभ फल प्राप्त हो सके।

दिशा का नियम: राखी बांधते समय किस दिशा में होना चाहिए भाई और बहन का मुख?

ज्योतिष और वास्तु शास्त्र के अनुसार राखी बांधते समय दिशाओं का सही चयन करना सकारात्मक ऊर्जा के प्रवाह के लिए सबसे जरूरी माना जाता है।

  • भाई का मुख: राखी बंधवाते समय भाई का मुख हमेशा पूर्व (East) या उत्तर (North) दिशा की ओर होना चाहिए। पूर्व दिशा को देव दिशा और ऊर्जा का केंद्र माना जाता है, जिससे दीर्घायु और आरोग्य की प्राप्ति होती है, वहीं उत्तर दिशा धन, समृद्धि और उन्नति की दिशा मानी जाती है।

  • बहन का मुख: भाई के सामने बैठने के कारण बहन का मुख पश्चिम (West) या दक्षिण (South) दिशा की ओर होना स्वाभाविक है, लेकिन प्रयास करें कि पूजा और अनुष्ठान का मुख्य केंद्र पूर्व या उत्तर दिशा ही रहे।

  • दिशा से जुड़ी मनाही: भाई को कभी भी दक्षिण दिशा की ओर मुख करके नहीं बैठना चाहिए, क्योंकि दक्षिण को यम की दिशा माना जाता है और इस दिशा में मुख करके कोई भी मांगलिक कार्य करना वर्जित होता है।

राखी बांधने के 5 सबसे जरूरी नियम और सही विधि

शास्त्रों में रक्षासूत्र बांधने की एक स्पष्ट और मर्यादित प्रक्रिया बताई गई है, जिसका पालन करना कल्याणकारी माना जाता है:

  • सिर ढकना अनिवार्य: राखी बंधवाते समय भाई को कभी भी खुले सिर नहीं बैठना चाहिए। भाई को अपने सिर पर रुमाल, साफा या टोपी जरूर रखनी चाहिए। इसी प्रकार बहनों को भी अपना सिर दुपट्टे या पल्लू से ढंककर ही पूजा और राखी बांधने की रस्म करनी चाहिए।

  • जमीन पर सीधे बैठने से बचें: भाई और बहन दोनों को पूजा के समय सीधे फर्श या जमीन पर नहीं बैठना चाहिए। लकड़ी की चौकी, पाटा या ऊन/कुश के शुद्ध आसन पर बैठकर ही यह रस्म पूरी करनी चाहिए।

  • दाहिने हाथ की कलाई पर ही बांधें राखी: धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पुरुषों और अविवाहित कन्याओं के दाहिने हाथ में सकारात्मक और दैवीय ऊर्जा का वास होता है। इसलिए रक्षासूत्र हमेशा भाई के दाएं हाथ की कलाई पर ही बांधा जाना चाहिए।

  • तिलक और अक्षत का सही क्रम: सबसे पहले भाई के माथे पर अनामिका उंगली (Ring Finger) से रोली या चंदन का तिलक लगाएं। इसके बाद तिलक पर बिना टूटे हुए साबुत चावल (अक्षत) लगाएं। अक्षत को पूर्णता और अखंड सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है।

  • तीन गांठें लगाने का महत्व: कलाई पर रक्षासूत्र बांधते समय उसमें तीन गांठें (Three Knots) जरूर लगानी चाहिए। शास्त्रों के अनुसार ये तीन गांठें त्रिदेव—ब्रह्मा, विष्णु और महेश के साथ-साथ त्रिदोष निवारण और त्रिताप से मुक्ति की प्रतीक मानी जाती हैं।

पूजा की थाली में क्या-क्या होना जरूरी है?

रक्षाबंधन की पूजा थाली को पूर्ण और शुद्ध बनाने के लिए निम्नलिखित पवित्र सामग्रियों को जरूर शामिल करना चाहिए:

  • रोली या कुमकुम और शुद्ध चंदन

  • अक्षत (साबुत, बिना टूटे हुए चावल)

  • रक्षासूत्र (पवित्र धागा या शुद्ध राखी)

  • शुद्ध घी का दीपक और आरती की घंटी

  • ताजे पुष्प और दूर्वा घास

  • ताजे मिष्ठान (मिठाई)

  • शुद्ध जल से भरा कलश या आचमनी

भद्रा काल और राहुकाल में भूलकर भी न बांधें राखी

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भद्रा काल में कभी भी रक्षासूत्र नहीं बांधना चाहिए। भद्रा को शनिदेव की बहन और अत्यंत उग्र स्वभाव वाली माना गया है। शास्त्रों में उल्लेख है कि रावण की बहन शूर्पणखा ने भद्रा काल में ही रावण को रक्षासूत्र बांधा था, जिससे उसके पूरे कुल का विनाश हो गया। इसलिए रक्षाबंधन के दिन भद्रा की छाया और राहुकाल के समय का विशेष ध्यान रखें और केवल शुभ चौघड़िया या अभिजीत मुहूर्त में ही राखी बांधें।

रक्षासूत्र बांधते समय इस मंत्र का करें उच्चारण

राखी बांधते समय इस प्रसिद्ध वैदिक मंत्र का जाप करना अत्यंत मंगलकारी माना जाता है:

"येन बद्धो बली राजा दानवेन्द्रो महाबलः।

तेन त्वामपि बध्नामि रक्षे मा चल मा चल।।"

इस मंत्र का अर्थ है कि जिस रक्षासूत्र से महादानी दानवेंद्र राजा बलि को बांधा गया था, उसी पवित्र रक्षासूत्र से मैं तुम्हें बांधती हूं। हे रक्षे! तुम स्थिर रहना और कभी अपने धर्म व संकल्प से विचलित मत होना। राखी बांधने के बाद बहन भाई की आरती उतारती है, मिठाई खिलाती है और भाई अपनी बहन को उपहार देकर जीवनभर उसकी रक्षा का वचन देता है।

Back to top button