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उज्बेकिस्तान-किर्गिस्तान यात्रा पर रवाना हुए पीएम मोदी, प्रधानमंत्री ने बताया क्यों अहम है ये दौरा; SCO समिट में भी होंगे शामिल

वैश्विक कूटनीति के पटल पर भारत का प्रभाव दिन-प्रतिदिन मजबूत होता जा रहा है, और इसी कड़ी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक बार फिर बेहद अहम कूटनीतिक दौरे पर मध्य एशिया के लिए रवाना हो चुके हैं। इस बार उनकी यह यात्रा उज्बेकिस्तान और किर्गिस्तान जैसे सामरिक रूप से बेहद संवेदनशील देशों के लिए हो रही है, जहां वह क्षेत्रीय सहयोग और द्विपक्षीय संबंधों को एक नया आयाम देंगे। अपनी इस यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के वार्षिक शिखर सम्मेलन में भी शिरकत करेंगे, जहां दुनिया भर के कई दिग्गज नेता वैश्विक मुद्दों पर मंथन करने के लिए एक मंच पर जुटेंगे। इस यात्रा को लेकर अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के गलियारों में हलचल तेज हो गई है क्योंकि वर्तमान भू-राजनीतिक हालात में मध्य एशिया की भूमिका हर बड़े देश के लिए महत्वपूर्ण हो गई है।

मध्य एशिया की रणनीतिक अहमियत और प्रधानमंत्री का दौरा

भारत का मध्य एशिया के साथ पुराना ऐतिहासिक और सांस्कृतिक नाता रहा है, लेकिन आधुनिक समय में इस क्षेत्र की महत्ता ऊर्जा सुरक्षा, व्यापारिक मार्गों और क्षेत्रीय स्थिरता के लिहाज से कई गुना बढ़ गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी रवानगी से पहले इस बात पर विशेष प्रकाश डाला कि उनका यह दौरा क्यों इतना खास और सामरिक रूप से आवश्यक है। उज्बेकिस्तान और किर्गिस्तान के साथ भारत के रिश्ते पिछले कुछ वर्षों में लगातार गहरे हुए हैं, और इस उच्चस्तरीय यात्रा के जरिए दोनों देशों के बीच रक्षा, व्यापार, तकनीक और आतंकवाद विरोधी सहयोग को और अधिक मजबूती मिलने की पूरी उम्मीद है। नई दिल्ली की विदेश नीति में 'एक्सटेंडेड नेबरहुड' यानी विस्तारित पड़ोस की नीति के तहत मध्य एशियाई देश सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल हैं।

एससीओ (SCO) शिखर सम्मेलन में भारत की मजबूत होती गूंज

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस विदेशी दौरे का सबसे मुख्य आकर्षण शंघाई सहयोग संगठन (SCO) का शिखर सम्मेलन है, जो क्षेत्रीय सुरक्षा और आर्थिक साझेदारी के मामले में दुनिया का एक बड़ा मंच माना जाता है। इस सम्मेलन में आतंकवाद के खात्मे, क्षेत्रीय संपर्क (कनेक्टिविटी), व्यापारिक गलियारों और जलवायु परिवर्तन जैसे गंभीर विषयों पर सामूहिक चर्चा होगी। प्रधानमंत्री मोदी इस मंच से आतंकवाद के खिलाफ भारत के कड़े रुख को दोहराने के साथ-साथ वैश्विक दक्षिण (Global South) की आवाज़ को प्रमुखता से उठाएंगे। एससीओ के दायरे में रूस, चीन और मध्य एशियाई देशों के शीर्ष नेतृत्व के साथ होने वाली द्विपक्षीय बैठकों से भारत के लिए भविष्य के कूटनीतिक रास्ते और अधिक प्रशस्त होने की संभावना है।

ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक साझेदारियों का नया खाका

आज के दौर में किसी भी देश की प्रगति उसकी ऊर्जा और आर्थिक स्थिरता पर टिकी होती है, और मध्य एशिया प्राकृतिक संसाधनों का एक असीम भंडार है। उज्बेकिस्तान और किर्गिस्तान के साथ होने वाली वार्ताओं में ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने, यूरेनियम आपूर्ति को सुनिश्चित करने और फार्मास्यूटिकल तथा आईटी सेक्टर में निवेश के नए अवसरों पर मुहर लग सकती है। अंतरराष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारा (INSTC) जैसी बड़ी परियोजनाओं के जरिए भारत इन देशों के साथ सीधे व्यापारिक रिश्ते स्थापित करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री के इस दौरे से भारतीय व्यापारियों और निवेशकों के लिए मध्य एशियाई बाजारों तक पहुंच आसान होगी, जिससे आर्थिक मोर्चे पर देश को एक नया सामरिक लाभ मिलेगा।

क्षेत्रीय स्थिरता और सुरक्षा के साझा मोर्चे

दक्षिण एशिया और मध्य एशिया दोनों ही क्षेत्र लंबे समय से सीमा पार आतंकवाद, कट्टरपंथ और राजनीतिक अस्थिरता की चुनौतियों का सामना करते रहे हैं। उज्बेकिस्तान और किर्गिस्तान की यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी की इन देशों के राष्ट्रध्यक्षों के साथ होने वाली बैठकों में खुफिया जानकारी साझा करने और सुरक्षा के मोर्चों पर आपसी तालमेल को और चाक-चौबंद करने पर व्यापक मंथन होगा। अफगानिस्तान के मौजूदा हालातों और क्षेत्रीय सुरक्षा व्यवस्था पर इसके पड़ने वाले प्रभावों को लेकर दोनों पक्ष साझा रणनीति तैयार कर रहे हैं। आतंकवाद के खिलाफ शून्य सहिष्णुता की नीति पर चलते हुए भारत इस दौरे के जरिए क्षेत्रीय शांति और स्थिरता के संदेश को पूरी दुनिया के सामने मजबूती से रखने जा रहा है।

सांस्कृतिक कूटनीति और जन-से-जन संपर्क का विस्तार

कूटनीति के राजनीतिक और आर्थिक आयामों से परे, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हमेशा से सांस्कृतिक संबंधों और लोगों के आपसी जुड़ाव को मजबूत करने के पक्षधर रहे हैं। उज्बेकिस्तान और किर्गिस्तान में भारतीय संस्कृति, योग, सिनेमा और आयुर्वेद के प्रति लोगों का गहरा आकर्षण दोनों देशों के बीच के मानवीय रिश्तों को मजबूत बनाता है। इस यात्रा के दौरान उच्च शिक्षा, पर्यटन और सांस्कृतिक आदान-प्रदान के कई नए समझौतों पर हस्ताक्षर होने की उम्मीद है, जिससे दोनों देशों के युवाओं के बीच आपसी संवाद बढ़ेगा। प्रधानमंत्री मोदी का यह दौरा न केवल सरकारों के स्तर पर, बल्कि आम नागरिकों के दिलों में भी भारत की एक सकारात्मक और सशक्त छवि को और अधिक प्रगाढ़ करने का काम करेगा।

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