इंग्लैंड में पाकिस्तान क्रिकेट की फजीहत: इंटरनेशनल क्रिकेट के लायक नहीं माना, पूर्व दिग्गज ने कहा- ये सेकंड डिविजन के खिलाड़ी

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के गलियारों में इन दिनों पाकिस्तान क्रिकेट टीम की जो दुर्गति हो रही है, उसने पूरी दुनिया के खेल प्रेमियों और क्रिकेट पंडितों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। हाल ही में इंग्लैंड के दौरे पर गए पाकिस्तान क्रिकेट दल को लेकर एक ऐसी तीखी और अपमानजनक टिप्पणी सामने आई है, जिसने पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड यानी पीसीबी और उसके समर्थकों के होश उड़ा दिए हैं। इंग्लैंड के एक प्रतिष्ठित पूर्व क्रिकेटर और खेल विशेषज्ञ ने पाकिस्तानी टीम के मौजूदा प्रदर्शन, तकनीकी कमजोरी और मैदान पर बिखरे हुए अनुशासन को देखते हुए एक सार्वजनिक बयान में यहां तक कह डाला कि अब इस टीम को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शीर्ष क्रिकेट खेलने के लायक ही नहीं माना जा रहा है। उस दिग्गज ने बेहद कड़े शब्दों में यह टिप्पणी करते हुए कहा कि मौजूदा पाकिस्तान टीम का स्तर इतना गिर चुका है कि वे अब केवल 'सेकंड डिविजन' यानी दोयम दर्जे की घरेलू टीमों के समकक्ष ही ठहरते हैं। इस बेइज्जती भरे बयान के बाद से सोशल मीडिया पर पाकिस्तान क्रिकेट की जमकर किरकिरी हो रही है और देश-विदेश के खेल प्रेमी इस बात पर बहस कर रहे हैं कि क्या वाकई पाकिस्तान क्रिकेट का स्वर्ण काल अब हमेशा के लिए खत्म हो चुका है।
खराब प्रदर्शन और इंग्लैंड की धरती पर बढ़ती आलोचनाएं
पाकिस्तान क्रिकेट टीम जब भी विदेशी दौरों पर जाती है, तो देश के करोड़ों फैंस की उम्मीदें आसमान पर होती हैं, लेकिन पिछले कुछ समय से विदेशी पिचों पर इस टीम का प्रदर्शन लगातार निराशाजनक रहा है। इंग्लैंड की मुश्किल और स्विंग लेती पिचों पर पाकिस्तानी बल्लेबाजों और गेंदबाजों का जो हश्र देखने को मिला है, उसने पूर्व क्रिकेटरों का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंचा दिया है। इंग्लैंड के पूर्व दिग्गजों का मानना है कि पाकिस्तानी टीम के खिलाड़ी आधुनिक क्रिकेट की तीव्र गति और तकनीकी बारीकियों के साथ तालमेल बिठाने में पूरी तरह से असफल साबित हो रहे हैं। न तो उनकी तकनीक में वो परिपक्वता नजर आती है और न ही बड़े मुकाबलों में दबाव झेलने की वह मानसिक क्षमता दिखाई देती है जो एक टेस्ट या उच्च स्तरीय टीम की पहचान होती है। यही वजह है कि ब्रिटिश मीडिया और वहां के खेल विशेषज्ञों ने पाकिस्तानी टीम के इस लचर प्रदर्शन को आधार बनाते हुए उनकी काबिलियत पर खुलकर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं, जिससे पूरी दुनिया में पाकिस्तान क्रिकेट की साख को करारा झटका लगा है।
पीसीबी की नीतियों और घरेलू ढांचे पर खड़े हो रहे गंभीर सवाल
इस अंतरराष्ट्रीय बेइज्जती के बाद पाकिस्तान के भीतर भी क्रिकेट प्रशासन और बोर्ड की नीतियों पर गाज गिरनी शुरू हो गई है। देश के वरिष्ठ खेल पत्रकारों और पूर्व पाकिस्तानी कप्तानों का यह मानना है कि जब तक घरेलू क्रिकेट ढांचे में आमूल-चूल परिवर्तन नहीं किया जाएगा और पर्ची-परची या सिफारिश के आधार पर चयन बंद नहीं होगा, तब तक टीम का यह पतन रोका नहीं जा सकता। पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड में लगातार होने वाले चेयरमैन के बदलाव और मनमाने फैसलों ने खिलाड़ियों की मानसिक स्थिति को पूरी तरह से विचलित कर दिया है। घरेलू पिचों पर सपाट और सपाट विकेट बनाकर टेस्ट मैच खेलने की जो आदत पाकिस्तान ने डाली है, जब वही खिलाड़ी इंग्लैंड या ऑस्ट्रेलिया की उछाल भरी और सीमिंग पिचों पर उतरते हैं, तो वे ताश के पत्तों की तरह बिखर जाते हैं। विदेशी विशेषज्ञों द्वारा कहे गए 'सेकंड डिविजन' वाले ताने ने एक बार फिर से इस कड़वी सच्चाई को उजागर कर दिया है कि पाकिस्तानी क्रिकेट महकमा आधुनिक तकनीक और पेशेवर रवैये से मीलों दूर खड़ा है।
खिलाड़ियों के खेल में अनुशासनहीनता और फिटनेस की भारी कमी
इंग्लैंड में हुई इस किरकिरी के पीछे सिर्फ तकनीकी नाकामी ही नहीं, बल्कि खिलाड़ियों की फिटनेस और मैदान पर दिखाई देने वाली अनुशासनहीनता भी एक बहुत बड़ा कारण रही है। आधुनिक क्रिकेट में जहां एक तरफ फिटनेस के स्तर को सबसे ऊपर रखा जाता है और खिलाड़ी चुस्ती के साथ फील्डिंग और रनिंग करते हैं, वहीं पाकिस्तानी टीम के कई खिलाड़ी अपनी लचर फिटनेस और सुस्त रवैये के कारण अक्सर ट्रोलर्स के निशाने पर रहते हैं। कैच टपकाना, साधारण रन आउट छोड़ना और गेंदबाजी में लगातार अतिरिक्त रन लुटाना उनकी आम फितरत बन चुकी है। विदेशी कमेंटेटरों और पूर्व खिलाड़ियों ने इसी बात पर तंज कसते हुए कहा है कि इस टीम के अंदर अंतरराष्ट्रीय स्तर का जज्बा ही गायब हो चुका है। जब मैदान पर लड़ने का माद्दा और जीतने की भूख नजर नहीं आती, तो विरोधी टीमें और उनके पूर्व दिग्गज इस तरह की अपमानजनक टिप्पणियां करने से बिल्कुल नहीं चूकते, जिससे देश का नाम भी अंतरराष्ट्रीय मंच पर धूमिल होता है।
सोशल मीडिया पर पाकिस्तान फैंस का गुस्सा और मीम्स की बाढ़
जैसे ही इंग्लैंड के उस दिग्गज का यह बयान कि 'पाकिस्तान इंटरनेशनल क्रिकेट के लायक नहीं है और ये सेकंड डिविजन वाले हैं' सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, इंटरनेट पर मीम्स और तीखी प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई। एक तरफ जहां दुनिया भर के क्रिकेट फैंस इस बयान पर मजे ले रहे हैं, वहीं खुद पाकिस्तान के समर्पित फैंस अपने खिलाड़ियों के इस शर्मनाक प्रदर्शन को देखकर अपना सिर पीट रहे हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर लोग पीसीबी के अध्यक्ष और उन चयनकर्ताओं को आड़े हाथों ले रहे हैं जिनके कार्यकाल में टीम का ऐसा पतन देखने को मिला है। फैंस का कहना है कि सुधार के बड़े-बड़े दावे करने वाले अधिकारी सिर्फ बयानबाजी करते हैं, जबकि हकीकत में टीम का स्तर लगातार गिरता जा रहा है। इस तरह के बयानों ने यह साबित कर दिया है कि वैश्विक क्रिकेट मानचित्र पर अब पाकिस्तान को एक मजबूत और खौफनाक टीम के रूप में नहीं बल्कि एक कमजोर प्रतिद्वंद्वी के रूप में देखा जाने लगा है, जिससे उबरना पाकिस्तान क्रिकेट के लिए आने वाले दिनों में बहुत बड़ी चुनौती साबित होगा।