फ्लाइट में Flydubai जैसी इमरजेंसी आने पर पायलट जमीन पर भेजते हैं कौन-से गुप्त संदेश

आसमान की असीम ऊंचाइयों पर जब कोई विशालकाय विमान हजारों यात्रियों को लेकर बादलों के बीच से गुजर रहा होता है, तब उस उड़ान की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कॉकपिट के अंदर बैठे पायलट और जमीन पर मौजूद एयर ट्रैफिक कंट्रोल यानी एटीसी के बीच संपर्क सबसे अहम कड़ी होता है। कई बार विमान के अंदर ऐसी अचानक और खतरनाक आपातकालीन स्थितियां पैदा हो जाती हैं जहां पायलट के लिए सामान्य रेडियो के जरिए बात करना मुश्किल या असंभव हो जाता है, और ऐसे ही संकट के क्षणों के लिए विमानन जगत में कुछ विशेष डिजिटल कोड बनाए गए हैं जिन्हें ट्रांसपोंडर स्क्वाक कोड कहा जाता है। हाल ही में इस तरह की उड़ानों से जुड़ी आपातकालीन घटनाओं और Flydubai जैसी एयरलाइंस के विमानों में आने वाली तकनीकी अड़चनों को लेकर जब चर्चाएं तेज हुई हैं, तब आम लोगों के मन में यह सवाल सबसे ज्यादा उठ रहा है कि आखिर ये तीन अंकों वाले रहस्यमयी नंबर यानी 7500, 7600 और 7700 असल में क्या होते हैं। विमानन सुरक्षा के इन बेहद कड़े और गोपनीय नियमों के पीछे की तकनीकी सच्चाई को जानना हर उस यात्री के लिए बेहद दिलचस्प और जरूरी है जो हवाई यात्रा की दुनिया और उसके अदृश्य सुरक्षा चक्र को समझना चाहता है।
क्या होता है ट्रांसपोंडर और कैसे हवा में उड़ते हुए विमानों की हर गतिविधि पर पैनी नजर रखती है एटीसी की टीम
हवाई जहाज के अंदर ट्रांसपोंडर एक ऐसा अत्याधुनिक इलेक्ट्रॉनिक उपकरण होता है जो रडार संकेतों के जवाब में जमीन पर मौजूद एयर ट्रैफिक कंट्रोल को विमान की ऊंचाई, उसकी गति, उसकी पहचान और उसकी सही स्थिति की सटीक जानकारी लगातार भेजता रहता है। सामान्य उड़ानों के दौरान एटीसी हर विमान को एक चार अंकों का विशेष कोड यानी स्क्वाक कोड असाइन करता है ताकि आसमान के विशाल रास्तों पर विमानों की पहचान आसानी से की जा सके और उनके बीच सुरक्षित दूरी बनी रहे। लेकिन जब किसी विमान के साथ कोई अप्रत्याशित संकट आ जाता है, तब पायलट के पास इतना समय नहीं होता कि वह रेडियो पर लंबी बात करके अपनी स्थिति समझा सके और इसीलिए ट्रांसपोंडर में तुरंत एक विशेष इमरजेंसी कोड सेट कर दिया जाता है। इस कोड को सेट करते ही एटीसी के कंप्यूटर स्क्रीन पर तुरंत एक लाल चेतावनी चमकने लगती है और अधिकारियों को सेकंडों में यह पता चल जाता है कि हवा में उड़ रहे उस विशिष्ट विमान के साथ किस प्रकार की गंभीर समस्या उत्पन्न हो गई है।
स्क्वाक कोड 7500 का खौफनाक मतलब क्या है और विमान हाईजैक होने पर कैसे एक्टिवेट होता है यह गुप्त अलर्ट
इन सभी आपातकालीन कोड्स में से सबसे अधिक संवेदनशील और डरावना कोड 7500 माना जाता है, जिसे विमान के अपहरण यानी हाईजैकिंग जैसी गंभीर और जानलेवा स्थिति के दौरान सेट किया जाता है। यदि दुर्भाग्यवश किसी असामाजिक तत्व या आतंकवादी द्वारा विमान को कब्जे में ले लिया जाता है और पायलट पर दबाव बनाया जाता है, तब पायलट चुपचाप ट्रांसपोंडर में 7500 कोड फीड कर देता है बिना अपहरणकर्ताओं को इसकी भनक लगे। इस कोड के एक्टिवेट होते ही जमीन पर मौजूद सुरक्षा एजेंसियों और एयर ट्रैफिक कंट्रोल को बिना एक भी शब्द बोले यह गुप्त संकेत मिल जाता है कि विमान अब किसी असामाजिक तत्व के नियंत्रण में आ चुका है और तुरंत रेस्क्यू ऑपरेशन की तैयारी शुरू कर दी जाती है। विमानन सुरक्षा के इतिहास में इस गुप्त कोड ने कई बार सुरक्षाबलों को समय रहते सही कदम उठाने और किसी बड़े अनर्थ को टालने में बहुत बड़ी मदद की है, जिससे यात्रियों की जान बचाने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है।
कोड 7600 और 7700 के जरिए जानिए कम्यूनिकेशन फेलियर और इंजन फेल जैसी तकनीकी इमरजेंसी का पूरा गणित
अपहरण के अलावा विमानों में आने वाली अन्य तकनीकी और यांत्रिक समस्याओं के लिए दो और बेहद महत्वपूर्ण कोड तय किए गए हैं जिनमें 7600 और 7700 प्रमुख रूप से शामिल होते हैं। जब किसी विमान का ऑन-बोर्ड रेडियो सिस्टम पूरी तरह से खराब हो जाता है और पायलट जमीन पर मौजूद एटीसी से संवाद करने में असमर्थ हो जाता है, तब ट्रांसपोंडर में 7600 कोड फीड किया जाता है जिसे कम्यूनिकेशन फेलियर का संकेत माना जाता है। इस स्थिति में पायलट अंतरराष्ट्रीय विमानन नियमों के तहत तयशुदा रास्तों पर उड़ान जारी रखता है और एटीसी समझ जाता है कि विमान का रेडियो काम नहीं कर रहा है लेकिन विमान सुरक्षित है। दूसरी ओर, यदि विमान के इंजन में आग लग जाती है, कोई भारी तकनीकी खराबी आ जाती है, या विमान में सवार किसी यात्री की तबीयत अचानक बहुत ज्यादा बिगड़ जाती है, तब सबसे खतरनाक और आम इमरजेंसी कोड यानी 7700 को एक्टिवेट किया जाता है। यह कोड जमीन पर बैठे अधिकारियों को यह चेतावनी देता है कि विमान को तुरंत అత్యవసర लैंडिंग यानी इमरजेंसी लैंडिंग के लिए प्राथमिकता दी जाए और रनवे पर एंबुलेंस तथा फायर ब्रिगेड को तैनात रखा जाए।