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राष्ट्रपति मुर्मु ने दी मंजूरी, बहुविवाह पर रोक और लिव-इन का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य

देश के राजनीतिक और विधायी इतिहास में एक बड़ा कदम उठाते हुए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने 'गुजरात समान नागरिक संहिता (UCC) विधेयक 2026' को अपनी औपचारिक स्वीकृति प्रदान कर दी है। इस ऐतिहासिक मंजूरी के साथ ही गुजरात, उत्तराखंड के बाद समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code) को कानूनी रूप से पारित करने और लागू करने वाला देश का दूसरा राज्य बन गया है। हालांकि, नए कानून के प्रावधानों के तहत यह स्पष्ट किया गया है कि इसके नियम अनुसूचित जनजाति (ST) समुदाय के सदस्यों पर लागू नहीं होंगे।

विधानसभा में इस महत्वपूर्ण विधेयक को पेश करते हुए मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने स्पष्ट किया था कि यूसीसी उन प्रमुख और दूरदर्शी सुधारों में शामिल है, जिन्हें देश भर में लागू करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं। इस कानून का मुख्य उद्देश्य समाज में आपसी सद्भाव, लैंगिक समानता और राष्ट्रीय एकता को मजबूत करना है। साथ ही, सर्वोच्च न्यायालय के विभिन्न सुझावों और निर्देशों के अनुरूप यह कानून महिलाओं के विधिक अधिकारों की रक्षा करने में मील का पत्थर साबित होगा।

विवाह, तलाक और लिव-इन रिलेशनशिप का अनिवार्य पंजीकरण

नए कानून के प्रावधानों के अनुसार, राज्य के सभी नागरिकों के लिए विवाह और तलाक का औपचारिक रूप से सरकारी पंजीकरण कराना अनिवार्य कर दिया गया है। यदि कोई व्यक्ति इन नियमों का पालन नहीं करता है, तो उसके लिए 10,000 रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान तय किया गया है।

इसके अलावा, समाज में पारदर्शिता लाने के लिए सभी प्रकार के लिव-इन संबंधों (Live-in Relationships) का पंजीकरण भी अनिवार्य कर दिया गया है। इतना ही नहीं, यदि कोई लिव-इन संबंध समाप्त होता है, तो उसकी आधिकारिक सूचना भी प्रशासन को देना जरूरी होगा। इस कानून के तहत एक अहम सुरक्षा प्रावधान यह भी जोड़ा गया है कि लिव-इन रिलेशनशिप से जन्म लेने वाले बच्चों को पूरी तरह से वैध संतान का दर्जा मिलेगा, और यदि पुरुष पार्टनर महिला को छोड़ देता है, तो उस महिला को कानूनन गुजारा भत्ता (Alimony) पाने का पूरा अधिकार होगा।

जबरन शादी पर सख्त सजा और बहुविवाह पर रोक

इस नए समान नागरिक संहिता कानून के जरिए समाज में कुप्रथाओं पर नकेल कसने की तैयारी की गई है। कानून के तहत एक से अधिक विवाह (बहुविवाह) पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया गया है। यदि कोई व्यक्ति किसी भी तरह के दबाव, बल या जोर-जबरदस्ती के जरिए विवाह कराता है, तो ऐसे मामलों में 7 साल तक के कठोर कारावास की सजा का प्रावधान किया गया है।

इसके अलावा, सक्षम अदालत के आधिकारिक आदेश के बिना किसी भी अन्य गैर-कानूनी तरीके से दिए गए तलाक को पूरी तरह अवैध घोषित किया गया है, जिसके लिए 3 साल तक की जेल की सजा तय की गई है। इस अधिनियम में तलाकशुदा जोड़ों को बिना किसी अनुचित और जटिल शर्त के आपस में दोबारा शादी करने का कानूनी अधिकार दिया गया है, साथ ही समाज में प्रचलित 'हलाला' जैसी प्रथाओं पर भी पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है।

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