व्यापार

FADA Report: सितंबर में इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री ने रचा नया इतिहास, 74% के जोरदार उछाल के साथ 3.33 लाख यूनिट्स की रिकॉर्ड सेल, EV पेनेट्रेशन 13% के पार

देश के ऑटोमोबाइल सेक्टर में पेट्रोल-डीजल की निर्भरता को पीछे छोड़ते हुए ग्रीन मोबिलिटी की ओर बदलाव अब केवल एक प्रयोग नहीं, बल्कि मुख्यधारा की जरूरत बन चुका है। वाहन डीलरों के शीर्ष राष्ट्रीय संगठन 'फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशंस' (FADA) द्वारा जारी सितंबर 2026 के आधिकारिक खुदरा बिक्री आंकड़ों ने देश में इलेक्ट्रिक वाहनों की स्वीकार्यता को लेकर एक नया कीर्तिमान स्थापित कर दिया है। रिपोर्ट के अनुसार, बीते सितंबर माह में भारत भर में कुल 3,33,634 इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) का रिकॉर्ड पंजीकरण और खुदरा बिक्री दर्ज की गई। सालाना आधार पर तुलना की जाए तो पिछले वर्ष के समान महीने के मुकाबले ईवी बिक्री में 74 प्रतिशत का ऐतिहासिक उछाल देखने को मिला है। यह आंकड़ा स्वतंत्र भारत के इतिहास में किसी एक महीने के दौरान दर्ज किया गया अब तक का सबसे बड़ा ईवी बिक्री वॉल्यूम है। त्योहारी सीजन की शुरुआत, केंद्र सरकार की दूरगामी नीतियों, राज्यों में मिल रही सब्सिडी और पेट्रोल-डीजल के मुकाबले बेहद कम परिचालन लागत (Running Cost) के चलते ग्राहकों का रुझान तेजी से इलेक्ट्रिक सेगमेंट की तरफ शिफ्ट हो रहा है।

कुल ऑटो बाजार में 13% तक पहुंचा ईवी पेनेट्रेशन, वैकल्पिक नहीं अब पहली पसंद बने वाहन

फाडा के अध्यक्ष सी. एस. विग्नेश्वर (साई गिरिधर) ने इस ऐतिहासिक आंकड़े पर टिप्पणी करते हुए स्पष्ट किया कि सितंबर का महीना भारतीय ऑटो बाजार के लिए एक वाटरशेड मोमेंट साबित हुआ है। रिपोर्ट के सबसे उत्साहजनक पहलुओं में से एक यह है कि कुल ऑटोमोबाइल बाजार में इलेक्ट्रिक वाहनों की हिस्सेदारी यानी 'ईवी पेनेट्रेशन' बढ़कर लगभग 13 प्रतिशत के स्तर पर पहुंच गया है, जो ठीक एक साल पहले इसी अवधि में 10 प्रतिशत के आसपास दर्ज था। इसका सीधा अर्थ यह है कि सड़क पर उतरने वाले हर 100 नए वाहनों में से औसतन 13 वाहन अब पूरी तरह बैटरी चालित इलेक्ट्रिक हैं। फाडा का मानना है कि चार्जिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर के तेजी से हो रहे विस्तार, रेंज की चिंता (Range Anxiety) में आई कमी और आधुनिक बैटरी सुरक्षा मानकों ने ग्राहकों के मन से तकनीकी झिझक को पूरी तरह मिटा दिया है, जिसके चलते ईवी अब मजबूरी या विकल्प नहीं बल्कि समझदार खरीदारों की पहली पसंद बन चुके हैं।

दोपहिया सेगमेंट में 88% की छलांग, ओला, एथर, टीवीएस और बजाज में कांटे की टक्कर

इलेक्ट्रिक वाहनों की इस महा-बिक्री में सबसे बड़ा इंजन बनकर उभरा है इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर (e-2W) सेगमेंट। सितंबर के दौरान अकेले इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों की 2,07,314 यूनिट्स की खुदरा बिक्री दर्ज की गई, जो पिछले साल के इसी महीने के मुकाबले 88 प्रतिशत से अधिक की जबर्दस्त वार्षिक वृद्धि दर्शाती है। कुल दोपहिया बाजार में अब इलेक्ट्रिक स्कूटर्स और बाइक्स की हिस्सेदारी 11.6 प्रतिशत के पार जा चुकी है। ओला इलेक्ट्रिक, टीवीएस मोटर कंपनी (iQube), बजाज ऑटो (Chetak) और एथर एनर्जी के बीच नए और किफायती मॉडल्स को लेकर मची प्रतिस्पर्धा का सीधा फायदा आम उपभोक्ताओं को मिल रहा है। त्योहारी सीजन के दौरान शुरू किए गए कैशबैक डिस्काउंट्स, जीरो डाउन पेमेंट ऑफर्स और कम ब्याज दरों वाले फाइनेंसिंग विकल्पों ने टियर-2 और टियर-3 शहरों में रहने वाले कामकाजी युवाओं और घरेलू उपभोक्ताओं को पेट्रोल स्कूटर छोड़कर इलेक्ट्रिक अपनाने के लिए प्रेरित किया है।

पैसेंजर कारों की बिक्री हुई दोगुनी, तिपहिया और कमर्शियल वाहनों में भी जबरदस्त उछाल

समीक्षाधीन महीने में केवल दोपहिया ही नहीं, बल्कि पर्सनल पैसेंजर इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (ई-कार्स) के बाजार में भी अभूतपूर्व तेजी देखी गई है। सितंबर में इलेक्ट्रिक कारों की खुदरा बिक्री सालाना आधार पर लगभग दोगुनी होकर नए स्तर पर पहुंच गई, जिससे कुल कार बाजार में इलेक्ट्रिक यात्री वाहनों की हिस्सेदारी बढ़कर 8.5 प्रतिशत दर्ज की गई। टाटा मोटर्स (Nexon EV, Punch EV, Curvv EV) ने जहां अपनी बादशाहत कायम रखी, वहीं एमजी मोटर, महिंद्रा और हुंडई ने भी बाजार में अपनी हिस्सेदारी तेजी से बढ़ाई है। वहीं यदि व्यावसायिक मोबिलिटी की बात करें तो इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर्स (ई-रिक्शा और ई-ऑटो) सेगमेंट ने एक बार फिर पूरे देश में सबसे ऊंचा पेनेट्रेशन हासिल किया है, जहां कुल बिकने वाले तीन पहिया वाहनों में 64.9 प्रतिशत हिस्सेदारी अकेले इलेक्ट्रिक की रही। इसके साथ ही लास्ट-माइल लॉजिस्टिक्स और ई-कॉमर्स डिलीवरी में उपयोग होने वाले हल्के इलेक्ट्रिक कमर्शियल वाहनों (e-CVs) की बिक्री में भी सालाना आधार पर 150 प्रतिशत से अधिक का धमाकेदार उछाल दर्ज किया गया है।

पीएम ई-ड्राइव स्कीम और राज्यों की नीतिगत छूट बनी इस बंपर ग्रोथ की मजबूत बुनियाद

ऑटो एक्सपर्ट्स के अनुसार, बिक्री में आई इस जबर्दस्त तेजी के पीछे हाल ही में स्वीकृत की गई केंद्र सरकार की नई 'पीएम ई-ड्राइव' (PM Electric Drive Revolution in Innovative Vehicle Enhancement) योजना का बड़ा योगदान है। फेम-2 (FAME-II) के बाद सरकार द्वारा घोषित इस नए वित्तीय प्रोत्साहन ढांचे ने बाजार में सब्सिडी को लेकर बनी अनिश्चितता को पूरी तरह खत्म कर दिया है। इसके अलावा उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, दिल्ली, कर्नाटक और तमिलनाडु जैसी राज्य सरकारों द्वारा दी जाने वाली रोड टैक्स में 100% छूट, रजिस्ट्रेशन फीस माफी और टोल प्लाजा पर विशेष सुविधाएं खरीदारों के लिए भारी बचत का जरिया बन रही हैं। पेट्रोल और डीजल की स्थिर लेकिन ऊंची कीमतों के बीच जहां पारंपरिक गाड़ियों का प्रति किलोमीटर खर्च ₹2 से ₹6 तक बैठता है, वहीं ईवी में यह खर्च घटकर मात्र 30 से 50 पैसे प्रति किलोमीटर रह जाता है, जो मध्यमवर्गीय परिवारों और कॉमर्शियल फ्लीट ऑपरेटर्स के लिए सबसे बड़ा आकर्षण बन रहा है।

चार्जिंग नेटवर्क का विस्तार और आगामी फेस्टिव डिमांड से और बढ़ेंगे आंकड़े

फाडा का अनुमान है कि सितंबर में बना यह रिकॉर्ड केवल एक शुरुआत है और अक्टूबर-नवंबर में पड़ने वाले नवरात्रि, दशहरा और दिवाली के मुख्य त्योहारी दिनों में यह बिक्री और नए रिकॉर्ड बना सकती है। देश भर के राष्ट्रीय राजमार्गों, एक्सप्रेसवे और पेट्रोल पंपों पर ऑयल मार्केटिंग कंपनियों द्वारा लगाए जा रहे फास्ट चार्जर्स से लंबी दूरी की यात्राएं भी अब इलेक्ट्रिक गाड़ियों से आसान हो गई हैं। इसके अलावा कई घरेलू वाहन निर्माता कंपनियां साल के अंत तक नई जेनरेशन की सॉलिड-स्टेट और अधिक रेंज देने वाली एलएफपी बैटरी से लैस मॉडल्स लॉन्च करने की कतार में हैं। ऑटो डीलर्स का कहना है कि अगर सप्लाई चेन और सेमीकंडक्टर आपूर्ति इसी तरह निर्बाध बनी रही, तो चालू वित्त वर्ष के अंत तक भारत का वार्षिक ईवी बाजार 20 लाख यूनिट्स के ऐतिहासिक आंकड़े को आसानी से पार कर जाएगा।

Back to top button