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पीरियड्स में कभी पेट खराब तो कभी कब्ज की आफत? जानिए शरीर में होने वाले इस हार्मोनल रोलरकोस्टर का पूरा विज्ञान

महीने के वो चार-पांच दिन केवल मूड स्विंग्स, बदन दर्द और पेट की ऐंठन तक ही सीमित नहीं रहते, बल्कि कई महिलाओं के लिए यह दौर पेट और पाचन तंत्र की एक अजीबोगरीब जंग बन जाता है। कभी अचानक बार-बार वॉशरूम की तरफ भागना पड़ता है और लूज मोशन की समस्या हो जाती है, तो कभी पेट इतना ज्यादा सख्त और भारी हो जाता है कि गंभीर कब्ज यानी कॉन्स्टिपेशन का सामना करना पड़ता है। अक्सर महिलाएं इसे सामान्य पेट की खराबी समझकर दवाएं खाने लगती हैं या खान-पान की गलती मान लेती हैं, लेकिन मेडिकल साइंस और गायनेकोलॉजी के अनुसार यह कोई आकस्मिक बीमारी नहीं बल्कि शरीर के भीतर होने वाला एक जटिल हार्मोनल खेल है। मासिक धर्म के चक्र के साथ हमारी आंतों का तालमेल बेहद संवेदनशील होता है। गर्भाशय और पाचन तंत्र शरीर में एक-दूसरे के बेहद करीब स्थित होते हैं और जब गर्भाशय में बदलाव होते हैं, तो उसका सीधा असर हमारी आंतों की मांसपेशियों और मल त्याग की प्रक्रिया पर पड़ता है। इस समस्या को साइंटिफिक कम्युनिटी में 'पीरियड पूप' या मेंस्ट्रुअल गट डिस्टर्बेंस कहा जाता है, जिसे समझने के लिए शरीर में होने वाले रासायनिक बदलावों की गहराई में जाना जरूरी है।

लूज मोशन का सबसे बड़ा गुनहगार: प्रोस्टाग्लैंडिंस हार्मोन का अति-स्राव

पीरियड्स शुरू होते ही अचानक लूज मोशन और बार-बार दस्त लगने की सबसे मुख्य वजह 'प्रोस्टाग्लैंडिंस' (Prostaglandins) नामक लिपिड कंपाउंड्स होते हैं। जब शरीर को गर्भधारण न होने का संकेत मिलता है, तो गर्भाशय की अंदरूनी परत यानी एंडोमेट्रियम को टूटना होता है। इस परत को शरीर से बाहर निकालने के लिए गर्भाशय को सिकुड़ना पड़ता है और इसी संकुचन को ट्रिगर करने के लिए प्रोस्टाग्लैंडिंस बड़ी मात्रा में रिलीज होते हैं। जब ये केमिकल्स गर्भाशय की मांसपेशियों को दबाते हैं, तो शरीर में अत्यधिक मात्रा में बने प्रोस्टाग्लैंडिंस रक्त प्रवाह के जरिए पास मौजूद आंतों (Intestines) तक पहुंच जाते हैं। आंतों की चिकनी मांसपेशियों पर इनका असर ठीक गर्भाशय जैसा ही होता है—ये आंतों को भी तेजी से सिकोड़ने लगते हैं। इसके परिणामस्वरूप आंतों की गतिशीलता यानी पेरिस्टालसिस असामान्य रूप से तेज हो जाती है, जिससे भोजन और अपशिष्ट पदार्थ बिना पानी सोखे बहुत तेजी से मलाशय की ओर बढ़ने लगते हैं। यही कारण है कि पीरियड्स के पहले या दूसरे दिन महिलाओं को तेज मरोड़ के साथ पतला दस्त या लूज मोशन झेलना पड़ता है।

पीरियड्स से ठीक पहले कब्ज और भारीपन क्यों घेरता है: प्रोजेस्टेरोन का धीमा असर

पीरियड्स शुरू होने से कुछ दिन पहले की कहानी एकदम उलट होती है और उस समय लूज मोशन नहीं बल्कि असहनीय कब्ज, पेट फूलना और गैस की समस्या सताती है। इसका मुख्य कारण 'प्रोजेस्टेरोन' (Progesterone) हार्मोन का बढ़ा हुआ स्तर है। ओव्यूलेशन के बाद शरीर संभावित प्रेग्नेंसी की तैयारी करता है, जिसके चलते ल्यूटियल फेज में प्रोजेस्टेरोन का लेवल अपने चरम पर पहुंच जाता है। प्रोजेस्टेरोन का मूल स्वभाव मांसपेशियों को शिथिल यानी रिलैक्स करना होता है। यह हार्मोन न केवल गर्भाशय की दीवारों को शांत रखता है बल्कि आंतों की मांसपेशियों की गति को भी बेहद सुस्त कर देता है। जब आंतें धीमी गति से काम करती हैं, तो खाया हुआ खाना और मल आंतों में सामान्य से अधिक समय तक रुका रहता है। इस दौरान बड़ी आंत उस अपशिष्ट से बहुत अधिक पानी सोख लेती है, जिससे मल कड़ा और सूखा हो जाता है। यही वजह है कि डेट आने से 3 से 4 दिन पहले महिलाओं को मल त्याग करने में काफी जोर लगाना पड़ता है, पेट में गैस भर जाती है और भारी बेचैनी महसूस होती है।

तनाव और आंतों का न्यूरोलॉजिकल कनेक्शन: गट-ब्रेन एक्सिस की भूमिका

पाचन तंत्र में इस उतार-चढ़ाव का एक और महत्वपूर्ण पहलू हमारा दिमाग और तनाव का स्तर है, जिसे मेडिकल भाषा में गट-ब्रेन एक्सिस (Gut-Brain Axis) कहा जाता है। पीरियड्स से ठीक पहले और उस दौरान एस्ट्रोजन और सेरोटोनिन जैसे न्यूरोट्रांसमीटर के स्तर में भारी गिरावट आती है, जिसके कारण महिलाओं में चिड़चिड़ापन, एंग्जायटी और मूड स्विंग्स बढ़ जाते हैं। हमारा पाचन तंत्र शरीर का दूसरा दिमाग माना जाता है क्योंकि इसमें लाखों न्यूरॉन्स मौजूद होते हैं। जब महिला मानसिक तनाव या शारीरिक दर्द से गुजरती है, तो शरीर का ऑटोनोमिक नर्वस सिस्टम पाचन प्रक्रिया को असंतुलित कर देता है। जो महिलाएं पहले से ही इर्रिटेबल बॉवेल सिंड्रोम (IBS) या एंडोमेट्रियोसिस जैसी समस्याओं से जूझ रही होती हैं, उनके लक्षण पीरियड्स के दिनों में दोगुने तीव्र हो जाते हैं। तनाव आंतों की संवेदनशीलता को इतना बढ़ा देता है कि मामूली गैस का बुलबुला भी असहनीय मरोड़ और दस्त का कारण बन सकता है।

इस हार्मोनल रोलरकोस्टर से कैसे पाएं राहत: अपनाएं ये जरूरी सावधानियां

मासिक धर्म के दौरान पाचन तंत्र को शांत और संतुलित रखने के लिए कुछ सामान्य लेकिन बेहद प्रभावी बदलाव किए जा सकते हैं।

  1. पीरियड्स से 3-4 दिन पहले जब कब्ज की आशंका ज्यादा हो, तब अपने भोजन में घुलनशील फाइबर जैसे ओट्स, पपीता, हरी पत्तेदार सब्जियां और अलसी के बीज शामिल करें ताकि मल कड़ा न हो।

  2. पीरियड्स शुरू होते ही जब लूज मोशन का खतरा हो, तो अत्यधिक तीखे, तले-भुने, जंक फूड और कैफीन यानी चाय-कॉफी से पूरी तरह परहेज करें क्योंकि कैफीन आंतों को और अधिक उत्तेजित करके दस्त को गंभीर बना सकता है।

  3. पर्याप्त मात्रा में हल्का गुनगुना पानी पिएं, नारियल पानी या छाछ लें ताकि इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन न बिगड़े और शरीर डिहाइड्रेशन से बचा रहे।

  4. पेट के निचले हिस्से पर गर्म पानी की थैली यानी हीटिंग पैड से सिकाई करने से गर्भाशय के साथ-साथ आंतों की मांसपेशियों की ऐंठन भी शांत होती है।

  5. यदि हर महीने लूज मोशन या कब्ज इतना गंभीर हो जाए कि कमजोरी, चक्कर आना या अत्यधिक खून की कमी महसूस होने लगे, तो इसे केवल सामान्य दर्द न मानकर तुरंत किसी अनुभवी स्त्री रोग विशेषज्ञ से परामर्श लेना चाहिए ताकि किसी आंतरिक समस्या का समय पर समाधान हो सके।

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